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मां तुझे प्रणाम : 152 वर्ष पहले चली थी पैसेंजर ट्रेन...अब दौड़ रहीं 100 गाड़ियां

Thu, 14 Aug 2025 12:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:26 AM IST
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Maa Tujhe Pranam: Passenger train started 152 years ago...now 100 trains are running
शाहजहांपुर का रेलवे स्टेशन। संवाद - फोटो : पुलिस लाइन का निरीक्षण करते एडीजी।
शाहजहांपुर। शाहजहांपुर रेलवे का जंग-ए-आजादी में काफी अहम योगदान रहा है। 152 साल पहले चली पैसेंजर ट्रेन में काकोरी कांड के अमर नायकों ने अंग्रेजों का खजाना लूटकर स्वतंत्रता आंदोलन को धार दी थी। स्टीम इंजन से शुरू सफर कई प्रमुख लग्जरी ट्रेनों तक पहुंचा है। विकास का सिलसिला अभी जारी है।
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लखनऊ-सहारनपुर मुख्य रेल लाइन अवध रुहेलखंड कंपनी ने बिछाई थी। कंपनी का गठन वर्ष 1862 में हुआ था। रेल लाइन एक मार्च 1873 को आवागमन के लिए खुल गई थी। गर्रा, खन्नौत, बहगुल पर लोहे के विशाल पुल बनाए गए थे। लाइन पर चलने वाली पहली गाड़ी लखनऊ-सहारनपुर पैसेंजर थी।
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नौ अगस्त 1925 को अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने के लिए सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन से अंग्रेजों का खजाना लूट लिया था। यह ट्रेन वर्तमान में रेलवे ने बंद कर दी है, लेकिन वर्ष 1905 में बने रेलवे स्टेशन से वर्तमान में 44 जोड़ी सवारी गाड़ी, छह जोड़ी पैसेंजर ट्रेन और करीब 50 जोड़ी मालगाड़ियाें का संचालन होता है। वंदे भारत, अमृत भारत समेत कई लग्जरी गाड़ियां यहां से गुजरती हैं, लेकिन अभी इनका ठहराव स्टेशन पर नहीं है। लोग इसकी मांग उठा रहे हैं।
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केरूगंज से निकलती थी ट्रेन
इतिहासकार डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि शाहजहांपुर के आगे रोजा तक अवध रुहेलखंड लाइन थी, जबकि ईस्टर्न रेल ने वर्ष 1914 में रोजा लाइन बनाकर खोल दी थी। यह छोटी लाइन थी और केरूगंज-बीसलपुर 18 मार्च 1916 को खोली गई थी। अब पूरी गोला स्टेट रेल समेत इस शाखा का अमान परिवर्तन कर बड़ी लाइन कर दिया गया है। इस लाइन पर ट्रेनों की संख्या अभी कम है। इसे बढ़ाने की मांग की जा रही हैं।


लाइन शुरू कराने की उठ रही मांग
शाहजहांपुर की एक अन्य महत्वपूर्ण लाइन पुवायां स्टीम ट्राम थी, जो वर्ष 1890 में खोली गई थी। वर्ष 1904 में इसे मैलानी तक विस्तारित किया गया था। इस लाइन के लिए केरू कंपनी ने रुपया दिया था। इसका उद्देश्य उत्तर के जंगलों से लकड़ी की ढुलाई करना था। शहर के सात व्यापारियों से भी चार लाख रुपया लिया गया था। दो सवारी डिब्बे भी इसमें लगाए गए थे। 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध के समय इसे उखाड़कर मेसोपोटामिया ले जाया गया था। वह लाइन बंद हो गई। वर्ष 1922 में इसे एक बार फिर से बिछाने के प्रयास हुए। इसे खुलवाने की मांग चल रही है। सांसद अरुण सागर व राज्यसभा सांसद मिथिलेश कुमार ने मांग को कई बार संसद में उठाया है।

शाहजहांपुर का रेलवे स्टेशन। संवाद

शाहजहांपुर का रेलवे स्टेशन। संवाद- फोटो : पुलिस लाइन का निरीक्षण करते एडीजी।

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