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जलालाबाद में मुंसिफ कोर्ट मुकदमे जिला मुख्यालय पर
जलालाबाद (शाहजहांपुर)
Updated Sat, 18 Apr 2015 07:37 PM IST
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यहां मुंसिफ कोर्ट स्थापित हुए तीन साल बीत गए, लेकिन अभी तक जलालाबाद कोतवाली समेत क्षेत्र के तीन थाने नहीं जुड़ सके हैं। इससे फौजदारी मामलों से जुड़ेे वादकारियों को अपने मुकदमों की पैरवी के लिए शाहजहांपुर जाना पड़ता है। वहीं शासन की गरीब जनता को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने की मंशा को भी पलीता लग रहा है।
क्षेत्र की जनता की मांग और तहसील के अधिक्ताओं द्वारा किए गए लंबे आंदोलन के बाद 27 जुलाई 2012 को तहसील परिसर में ही वकीलों के बैठने को बने हाल को खाली कराकर उसमें मुंसिफ कोर्ट स्थापित करा दिया गया। शुरुआती दौर में इस कोर्ट में सिविल के 25 हजार से कम मालियत वाले मुकदमों की सुनवाई ही शुरू हो सकी। इसके बाद वकीलों की मांग पर वर्ष 2013 में इस कोर्ट से क्षेत्र के परौर और कलान थाने के फौजदारी से जुड़े मुकदमों की सुनवाई भी शुरू हो गई। इस दौरान यह आश्वासन दिया गया था कि छह महीने के अंदर शेष तीन थानों, जलालाबाद, अल्हागंज और मिर्जापुर के मुकदमों की सुनवाई भी यहीं शुरू हो जाएगी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
तहसील में कोर्ट होने के बावजूद इन थानों के न जुड़ने से क्षेत्र की गरीब जनता को न केवल अतिरिक्त धन का खर्च वहन करना पड़ता है बल्कि समय की बर्बादी झेलना भी उनकी मजबूरी है।
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इस दिशा में कोई ठोस रणनीति बनाकर पैरवी न हो पाने से उक्त तीन थानों का कोर्ट से जुड़ाव नहीं हो सका है। हालांकि पूर्व में इस मामले को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन द्वारा किया गया विरोध भी देरी की वजह बन गया। अब इस मामले में कोई विरोध नहीं है और इसके लिए बार संघ द्वारा प्रयास करने की जरूरत है।
-लालाराम शर्मा, पूर्व अध्यक्ष बार संघ
मुंसिफ कोर्ट से छूटे हुए थानों को जोड़े जाने को लेकर कुछ समय पहले ही सीजेएम से वार्ता हुई थी। इसमें प्रस्ताव बनाकर भेजे जाने को कहा गया था। प्रस्ताव तैयार करवा लिया गया है। इस दिशा में बार संघ पूरी तरह से प्रयासरत हैं और जल्द ही शाहजहंापुर से उक्त थानों के फौजदारी वाद इस कोर्ट में ट्रांसफर हो जाएंगे।
-श्रीकृष्ण यादव, अध्यक्ष बार संघ
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क्षेत्र की जनता की मांग और तहसील के अधिक्ताओं द्वारा किए गए लंबे आंदोलन के बाद 27 जुलाई 2012 को तहसील परिसर में ही वकीलों के बैठने को बने हाल को खाली कराकर उसमें मुंसिफ कोर्ट स्थापित करा दिया गया। शुरुआती दौर में इस कोर्ट में सिविल के 25 हजार से कम मालियत वाले मुकदमों की सुनवाई ही शुरू हो सकी। इसके बाद वकीलों की मांग पर वर्ष 2013 में इस कोर्ट से क्षेत्र के परौर और कलान थाने के फौजदारी से जुड़े मुकदमों की सुनवाई भी शुरू हो गई। इस दौरान यह आश्वासन दिया गया था कि छह महीने के अंदर शेष तीन थानों, जलालाबाद, अल्हागंज और मिर्जापुर के मुकदमों की सुनवाई भी यहीं शुरू हो जाएगी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
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तहसील में कोर्ट होने के बावजूद इन थानों के न जुड़ने से क्षेत्र की गरीब जनता को न केवल अतिरिक्त धन का खर्च वहन करना पड़ता है बल्कि समय की बर्बादी झेलना भी उनकी मजबूरी है।
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इस दिशा में कोई ठोस रणनीति बनाकर पैरवी न हो पाने से उक्त तीन थानों का कोर्ट से जुड़ाव नहीं हो सका है। हालांकि पूर्व में इस मामले को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन द्वारा किया गया विरोध भी देरी की वजह बन गया। अब इस मामले में कोई विरोध नहीं है और इसके लिए बार संघ द्वारा प्रयास करने की जरूरत है।
-लालाराम शर्मा, पूर्व अध्यक्ष बार संघ
मुंसिफ कोर्ट से छूटे हुए थानों को जोड़े जाने को लेकर कुछ समय पहले ही सीजेएम से वार्ता हुई थी। इसमें प्रस्ताव बनाकर भेजे जाने को कहा गया था। प्रस्ताव तैयार करवा लिया गया है। इस दिशा में बार संघ पूरी तरह से प्रयासरत हैं और जल्द ही शाहजहंापुर से उक्त थानों के फौजदारी वाद इस कोर्ट में ट्रांसफर हो जाएंगे।
-श्रीकृष्ण यादव, अध्यक्ष बार संघ