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प्रभु राम के दर्शन कर अभिभूत हुए हनुमान
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 18 Oct 2015 11:10 PM IST
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ओसीएफ और नगर रामलीला में रविवार को श्रीराम के विभिन्न चरित्रों का रोचक ढंग से मंचन किया गया। रामलीला देखने गए लोगों ने जमकर खरीददारी भी की। बच्चों ने झूलों और खेल-तमाशों का लुत्फ लिया।
नगर रामलीला में दर्शकों ने शबरी भक्ति के माध्यम से ईश्वर भक्ति के प्रकार जाने, वहीं श्रीराम का वीर हनुमान से मिलन होता है। हनुमान जी प्रभु राम के दर्शन कर धन्य हो जाते हैं और वह सुग्रीव से उनकी मित्रता कराते हैं। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को अपनी व्यथा सुनाते हैं। राम अपने मित्र सुग्रीव का साथ देने और उसके भाई बालि से उसकी पत्नी को छुड़ाने तथा किष्किंधा का राजपाट दिलाने का संकल्प लेते हैं। श्रीराम के समझाने पर सुग्रीव भाई बालि को ललकारता है और दोनों में भयंकर युद्ध होता है। इस बीच राम बालि का वध कर देते हैं। मंचन में सचिन शर्मा, संदीप राठौर, मनोज पटेल, अनिल शर्मा, मनोज, अतुल, दीपक, विनीत, राकेश, अमित, शिवानी, साधना, गुनगुन आदि शामिल रहे।
इधर, ओसीएफ रामलीला में दिखाया गया कि राम और लक्ष्मण पंचवटी में कुटी बनाकर रहने लगते हैं। इस बीच रावण की बहन सूर्पणखा भेष बदलकर वहां पहुंच जाती है और राम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। दोनों भाइयों के मना करने पर वह लक्ष्मण की ओर झपटती है, तो राम उसकी नाक काट डालते हैं। इस अपमान का बदला लेने के लिए रावण साधु के रूप में पंचवटी जाकर सीता का हरण कर लेता है। सीता की खोज करते हुए राम शबरी के आश्रम पहुंचते हैं और उसे मोक्ष प्रदान करते हैं। इसी कड़ी में वीर हनुमान से प्रभु राम की भेंट होती है, हनुमान सुग्रीव से राम को मिलाते हैं, सुग्रीव से मित्रता होने पर राम उसके भाई बालि का वध कर देते हैं और किष्किंधा का राजा सुग्रीव को घोषित कर राज्याभिषेक करते हैं। यहां के मंचन में रोहित, देवेंद्र, रेखा, सत्यनारायण जुगनू, सुभाष, राजेश दीक्षित, संजय सक्सेना, अंकित सक्सेना, पैट्रिक दास आदि शामिल रहे। संगीत, रूप सज्जा, वेशभूषा आदि व्यवस्था में जीवन लाल, सरिता, विनोद पांडेय, राम अनुराग मिश्र, शिवराज, सेवाराम, महेश वर्मा, महेश, एसएल सिंह, आशीष सक्सेना, अनूप सक्सेना, बाल किशन, राजवीर, लक्ष्मण प्रसाद, बलवंत छाबड़ा, अरुण कुमार, गोविंद राम आदि का योगदान रहा।
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रामलीला में आज
- नगर रामलीला में सीता की खोज, लंका दहन, विभीषण शरणागति, सेतुबंध स्थापना आदि लीलाओं का मंचन।
- ओसीएफ में हनुमान का लंका में प्रवेश, अशोक वाटिका विध्वंस, मेघनाद द्वारा हनुमान को ब्रह्मफांस में बांधना, लंका दहन आदि लीलाओं का मंचन।
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नगर रामलीला में दर्शकों ने शबरी भक्ति के माध्यम से ईश्वर भक्ति के प्रकार जाने, वहीं श्रीराम का वीर हनुमान से मिलन होता है। हनुमान जी प्रभु राम के दर्शन कर धन्य हो जाते हैं और वह सुग्रीव से उनकी मित्रता कराते हैं। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को अपनी व्यथा सुनाते हैं। राम अपने मित्र सुग्रीव का साथ देने और उसके भाई बालि से उसकी पत्नी को छुड़ाने तथा किष्किंधा का राजपाट दिलाने का संकल्प लेते हैं। श्रीराम के समझाने पर सुग्रीव भाई बालि को ललकारता है और दोनों में भयंकर युद्ध होता है। इस बीच राम बालि का वध कर देते हैं। मंचन में सचिन शर्मा, संदीप राठौर, मनोज पटेल, अनिल शर्मा, मनोज, अतुल, दीपक, विनीत, राकेश, अमित, शिवानी, साधना, गुनगुन आदि शामिल रहे।
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इधर, ओसीएफ रामलीला में दिखाया गया कि राम और लक्ष्मण पंचवटी में कुटी बनाकर रहने लगते हैं। इस बीच रावण की बहन सूर्पणखा भेष बदलकर वहां पहुंच जाती है और राम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। दोनों भाइयों के मना करने पर वह लक्ष्मण की ओर झपटती है, तो राम उसकी नाक काट डालते हैं। इस अपमान का बदला लेने के लिए रावण साधु के रूप में पंचवटी जाकर सीता का हरण कर लेता है। सीता की खोज करते हुए राम शबरी के आश्रम पहुंचते हैं और उसे मोक्ष प्रदान करते हैं। इसी कड़ी में वीर हनुमान से प्रभु राम की भेंट होती है, हनुमान सुग्रीव से राम को मिलाते हैं, सुग्रीव से मित्रता होने पर राम उसके भाई बालि का वध कर देते हैं और किष्किंधा का राजा सुग्रीव को घोषित कर राज्याभिषेक करते हैं। यहां के मंचन में रोहित, देवेंद्र, रेखा, सत्यनारायण जुगनू, सुभाष, राजेश दीक्षित, संजय सक्सेना, अंकित सक्सेना, पैट्रिक दास आदि शामिल रहे। संगीत, रूप सज्जा, वेशभूषा आदि व्यवस्था में जीवन लाल, सरिता, विनोद पांडेय, राम अनुराग मिश्र, शिवराज, सेवाराम, महेश वर्मा, महेश, एसएल सिंह, आशीष सक्सेना, अनूप सक्सेना, बाल किशन, राजवीर, लक्ष्मण प्रसाद, बलवंत छाबड़ा, अरुण कुमार, गोविंद राम आदि का योगदान रहा।
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रामलीला में आज
- नगर रामलीला में सीता की खोज, लंका दहन, विभीषण शरणागति, सेतुबंध स्थापना आदि लीलाओं का मंचन।
- ओसीएफ में हनुमान का लंका में प्रवेश, अशोक वाटिका विध्वंस, मेघनाद द्वारा हनुमान को ब्रह्मफांस में बांधना, लंका दहन आदि लीलाओं का मंचन।