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भीड़ में भी बिना मास्क चलने वालों की पहचान कर लेगा लवकुश का बनाया सॉफ्टवेयर
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शाहजहांपुर। कहते हैं कुछ करने की चाहत तो बाधा कितनी आए, सफलता जरूर मिलती है। यह बात शहर के निवासी और इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी में बीटेक के छात्र लवकुश त्रिपाठी ने सच कर दिखाया है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो कोरोना संक्रमण से लड़ने में प्रशासन के लिए मददगार साबित हो सकता है। यह सॉफ्टवेयर भीड़ में बिना मास्क के चलने वालों की पहचान कर उसका पूरा डाटा मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन पर बता देगा। इस सॉफ्टवेयर का नाम उन्होंने फेस डिटेक्शन रखा है।
लवकुश ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से वह प्रशासन की मदद करना चाहते हैं। सॉफ्टवेयर किस तरीके से काम करेगा, इसके बारे में लवकुश ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर पाइथन भाषा पर आधारित है। वह अपनी विशेष तकनीकी से किसी भी सिस्टम (मोबाइल या लैपटॉप) पर चलाया जा सकता है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह जानकारी हो सकेगी कि भीड़भाड़ वाले इलाके में किस व्यक्ति ने मुंह पर मास्क लगाया है अथवा नहीं। बिना मास्क घूमने वाले व्यक्ति को चिह्नित करने के साथ वह यह जानकारी भी बता देगा कि संबंधित व्यक्ति के शरीर का तापमान कितना है और वह मास्क को अपने चेहरे पर किस तरह से लगाया है। यानी की अगर कोई व्यक्ति मास्क को नाक के नीचे लगाता है, तो यह साफ्टवेयर इसकी भी जानकारी दे देगा। इस सॉफ्टवेयर को बहुत ही आसानी से चलाया सकता है। इसके लिए सबसे पहले सॉफ्टवेयर को मोबाइल या कंप्यूटर सिस्टम से जोड़ना पड़ेगा। इसके बाद सीसीटीवी से जुड़ने के साथ साफ्टवेयर काम करना शुरू कर देेगा। जितने भी व्यक्ति सीसीटीवी कैमरे की जद में आएंगे, सिस्टम उसका डाटा बता देगा।
पिता इंजीनियर और माता गृहणी
-लवकुश ने बताया कि उनके पिता वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी भी इंजीनियर है। उनकी बहन प्रगति त्रिपाठी एमबीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। वह इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी बरेली से शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, जबकि माता कविता त्रिपाठी ग्रहणी हैं।
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रेस्टोरेंट के लिए तैयार कर चुके हैं मोबाइल एप
- साफ्टवेयर इंजीनियर लवकुश ने इससे पहले एक मोबाइल एप भी तैयार किया है, जोकि नोएडा, बरेली और शाहजहांपुर के रेस्टोरेंट में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस एप की खासियत यह है कि बिना मेनू कार्ड को छुए कोई भी व्यक्ति अपना आर्डर एप के माध्यम से दे सकता है। यह एक 28 मई को लांच हो चुका है।
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लवकुश ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से वह प्रशासन की मदद करना चाहते हैं। सॉफ्टवेयर किस तरीके से काम करेगा, इसके बारे में लवकुश ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर पाइथन भाषा पर आधारित है। वह अपनी विशेष तकनीकी से किसी भी सिस्टम (मोबाइल या लैपटॉप) पर चलाया जा सकता है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह जानकारी हो सकेगी कि भीड़भाड़ वाले इलाके में किस व्यक्ति ने मुंह पर मास्क लगाया है अथवा नहीं। बिना मास्क घूमने वाले व्यक्ति को चिह्नित करने के साथ वह यह जानकारी भी बता देगा कि संबंधित व्यक्ति के शरीर का तापमान कितना है और वह मास्क को अपने चेहरे पर किस तरह से लगाया है। यानी की अगर कोई व्यक्ति मास्क को नाक के नीचे लगाता है, तो यह साफ्टवेयर इसकी भी जानकारी दे देगा। इस सॉफ्टवेयर को बहुत ही आसानी से चलाया सकता है। इसके लिए सबसे पहले सॉफ्टवेयर को मोबाइल या कंप्यूटर सिस्टम से जोड़ना पड़ेगा। इसके बाद सीसीटीवी से जुड़ने के साथ साफ्टवेयर काम करना शुरू कर देेगा। जितने भी व्यक्ति सीसीटीवी कैमरे की जद में आएंगे, सिस्टम उसका डाटा बता देगा।
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पिता इंजीनियर और माता गृहणी
-लवकुश ने बताया कि उनके पिता वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी भी इंजीनियर है। उनकी बहन प्रगति त्रिपाठी एमबीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। वह इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी बरेली से शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, जबकि माता कविता त्रिपाठी ग्रहणी हैं।
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रेस्टोरेंट के लिए तैयार कर चुके हैं मोबाइल एप
- साफ्टवेयर इंजीनियर लवकुश ने इससे पहले एक मोबाइल एप भी तैयार किया है, जोकि नोएडा, बरेली और शाहजहांपुर के रेस्टोरेंट में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस एप की खासियत यह है कि बिना मेनू कार्ड को छुए कोई भी व्यक्ति अपना आर्डर एप के माध्यम से दे सकता है। यह एक 28 मई को लांच हो चुका है।