{"_id":"5b6c92184f1c1b75568b63fd","slug":"meritorious-students-get-bhavishya-jyoti-samman","type":"story","status":"publish","title_hn":"भविष्य ज्योति सम्मान: मेडल पाकर खिले मेधावियों के चेहरे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भविष्य ज्योति सम्मान: मेडल पाकर खिले मेधावियों के चेहरे
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,शाहजहांपुर
Updated Fri, 10 Aug 2018 12:42 AM IST
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आर्य महिला महाविद्यालय में आयोजित अमर उजाला के भविष्य ज्योति सम्मान समारोह में डीएम अमृत त्रिपाठी, एसपी डॉ. एस चन्नप्पा, एसडीएम सदर राजी मिश्रा, डीआईओएस शैफाली प्रताप, डीएफओ श्रीगोपाल ओझा, प्राचार्या डॉ. कनक रानी के हाथों मेडल और प्रशस्ति पत्र पाकर मेधावियों के चेहरे खिल उठे। उनके चेहरों की चमक साबित कर रही थी कि उनको मिला यह सम्मान उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरणापुंज है। अमर उजाला के भविष्य ज्योति सम्मान समारोह में जिले के विभिन्न विद्यालयों के उन 54 मेधावियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने हाईस्कूल और इंटर मीडिएट में टॉप कर शाहजहांपुर का नाम रोशन किया। इस मौके पर अफसरों ने अमर उजाला की इस पहल की सराहना की।
आर्य महिला महाविद्यालय के सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ डीएम अमृत त्रिपाठी, एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित और काकोरी कांड के महानायक क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। महाविद्यालय की छात्राओं ने संगीत शिक्षिका संजीवनी मानेकर के नेतृत्व में स्वागत गीत गाया। दो घंटे से ज्यादा चल कार्यक्रम के दौरान डीएम अमृत त्रिपाठी ने मेधावियों से सीधे बात की। उनकी जिज्ञासाओं और सवालों का जवाब भी दिया। डीएम ने मेधावियों से कहा कि वह लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ें। मेधावी ही भारत का भविष्य हैं। उन्होंने बाकी छात्र-छात्राओं को भी मेधावियों से प्रेरणा लेने को प्रेरित किया। महाविद्यालय प्रबंधक अमितेष अमित ने भी मेधावियों को सुझाव दिए। संचालन इंदु अजनबी और कॉलेज की प्रवक्ता डॉ. स्वेता सक्सेना ने किया। अधिकारियों ने अमर उजाला की इस पहल को काफी सराहा।
डीएम ने मेधावियों से साझा किए छात्र जीवन के अनुभव
- डीएम अमृत त्रिपाठी ने अपने छात्र जीवन के अनुभवों को मेधावियों के साथ साझा किया। डीएम ने कहा कि जब वह हाई स्कूल इंटर के छात्र थे तब उनमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह सीधे डीएम-एसपी से सवाल कर सकें। डीएम-एसपी के बारे में अखबारों में ही पढ़ते थे। आज काफी परिवर्तन हुआ है। इंटरनेट का जमाना है। नई पीढ़ी काफी एडवांस है। उन्होंने मेधावियों से ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाने को कहा। उन्होंने मेधावियों को स्वच्छ भारत मिशन में भी योगदान देने का आह्वान किया। कहा कि अन्य छात्र-छात्राओं को भी मेधावियों से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
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एसपी बोले, हाईस्कूल और इंटर मीडिएट हैं लांचिंग पैड
- एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने भी मेधावियों को अपने छात्र जीवन के अनुभवों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हाईस्कूल और इंटर मीडिएट ही लांचिंग पैड हैं। इन कक्षाओं को पास करने के बाद ही हमें तय कर लेना चाहिए कि हमें किस दिशा में कहां तक जाना है। एसपी ने कहा कि वह खुद भी छोटे स्कूल में पढ़े हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रतिभाओं की कमी नहीं है। गांव-देहात के विद्यार्थी टॉप कर रहे हैं। निश्चित ही देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।
छात्र-छात्राओं के बेबाक सवालों के डीएम ने दिए जवाब
सम्मान समारोह में कुछ देर के लिए डीएम अमृत त्रिपाठी खुद शिक्षक बन गए। डीएम ने मेधावियों से कहा कि अगर उनका कोई सवाल है, कोई जिज्ञासा है तो वह बताएं। छात्र-छात्राएं भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने डीएम से बेबाकी से सवाल किए तो डीएम ने भी उनके सधे जवाब दिए। डीएम ने कहा कि पढ़ाई के साथ प्रेक्टिकल भी बेहद जरूरी है। यह भी अच्छी तरह समझ में आना चाहिए कि कौन सा सूत्र कहां पर जरूरी है। छात्र-छात्राओं ने डीएम से संस्कृत की दुर्दशा, पौधरोपण के बाद उनकी देखभाल की व्यवस्था, गाय के संरक्षण, सफाई व्यवस्था आदि बिंदुओं पर भी सवाल किए। डीएम ने विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं। बिना नाम के शिकायत करने के सवाल पर डीएम ने कहा कि अगर रानी लक्ष्मीबाई बिना अपने नाम के अंग्रेजों से संघर्ष करतीं तो आज उनको कौन जानता। इसलिए जरूरी है कि जो भी करें अपने नाम के साथ करें।
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आर्य महिला महाविद्यालय के सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ डीएम अमृत त्रिपाठी, एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित और काकोरी कांड के महानायक क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। महाविद्यालय की छात्राओं ने संगीत शिक्षिका संजीवनी मानेकर के नेतृत्व में स्वागत गीत गाया। दो घंटे से ज्यादा चल कार्यक्रम के दौरान डीएम अमृत त्रिपाठी ने मेधावियों से सीधे बात की। उनकी जिज्ञासाओं और सवालों का जवाब भी दिया। डीएम ने मेधावियों से कहा कि वह लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ें। मेधावी ही भारत का भविष्य हैं। उन्होंने बाकी छात्र-छात्राओं को भी मेधावियों से प्रेरणा लेने को प्रेरित किया। महाविद्यालय प्रबंधक अमितेष अमित ने भी मेधावियों को सुझाव दिए। संचालन इंदु अजनबी और कॉलेज की प्रवक्ता डॉ. स्वेता सक्सेना ने किया। अधिकारियों ने अमर उजाला की इस पहल को काफी सराहा।
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डीएम ने मेधावियों से साझा किए छात्र जीवन के अनुभव
- डीएम अमृत त्रिपाठी ने अपने छात्र जीवन के अनुभवों को मेधावियों के साथ साझा किया। डीएम ने कहा कि जब वह हाई स्कूल इंटर के छात्र थे तब उनमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह सीधे डीएम-एसपी से सवाल कर सकें। डीएम-एसपी के बारे में अखबारों में ही पढ़ते थे। आज काफी परिवर्तन हुआ है। इंटरनेट का जमाना है। नई पीढ़ी काफी एडवांस है। उन्होंने मेधावियों से ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाने को कहा। उन्होंने मेधावियों को स्वच्छ भारत मिशन में भी योगदान देने का आह्वान किया। कहा कि अन्य छात्र-छात्राओं को भी मेधावियों से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
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एसपी बोले, हाईस्कूल और इंटर मीडिएट हैं लांचिंग पैड
- एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने भी मेधावियों को अपने छात्र जीवन के अनुभवों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हाईस्कूल और इंटर मीडिएट ही लांचिंग पैड हैं। इन कक्षाओं को पास करने के बाद ही हमें तय कर लेना चाहिए कि हमें किस दिशा में कहां तक जाना है। एसपी ने कहा कि वह खुद भी छोटे स्कूल में पढ़े हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रतिभाओं की कमी नहीं है। गांव-देहात के विद्यार्थी टॉप कर रहे हैं। निश्चित ही देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।
छात्र-छात्राओं के बेबाक सवालों के डीएम ने दिए जवाब
सम्मान समारोह में कुछ देर के लिए डीएम अमृत त्रिपाठी खुद शिक्षक बन गए। डीएम ने मेधावियों से कहा कि अगर उनका कोई सवाल है, कोई जिज्ञासा है तो वह बताएं। छात्र-छात्राएं भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने डीएम से बेबाकी से सवाल किए तो डीएम ने भी उनके सधे जवाब दिए। डीएम ने कहा कि पढ़ाई के साथ प्रेक्टिकल भी बेहद जरूरी है। यह भी अच्छी तरह समझ में आना चाहिए कि कौन सा सूत्र कहां पर जरूरी है। छात्र-छात्राओं ने डीएम से संस्कृत की दुर्दशा, पौधरोपण के बाद उनकी देखभाल की व्यवस्था, गाय के संरक्षण, सफाई व्यवस्था आदि बिंदुओं पर भी सवाल किए। डीएम ने विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं। बिना नाम के शिकायत करने के सवाल पर डीएम ने कहा कि अगर रानी लक्ष्मीबाई बिना अपने नाम के अंग्रेजों से संघर्ष करतीं तो आज उनको कौन जानता। इसलिए जरूरी है कि जो भी करें अपने नाम के साथ करें।