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थोक माल की नई बिलिंग से तय होंगी फुटकर कीमतेें
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Sun, 02 Jul 2017 01:07 AM IST
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जीएसटी लागू होने से देश-प्रदेश भले ही आर्थिक समृद्धि के नए युग में प्रवेश कर गया हो, लेकिन इससे शहर समेत जिले के बाजार पहले दिन पूरी तरह अप्रभावित रहे। किराना हो या कंफैक्शनरी अथवा कॉस्मेटिक्स, सभी ट्रेड्स के व्यापारी पहले से उपलब्ध स्टॉक पुराने फुटकर दामों पर बेच कर रहे हैं। हालांकि, जीएसटी के सापेक्ष विभिन्न वस्तुओं की नई एमआरपी को लेकर पहले दिन विक्रेताओं से लेकर खरीददारों तक में ऊहापोह की स्थिति रही।
सरकारी स्तर पर वस्तु एवं सेवा कर लागू करने की तैयारियां एक माह पहले ही शुरू हो गईं थीं। एक ओर केंद्र सरकार और वित्त मंत्री प्रचार माध्यमों से जीएसटी की विशेषताओं को बताने में जुटे रहे, वहीं वाणिज्य कर विभाग ने उद्यमियों समेत विभिन्न व्यवसायों से जुड़े कारोबारियों की कार्यशालाएं आयोजित करने की शृंखला शुरू की। इसके बावजूद जीएसटी को लेकर समाज के सभी वर्गों मेें तरह-तरह की आशंकाएं बरकरार हैं।
उदाहरणार्थ, जीएसटी लागू होने पर स्टेशनरी आइटम और स्कूल बैग सस्ते होने तय हैं, लेकिन इस ट्रेड से जुड़े कारोबारियों के अनुसार स्कूल बैग को जीएसटी के दो अलग-अलग स्लैब में रखा गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस क्वालिटी अथवा मूल्य श्रेणी के बैग पर कितना कर लगेगा। इसी तरह ट्रैक्टर के टायर-ट्यूब के दाम घटाए गए हैं, लेकिन फुटकर कीमतें पुरानी दरों पर स्थिर हैं। तारीन बहादुरगंज स्थित पांडेय टायर्स के राजेश शुक्ला के अनुसार नए माल की डिलीवरी की बिलिंग क्लीयर होने पर ही नई खुदरा दरें तय होंगी।
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जीएसटी को लेकर कारोबारियों का नजरिया
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मिठाइयों के दाम दूध और मावा के भाव पर निर्भर करते हैं। इन दिनों दूध और मावा की मांग बढ़ी है। सहालगी सीजन बीतने के बाद मिठाइयों के दाम हर साल की तरह खुद नीचे आ जाएंगे।
- प्रकाश गुप्ता, मिठाई विक्रेता
कॉस्मेटिक्स की एजेंसियों ने पुराना माल जिस रेट पर दिया, उसी के अनुरूप थोक और फुटकर बिक्री कर रहे हैं। नए माल की सप्लाई और बिलिंग में अभी कम से कम 15 दिन का समय लगेगा।
- उमेश गुप्ता, कॉस्मेटिक्स व्यवसायी
जीएसटी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में अभी कुछ समय लगेगा। सरकार ने स्टेशनरी के कई आइटम दो अलग-अलग टैक्स स्लैब में बांट दिए हैं। इनकी एमआरपी के बारे में अनिश्चितता बनी है।
- गौरव अरोरा, स्टेशनरी व्यवसायी
सुना है कि जीएसटी लागू होने के बाद शुगर बेस्ड कंफैक्शनरी, बिस्किट, डेयरी उत्पाद, मिल्क पाउडर, सॉस, मैकरोनी, नूडल्स आदि के दाम घट जाएंगे। कीमतों में कमी तभी आएगी, जब नया माल आएगा।
- कमल कौशल, कंफैक्शनरी विक्रेेता
ग्राहकों का नजरिया
किसी भी नई व्यवस्था के लागू होने पर उससे तत्काल लाभ की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। जीएसटी से देश के आम आदमी को लाभ मिलना तय है। फिलहाल बाजार पुरानी दरों पर चल रहा है।
- कमल कुमार, कटिया टोला
घरेलू जरूरतोें का अधिकांश सामान बाजार में पुराने रेट पर बिक रहा है, लेकिन अगले एक माह के अंदर उपभोक्ता वस्तुओं की फुटकर दरों में निश्चित रूप से कमी आएगी। इसके लिए धैर्य रखें।
- स्वदेश शुक्ला, इंदिरानगर
सुबह सोकर उठने पर सबसे पहले टूथपेस्ट की जरूरत पड़ती है। बाद में नाश्ता और भोजन में इस्तेमाल होने वाली सारी वस्तुएं आने वाले कुछ दिनों में सस्ती होनी तय हैं। सरकार के प्रयास की सराहना करनी चाहिए।
- शिव कुमार, सदर बाजार
यह सही है कि बाजार पर अभी जीएसटी का असर नहीं दिख रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री की नीयत पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। फुटकर दरों में कमी जल्द दिखने लगेगी।
- राकेश गुप्ता, छोटी सब्जी मंडी
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सरकारी स्तर पर वस्तु एवं सेवा कर लागू करने की तैयारियां एक माह पहले ही शुरू हो गईं थीं। एक ओर केंद्र सरकार और वित्त मंत्री प्रचार माध्यमों से जीएसटी की विशेषताओं को बताने में जुटे रहे, वहीं वाणिज्य कर विभाग ने उद्यमियों समेत विभिन्न व्यवसायों से जुड़े कारोबारियों की कार्यशालाएं आयोजित करने की शृंखला शुरू की। इसके बावजूद जीएसटी को लेकर समाज के सभी वर्गों मेें तरह-तरह की आशंकाएं बरकरार हैं।
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उदाहरणार्थ, जीएसटी लागू होने पर स्टेशनरी आइटम और स्कूल बैग सस्ते होने तय हैं, लेकिन इस ट्रेड से जुड़े कारोबारियों के अनुसार स्कूल बैग को जीएसटी के दो अलग-अलग स्लैब में रखा गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस क्वालिटी अथवा मूल्य श्रेणी के बैग पर कितना कर लगेगा। इसी तरह ट्रैक्टर के टायर-ट्यूब के दाम घटाए गए हैं, लेकिन फुटकर कीमतें पुरानी दरों पर स्थिर हैं। तारीन बहादुरगंज स्थित पांडेय टायर्स के राजेश शुक्ला के अनुसार नए माल की डिलीवरी की बिलिंग क्लीयर होने पर ही नई खुदरा दरें तय होंगी।
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जीएसटी को लेकर कारोबारियों का नजरिया
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मिठाइयों के दाम दूध और मावा के भाव पर निर्भर करते हैं। इन दिनों दूध और मावा की मांग बढ़ी है। सहालगी सीजन बीतने के बाद मिठाइयों के दाम हर साल की तरह खुद नीचे आ जाएंगे।
- प्रकाश गुप्ता, मिठाई विक्रेता
कॉस्मेटिक्स की एजेंसियों ने पुराना माल जिस रेट पर दिया, उसी के अनुरूप थोक और फुटकर बिक्री कर रहे हैं। नए माल की सप्लाई और बिलिंग में अभी कम से कम 15 दिन का समय लगेगा।
- उमेश गुप्ता, कॉस्मेटिक्स व्यवसायी
जीएसटी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में अभी कुछ समय लगेगा। सरकार ने स्टेशनरी के कई आइटम दो अलग-अलग टैक्स स्लैब में बांट दिए हैं। इनकी एमआरपी के बारे में अनिश्चितता बनी है।
- गौरव अरोरा, स्टेशनरी व्यवसायी
सुना है कि जीएसटी लागू होने के बाद शुगर बेस्ड कंफैक्शनरी, बिस्किट, डेयरी उत्पाद, मिल्क पाउडर, सॉस, मैकरोनी, नूडल्स आदि के दाम घट जाएंगे। कीमतों में कमी तभी आएगी, जब नया माल आएगा।
- कमल कौशल, कंफैक्शनरी विक्रेेता
ग्राहकों का नजरिया
किसी भी नई व्यवस्था के लागू होने पर उससे तत्काल लाभ की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। जीएसटी से देश के आम आदमी को लाभ मिलना तय है। फिलहाल बाजार पुरानी दरों पर चल रहा है।
- कमल कुमार, कटिया टोला
घरेलू जरूरतोें का अधिकांश सामान बाजार में पुराने रेट पर बिक रहा है, लेकिन अगले एक माह के अंदर उपभोक्ता वस्तुओं की फुटकर दरों में निश्चित रूप से कमी आएगी। इसके लिए धैर्य रखें।
- स्वदेश शुक्ला, इंदिरानगर
सुबह सोकर उठने पर सबसे पहले टूथपेस्ट की जरूरत पड़ती है। बाद में नाश्ता और भोजन में इस्तेमाल होने वाली सारी वस्तुएं आने वाले कुछ दिनों में सस्ती होनी तय हैं। सरकार के प्रयास की सराहना करनी चाहिए।
- शिव कुमार, सदर बाजार
यह सही है कि बाजार पर अभी जीएसटी का असर नहीं दिख रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री की नीयत पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। फुटकर दरों में कमी जल्द दिखने लगेगी।
- राकेश गुप्ता, छोटी सब्जी मंडी