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काम छोड़कर घर लौटे सर्वहारा वर्ग से लॉकडाउन ने छीना जीने का सहारा

Fri, 01 May 2020 12:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2020 12:56 AM IST
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Lockdown snatched from the proletariat and returned home
शाहजहांपुर। चिलचिलाती गर्मी हो, कड़ाके की सर्दी या फिर झमाझम बरसात हो। मौसम के थपेड़ों की परवाह किए मजदूरों के भाग्य में दो जून की रोटी कमाने के लिए हाड़तोड़ मेहनत करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होता। इनके लिए कमाई का रास्ता सिर्फ दिहाड़ी तलाशने तक सीमित होता है, लेकिन कोरोना संकट के दौर में उनकी दिहाड़ी भी छिन गई है। न सिर्फ स्थानीय मजदूरों से रोजगार के अवसर छिने, बाहर से आए मजदूरपेशा लोग भी खाली बैठे हैं। लॉकडाउन लागू होने पर देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हजारों कामगार अपने घरों पर लौटे, लेकिन उनमें केवल एक तिहाई कामगार मनरेगा से जुड़ सके और शेष अच्छे दिन आने का इंतजार कर रहे हैं।
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भवन निर्माण और खेत मजदूरी से जिले में करीब तीन लाख श्रमिक जुड़े हैं। इनमेें 1.75 लाख से अधिक खेत मजदूर मनरेगा योजना के तहत जॉब कार्ड धारक हैं। इसी तरह भवन निर्माण से जुड़े करीब एक लाख राजगीर एवं अकुशल दिहाड़ी मजदूरों में बमुश्किल 40 हजार श्रमिकों ने श्रम विभाग के माध्यम से कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण कराया है। श्रम विभाग केवल इन्हीं श्रमिकों को लेकर फिक्रमंद है। लॉकडाउन होने पर यूपी समेत अन्य राज्यों से करीब 12 हजार कामगार और मजदूर पेशा लोग भी गृह जनपद लौट आए। इन्हेें रोजगार से जोड़ने के लिए मनरेगा के काम शुरू कराए गए। ऐसे करीब चार हजार लोगों के लिए मनरेगा वरदान साबित हुई, लेकिन बाहर रहकर फैक्ट्र्यिों में कटिंग-टेलरिंग, कारपेंटरी, फिटर, मशीनिस्ट, कंबाइन चालक आदि तकनीकी काम करने वाले ऐसे अधिकांश कामगार खाली बैठे हैं। जो उद्योग चालू हुए, उनमें सामाजिक दूरी के पालन की अनिवार्यता लागू होने से कई कामगारों को घर बैठना पड़ रहा है। इससे घर-गृहस्थी के खर्च चलाना कठिन हो रहा है। हालांकि, ऐसे कुशल कामगारों ने रोजगार के लिए विवशता में मनरेगा से जुड़कर फावड़े-कुदाल थामना शुरू कर दिया है।
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कामगारों की बात: उन्हीं की जुबानी
बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान पर पल्लेदारी करते थे, लेकिन लॉकडाउन में दुकानें बंद हैं। हमारा परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है।
- जहानू, ग्राम कुतुलूपुर, मिर्जापुर।
भवन निर्माण में राजमिस्त्री के साथ मजदूरी का काम करते थे। इन दिनों घरेलू निर्माण कार्य बंद होने से घर पर खाली बैठे हैं।
- राम खिलावन, मिर्जापुर।
बाजार में दुकानों पर मजदूरी करते थे। अब काम बंद होने से घर में खाली रहते हैं और इससे परिवार में कलह हो रही है।
- बाबूराम, मिर्जापुर
कपड़े की दुकान पर काम करते थे। सरकार से राशन मुफ्त मिला है, लेकिन साग-सब्जी, तेल, मसाला के लिए परेशानी हो रही है।
- धर्मवीर, मिर्जापुर
बच्चों सहित नोएडा में रहकर राजगीर का काम करता था। दो बेटे भी मजदूरी कर लेते थे, लेकिन अब जैसे-तैसे दिन काट रहे हैं।
नन्हकू, गांव सिकंदरपुर, जलालाबाद
गुडग़ांव से परिवार सहित पैदल चलकर अपने घर गांव पहुंचा था। गेहूं कटाई के समय मजदूरी मिल गई, लेकिन अब कहीं काम नहीं मिल रहा।
वीर सिंह, गांव ककरहा, जलालाबाद
दिल्ली की पेंट फैक्टरी में काम करता था। फैक्टरी बंद होने पर गांव लौटने के बाद मजदूरी का भी काम नहीं मिल रहा।
कुलदीप, सिकंदरपुर, जलालाबाद
हरियाणा में छह लोगों के परिवार के साथ रहकर वहां कपड़ा बनाने वाली कंपनी में काम कर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन ने कहीं का नहीं छोड़ा। - श्याम पाल सिंह, गांव पिटारमऊ, जलालाबाद
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रुद्रपुर मेें दिहाड़ी पर मजदूरी का काम करते थे। काम बंद होने पर 20 दिन पहले गांव आए और तब से खाली बैठे हैं।
-सत्यपाल, गढिय़ा रंगीन
दिल्ली में लकड़ी के एक कारखाने में काम करते थे। परिवार की गाड़ी मजे से चल रही थी, लेकिन अब एक माह से खाली बैठे हैं।
- सुधीर कुमार, गांव मरुआ झाला, जैतीपुर
नोएडा में कपड़े की कटिंग का काम करते थे। लॉकडाउन में फैक्ट्री बंद होने पर घर लौटना पड़ा, लेकिन यहां कोई काम नहीं है।
-मोनू, गांव मरुआ झाला, जैतीपुर
गाजियाबाद के एक कारखाना में लकड़ी का काम करते थे। महामारी में घर लौटना पड़ा, लेकिन तब से यहां कोई काम नहीं मिल रहा।
-सुनील कुमार, गांव मरुआ झाला, जैतीपुर
इस समय 28,891 श्रमिक मनरेगा के काम कर रहे हैं। इनमेें बाहर से लौटे चार हजार ऐसे लोग भी हैं जो इससे पहले अन्य कार्यों से जुड़े रहे और अब पैसे की जरूरत पूरी करने को मजदूरी कर रहे हैं। कुशल श्रमिकों के लिए कोई बाध्यता नहीं है। वह काम करना चाहें तो अपने ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक, पंचायत सचिव अथवा बीडीओ से संपर्क कर मनरेगा से जुड़ सकते हैं। जॉब कार्ड नहीं होने पर भी ऐसे जरूरतमंदों को काम दिया जाएगा। इन दिनों सबसे ज्यादा 3077 श्रमिक सिंधौली ब्लॉक मेें काम कर रहे हैं।
-मो. हसीब अंसारी, उपायुक्त (मनरेगा)
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