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ददरौलः सरल छवि और जितिन के जोर से आसान हुई मानवेंद्र सिंह की जीत

Fri, 11 Mar 2022 01:59 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 01:59 AM IST
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Manvendra Singh's victory was made easy by simple image and Jitin's emphasis
जीतने के बाद खुशी मनाते ददरौल विधान सभा के भाजपा प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह अपने समर्थकों के साथ । - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। ददरौल विधानसभा सीट पर मानवेंद्र सिंह ने लगातार दूसरी बार भाजपा का परचम लहराया है। पहले उनके टिकट को लेकर ऊहापोह रही मगर, एक बार जब मानवेंद्र सिंह ने रफ्तार भरी तो विरोधी चारों खाने चित हो गए। पिता राममूर्ति सिंह वर्मा को पिछले चुनाव में हराने वाले मानवेंद्र ने इस बार उनके बेटे राजेश वर्मा को तगड़ी शिकस्त दी। ददरौल सीट पर कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद ने भी अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाई थी।
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मानवेंद्र सिंह प्रसाद परिवार के काफी करीबी माने जाते रहे हैं। वह लंबे समय तक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। बाद में उन्होंने 2017 से पहले बसपा का दामन थाम लिया था। चुनाव से पहले उनका टिकट कट गया। इसके बाद मानवेंद्र सिंह ने भाजपा ज्वाइन कर ली। भाजपा ने ददरौल से उन्हें टिकट दे दिया। मानवेंद्र सिंह 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के दिग्गज नेता राममूर्ति सिंह वर्मा को 17,398 वोटों से हराकर जीते थे। माना जा रहा था कि सत्ता विरोधी लहर के बलबूते राजेश वर्मा बड़ी जीत हासिल करेंगे। मगर, जब परिणाम आए तो मानवेंद्र सिंह एक बार फिर विजेता बनकर उभरे।
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मानवेंद्र सिंह की साफ छवि और सरल स्वभाव के कारण आम जनता में उनके विरुद्ध आक्रोश नहीं था। पार्टी की नीतियों को आधार बनाकर मानवेंद्र सिंह जनता के बीच गए। इसका सुपरिणाम उन्हें जीत के रूप में मिला। वहीं, कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद ने इस चुनाव में मानवेंद्र सिंह के चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था। इसका बड़ा लाभ मानवेंद्र सिंह को मिला।
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राजेश को नहीं मिला सहानुभूति का लाभ
राममूर्ति सिंह वर्मा सपा के दिग्गज नेता थे। वह कई बार विधायक रहने के साथ ही एक बार सांसद भी बने थे। उनके निधन के बाद बेटे राजेश वर्मा ने कमान संभाली और सपा ने उन्हें टिकट दे दिया। राजेश वर्मा को पिता राममूर्ति वर्मा की मृत्यु के बाद सहानुभूति मिलने की उम्मीद थी। किसान बिरादरी, यादव और मुस्लिम मतदाताओं का साथ मिलने से जीत की उम्मीद थी। मगर, जब परिणाम आए तो राजेश वर्मा को शिकस्त स्वीकारनी पड़ी।

बसपा से दो बार विधायक रहे अवधेश वर्मा भी ददरौल विधानसभा से सपा से टिकट मांग रहे थे। टिकट राजेश वर्मा को मिलने से नाराज अवधेश वर्मा भाजपा के पाले में चले गए। किसान बिरादरी पर पकड़ रखने वाले अवधेश वर्मा ने जोरशोर से मानवेंद्र सिंह का प्रचार किया, जिसका खामियाजा राजेश वर्मा को उठाना पड़ा।
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