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Shahjahanpur News: वार्डों में कैमरे नहीं... सुरक्षा कर्मियों की भी कमी, असुरक्षित माहौल में मेडिकल स्टाफ
Wed, 21 Aug 2024 03:49 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 21 Aug 2024 03:49 AM IST
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में पुलिस चौकी के पास बंद पड़ा शौचालय। संवाद
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर और चिकित्सीय स्टाफ सुरक्षित नहीं है। वार्ड में कैमरे तक नहीं लगे हैं। सुरक्षाकर्मी भी नदारद रहते हैं। असुरक्षित माहौल में मेडिकल स्टाफ काम करने के लिए मजबूर है। ऐसे में कोलकाता की मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद से महिला कर्मचारियों में दहशत का माहौल है।
330 बेड का अस्पताल मरीजों से भरा रहता है। ओपीडी में रोजाना 15 सौ से अधिक मरीज पर्चे बनवाते हैं। नए और पुराने पर्चे पर रोजाना पांच हजार मरीजों का आना-जाना रहता है। इतनी भीड़ में अस्पताल और जिगनेरा स्थित कॉलेज परिसर में 135 कैमरे लगे होने का दावा है। अहम बात यह है कि अस्पताल के नए भवन में वार्डों में कैमरे लगे हैं, लेकिन पुराने भवन के वार्ड में कैमरे नहीं लगे हैं।
ऐसे में मरीज के तीमारदार वार्ड में घुसकर आए दिन हंगामा कर डॉक्टर व स्टाफ से अभद्रता करते हैं। जूनियर डॉक्टरों की मानें तो ट्रॉमा सेंटर, ओपीडी और अस्पताल के बाहरी परिसर में लगे कैमरे ही चलते हैं। अन्य कैमरे खराब हैं। सुरक्षा के नाम पर 36 सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। इसमें मात्र 24 ही अस्पताल में कार्यरत हैं। पर्याप्त सुरक्षाकर्मियों के नहीं होने से भी मेडिकल स्टाफ दहशत में रहता है। डॉक्टरों की मानें तो वार्ड में हंगामा होने पर सुरक्षाकर्मियों को बुलाने के लिए फोन करने पड़ते हैं। कर्मचारियों के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग जाते हैं।
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महिला चिकित्सकों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा
-वार्ड में सुरक्षाकर्मी नहीं आते हैं। उनका भ्रमण ट्रॉमा सेंटर व इमरजेंसी में अधिक रहता है। कैमरे भी अधिकतर खराब पड़े हैं। जूनियर डॉक्टर कोलकाता की घटना के बाद सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा का उठा रहे हैं। महिला चिकित्सकों की सुरक्षा सबसे बड़ा बिंदु है।
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गेट पर सुरक्षा, पर चोर दरवाजे से बेधड़क प्रवेश
-राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी गेट, इमरजेंसी गेट पर लोगों की आवाजाही अधिक रहने से सुरक्षाकर्मी को तैनात किया गया, पर कई अन्य दरवाजों की सुरक्षा की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। पर्चा काउंटर के पास खुले गेट पर अवैध रूप से स्टैंड बन चुका है। उसके आगे नए भवन से आसानी से प्रवेश किया जा सकता है।
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शौचालय पर ताला, महिलाएं परेशान
-अस्पताल के बाहरी परिसर में प्रशासनिक भवन के सामने एक शौचालय बना है। उसी का अधिकतर लोग उपयोग करते हैं। पुलिस चौकी के पास बना शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में होने से इसमें ताला पड़ा है। इसके चलते महिलाएं परेशान घूमती हैं। वहीं पर गंदगी का अंबार लगा है। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि शौचालय को सही कराकर शुरू कराएंगे।
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80 सुरक्षाकर्मी और 70 कैमरे बढ़ाए जाएंगे
-जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल में सुरक्षा की मांग उठने के बाद कैमरे और सुरक्षा गार्ड बढ़ाने का प्रस्ताव जरूर कॉलेज प्रशासन बना रहा है।अस्पताल प्रबंधन ने कमेटी का गठन किया है। वे डाॅक्टरों के लिए रेस्ट हाउस और वॉशरूम आदि सुविधाओं की रिपोर्ट तैयार करेगी। इस बीच 80 सुरक्षा कर्मी और 70 कैमरों को बढ़ाने की कार्ययोजना को तैयार किया गया।
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-व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए गठित की गई टीम की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। कैमरे और सुरक्षाकर्मियाें को बढ़ाया जाएगा। छूटे स्थानों पर कैमरे की निगरानी कराएंगे।
डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज
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330 बेड का अस्पताल मरीजों से भरा रहता है। ओपीडी में रोजाना 15 सौ से अधिक मरीज पर्चे बनवाते हैं। नए और पुराने पर्चे पर रोजाना पांच हजार मरीजों का आना-जाना रहता है। इतनी भीड़ में अस्पताल और जिगनेरा स्थित कॉलेज परिसर में 135 कैमरे लगे होने का दावा है। अहम बात यह है कि अस्पताल के नए भवन में वार्डों में कैमरे लगे हैं, लेकिन पुराने भवन के वार्ड में कैमरे नहीं लगे हैं।
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ऐसे में मरीज के तीमारदार वार्ड में घुसकर आए दिन हंगामा कर डॉक्टर व स्टाफ से अभद्रता करते हैं। जूनियर डॉक्टरों की मानें तो ट्रॉमा सेंटर, ओपीडी और अस्पताल के बाहरी परिसर में लगे कैमरे ही चलते हैं। अन्य कैमरे खराब हैं। सुरक्षा के नाम पर 36 सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। इसमें मात्र 24 ही अस्पताल में कार्यरत हैं। पर्याप्त सुरक्षाकर्मियों के नहीं होने से भी मेडिकल स्टाफ दहशत में रहता है। डॉक्टरों की मानें तो वार्ड में हंगामा होने पर सुरक्षाकर्मियों को बुलाने के लिए फोन करने पड़ते हैं। कर्मचारियों के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग जाते हैं।
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महिला चिकित्सकों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा
-वार्ड में सुरक्षाकर्मी नहीं आते हैं। उनका भ्रमण ट्रॉमा सेंटर व इमरजेंसी में अधिक रहता है। कैमरे भी अधिकतर खराब पड़े हैं। जूनियर डॉक्टर कोलकाता की घटना के बाद सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा का उठा रहे हैं। महिला चिकित्सकों की सुरक्षा सबसे बड़ा बिंदु है।
गेट पर सुरक्षा, पर चोर दरवाजे से बेधड़क प्रवेश
-राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी गेट, इमरजेंसी गेट पर लोगों की आवाजाही अधिक रहने से सुरक्षाकर्मी को तैनात किया गया, पर कई अन्य दरवाजों की सुरक्षा की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। पर्चा काउंटर के पास खुले गेट पर अवैध रूप से स्टैंड बन चुका है। उसके आगे नए भवन से आसानी से प्रवेश किया जा सकता है।
शौचालय पर ताला, महिलाएं परेशान
-अस्पताल के बाहरी परिसर में प्रशासनिक भवन के सामने एक शौचालय बना है। उसी का अधिकतर लोग उपयोग करते हैं। पुलिस चौकी के पास बना शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में होने से इसमें ताला पड़ा है। इसके चलते महिलाएं परेशान घूमती हैं। वहीं पर गंदगी का अंबार लगा है। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि शौचालय को सही कराकर शुरू कराएंगे।
80 सुरक्षाकर्मी और 70 कैमरे बढ़ाए जाएंगे
-जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल में सुरक्षा की मांग उठने के बाद कैमरे और सुरक्षा गार्ड बढ़ाने का प्रस्ताव जरूर कॉलेज प्रशासन बना रहा है।अस्पताल प्रबंधन ने कमेटी का गठन किया है। वे डाॅक्टरों के लिए रेस्ट हाउस और वॉशरूम आदि सुविधाओं की रिपोर्ट तैयार करेगी। इस बीच 80 सुरक्षा कर्मी और 70 कैमरों को बढ़ाने की कार्ययोजना को तैयार किया गया।
-व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए गठित की गई टीम की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। कैमरे और सुरक्षाकर्मियाें को बढ़ाया जाएगा। छूटे स्थानों पर कैमरे की निगरानी कराएंगे।
डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कॉलेज में पुलिस चौकी के पास बंद पड़ा शौचालय। संवाद