खनन से बना 'मौत' का गड्ढा: डूबने से तीन बच्चों की गई जान, दो को ग्रामीणों ने बचाया; पहले भी हो चुकी है घटना
ग्रामीणों का कहना है कि ईंट-भट्ठे वालों के खनन के लिए कोई नियम कानून नहीं है। भट्ठे वाले पांच फीट से लेकर 25 फिट गहराई तक ईंट बनाने के लिए मिट्टी का खनन करते हैं। इससे इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।
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शाहजहांपुर के मिर्जापुर क्षेत्र के ग्राम बहेरिया में बृहस्पतिवार को पांच बच्चे खेत में बने गड्ढे में नहाते समय डूबने लगे। आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने दो बच्चों को बचा लिया। तीन बच्चों की डूबकर मृत्यु हो गई। ईंट-भट्ठों के लिए होने वाले खनन से बने गहरे गड्ढों में डूबकर बच्चों की मौत की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले पिछले साल ही थरिया गांव में खनन से हुए गड्ढे में डूबकर एक बालक की मौत हो चुकी है। एसडीएम ने कहा कि पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये की दैवीय आपदा दिलाने की कोशिश जाएगी।
इन बच्चों की हुई मौत
शिवा (10) पुत्र विजय
मोनू (10) पुत्र सौरभ
रेहान (9) पुत्र आशिक
ग्रामीणों का कहना है कि ईंट-भट्ठे वालों के खनन के लिए कोई नियम कानून नहीं है। भट्ठे वाले पांच फीट से लेकर 25 फिट गहराई तक ईंट बनाने के लिए मिट्टी का खनन करते हैं। इससे इस तरह की घटनाएं होती रहतीं हैं। बावजूद इसके प्रशासन अनदेखी करता रहता है।
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तीन बच्चों की मौत की सूचना पर एसडीएम दशरथ कुमार, सीओ जलालाबाद अजय राय ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की। एसडीएम ने बताया कि खनन के गड्ढे काफी पुराने हैं। ये कई वर्ष पहले किए गए लगते हैं। अब इस तरह के खनन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। मृत बच्चों के परिजनों को दैवीय आपदा के तहत चार-चार लाख रुपये दिलवाने का प्रयास किया जा रहा है।
बिना बताए घर से निकले थे बच्चे
सौरभ ने बताया कि उनका इकलौता नौ वर्षीय पुत्र मोनू बृहस्पतिवार को करीब पूर्वाह्न 11 बजे अपने साथियों के साथ बगैर किसी को बताए घर से निकल गया था। डूबने से बचे विपिन और कृष्णा ने बताया कि मोनू, शिवा और रेहान पानी में आगे थे, जबकि वे दोनों पीछे थे। आगे बढ़ रहे मोनू, शिवा और रेहान डूबने लगे तो पहले उन लोगों ने बचाने की कोशिश की।
जब वे भी डूबने लगे तो उन्होंने शोर मचाया। आसपास खेतों पर काम कर रहे कई लोग आ गए। उन्होंने उन लोगों को तो बाहर निकाल लिया, लेकिन मोनू, रेहान और शिवा डूब गए। तब तक कई लोग गांव से भी आ गए। उन लोगों ने तीनों बच्चों को बाहर निकला लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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मोनू तीन बहनों रौनक, गौरी और गंगा का इकलौता भाई था। बेटे की मौत से मां शिवानी, दादी कुसुम, बाबा सोनपाल और पिता सौरभ का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं शिवा के तीन भाई जयदेव, पवन व शनि हैं। शिवा नाना ओमकार के यहां आया था। शिवा के पिता विजय परिवार सहित राजस्थान में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने गए थे। बेटे की मौत की सूचना पर गांव आए।
रेहान गांव के प्राथमिक स्कूल में कक्षा चार का छात्र था। उसका एक भाई अलताब और दो बहनें रेव और आलिया हैं। बकरीद के दिन बड़े बेटे की मौत से रुबीना और दादी मुनीशा बार-बार बेहोश हो रहीं हैं।