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धंधेबाजों के निशाने पर राष्ट्रीय ध्वज
शाहजहांपुर
Updated Sun, 25 Jan 2015 12:48 AM IST
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स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती एवं अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर फहराया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) अब धंधेबाजों के निशाने पर आ गया है। कम कीमत में तैयार होने और अधिक मुनाफाखोरी के चक्कर में धंधेबाज सूती और टेरीकाट के कपड़ों से बने राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री कर रहे हैं।
तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज होने का गौरव प्राप्त है। इसलिए इसका सम्मान लोगों के मन में होता है। राष्ट्रीय पर्वों पर स्कूलों, कॉलेजों और अन्य तमाम स्थानों पर तिरंगा फहराया जाता है। इसलिए इसकी बिक्री भी हर साल काफी संख्या में होती है। इसी के चलते धंधेबाजों ने सूती कपड़ों से बने राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री करना शुरू कर दिया है। इसमें उन लोगों को मुनाफा भी अच्छा होता है।
खादी से निर्मित तिरंगा झंडा महंगा होने की वजह से लोग इसे खरीदने से बच रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस थानों एवं अन्य कुछ मुख्य स्थलों को छोड़कर अधिकांश आधुनिक देशभक्त सूती के कपड़ों से बना तिरंगा झंडा ही खरीद रहे हैं। इसी वजह से खादी आश्रमों पर तिरंगे झंडों की बिक्री कम हो गई है।
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गोविंदगंज स्थित श्री गांधी आश्रम खादी भंडार के इंचार्ज राज किशोर तिवारी एवं कृपाचार्य वर्मा ने बताया कि शनिवार शाम तक करीब 25 झंडों की बिक्री की जा चुकी है। खिरनीबाग स्थित खादी भंडार के संचालक सतीश चंद्र मिश्र ने बताया कि उनके केंद्र पर केवल पांच झंडों की ही बिक्री हुई है।
खादी आश्रमों पर झंडों की ये है रेंज
नाप कीमत
70×45 सेमी 200 रुपये
90×60 सेमी 400 रुपये
135×90 सेमी 800 रुपये
180×120 सेमी 1100 रुपये
प्रदेश के तीन जिलों में झंडे बनाने की अनुमति
गोविंदगंज स्थित खादी आश्रम के लेखाकार शैलेष दुबे ने बताया कि प्रदेश में केवल तीन जिलों के खादी आश्रमों को तिरंगा झंडा बनाने की अनुमति है। इन जिलों में बाराबंकी, अकबरपुर, मेरठ शामिल हैं। बताया कि यह अनुमति खादी कमीशन मुंबई से मिलती है।
बाजार में उपलब्ध हैं टैटू और बैज
गणतंत्र दिवस की तैयारियों से संबंधित तमाम आइटम बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें तिरंगे के बैज, टोपियां, टैटू एवं अन्य कई आइटमों को बच्चों को खरीद रहे हैं, जिससे कि गणतंत्र दिवस पर स्कूलों में होने वाले विभिन्न राष्ट्रभक्ति से प्रेरित कार्यक्रमों के दौरान प्रयोग कर सकें।
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तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज होने का गौरव प्राप्त है। इसलिए इसका सम्मान लोगों के मन में होता है। राष्ट्रीय पर्वों पर स्कूलों, कॉलेजों और अन्य तमाम स्थानों पर तिरंगा फहराया जाता है। इसलिए इसकी बिक्री भी हर साल काफी संख्या में होती है। इसी के चलते धंधेबाजों ने सूती कपड़ों से बने राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री करना शुरू कर दिया है। इसमें उन लोगों को मुनाफा भी अच्छा होता है।
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खादी से निर्मित तिरंगा झंडा महंगा होने की वजह से लोग इसे खरीदने से बच रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस थानों एवं अन्य कुछ मुख्य स्थलों को छोड़कर अधिकांश आधुनिक देशभक्त सूती के कपड़ों से बना तिरंगा झंडा ही खरीद रहे हैं। इसी वजह से खादी आश्रमों पर तिरंगे झंडों की बिक्री कम हो गई है।
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गोविंदगंज स्थित श्री गांधी आश्रम खादी भंडार के इंचार्ज राज किशोर तिवारी एवं कृपाचार्य वर्मा ने बताया कि शनिवार शाम तक करीब 25 झंडों की बिक्री की जा चुकी है। खिरनीबाग स्थित खादी भंडार के संचालक सतीश चंद्र मिश्र ने बताया कि उनके केंद्र पर केवल पांच झंडों की ही बिक्री हुई है।
खादी आश्रमों पर झंडों की ये है रेंज
नाप कीमत
70×45 सेमी 200 रुपये
90×60 सेमी 400 रुपये
135×90 सेमी 800 रुपये
180×120 सेमी 1100 रुपये
प्रदेश के तीन जिलों में झंडे बनाने की अनुमति
गोविंदगंज स्थित खादी आश्रम के लेखाकार शैलेष दुबे ने बताया कि प्रदेश में केवल तीन जिलों के खादी आश्रमों को तिरंगा झंडा बनाने की अनुमति है। इन जिलों में बाराबंकी, अकबरपुर, मेरठ शामिल हैं। बताया कि यह अनुमति खादी कमीशन मुंबई से मिलती है।
बाजार में उपलब्ध हैं टैटू और बैज
गणतंत्र दिवस की तैयारियों से संबंधित तमाम आइटम बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें तिरंगे के बैज, टोपियां, टैटू एवं अन्य कई आइटमों को बच्चों को खरीद रहे हैं, जिससे कि गणतंत्र दिवस पर स्कूलों में होने वाले विभिन्न राष्ट्रभक्ति से प्रेरित कार्यक्रमों के दौरान प्रयोग कर सकें।