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सरकार के फैसले का वकीलों ने किया स्वागत, असमंजस बरकरार
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शाहजहांपुर। लॉक डाउन की वजह से कोर्ट-कचहरी भी बंद हैं, जिसकी वजह से अधिवक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। 70 फीसदी वकीलों की रोजी-रोटी का साधन वकालत ही है जो कि नियमित रूप से काम करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। इनमें वकीलों के साथ ही उनके मुंशी भी शामिल हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार ने तीन वर्ष का रजिस्ट्रेशन समय पूरा कर चुके अधिवक्ताओं को राहत देने के लिए 5000 रुपये आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया। साथ ही अधिवक्ता के आश्रितों को पांच लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। सरकार के इस निर्णय का अधिवक्ताओं ने स्वागत किया है लेकिन अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री अमित वर्मा का कहना है कि सरकार ने पूर्व में 10 साल तक प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को आर्थिक सहयोग देने की बात कही थी लेकिन अब तीन साल का रजिस्ट्रेशन पूरा होने वाले वकीलों को 5000 रुपये देने का निर्णय लिया है। इससे अधिवक्ताओं की संख्या बढ़ जाएगी और सरकार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा की हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने आर्थिक मदद देने की घोषणा की है, लेकिन अभी तक कोई भी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। लॉक डॉउन की वजह से अधिवक्ताओं को होने वाले नुकसान पर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की स्थिति एक जैसी नहीं होती। लगभग 70 प्रतिशत अधिवक्ता ऐसे हैं जो रोजाना काम करके ही अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
वकीलों की आय का निर्धारण मुश्किल
बार एसोसिएशन के महामंत्री अमित सिंह का कहना है कि किसी भी अधिवक्ता की आय का निर्धारण करना मुश्किल है। कुछ अधिवक्ता प्रतिदिन हजारों रुपये कमाते हैं तो कुछ की आय सैकड़ों में ही सीमित रह जाती है। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि लॉकडाउन की वजह से अधिवक्ताओं को कितना नुकसान हुआ।
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3000 वकीलों को मिलेगा लाभ
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जसविंदर सिंह बजाज ने बताया कि जिले में करीब 4000 अधिवक्ता पंजीकृत हैं। तीन हजार वकीलों को सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद का लाभ मिल सकता है, जिनका रजिस्ट्रेशन 3 साल पुराना हो गया है। फिलहाल बार एसोसिएशन की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर वकीलों की मदद के लिए राशन उपलब्ध कराया का रहा है। अब तक 200 से ज्यादा लोगों को मदद दी जा चुकी है।
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सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री अमित वर्मा का कहना है कि सरकार ने पूर्व में 10 साल तक प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को आर्थिक सहयोग देने की बात कही थी लेकिन अब तीन साल का रजिस्ट्रेशन पूरा होने वाले वकीलों को 5000 रुपये देने का निर्णय लिया है। इससे अधिवक्ताओं की संख्या बढ़ जाएगी और सरकार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा की हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने आर्थिक मदद देने की घोषणा की है, लेकिन अभी तक कोई भी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। लॉक डॉउन की वजह से अधिवक्ताओं को होने वाले नुकसान पर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की स्थिति एक जैसी नहीं होती। लगभग 70 प्रतिशत अधिवक्ता ऐसे हैं जो रोजाना काम करके ही अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
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वकीलों की आय का निर्धारण मुश्किल
बार एसोसिएशन के महामंत्री अमित सिंह का कहना है कि किसी भी अधिवक्ता की आय का निर्धारण करना मुश्किल है। कुछ अधिवक्ता प्रतिदिन हजारों रुपये कमाते हैं तो कुछ की आय सैकड़ों में ही सीमित रह जाती है। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि लॉकडाउन की वजह से अधिवक्ताओं को कितना नुकसान हुआ।
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3000 वकीलों को मिलेगा लाभ
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जसविंदर सिंह बजाज ने बताया कि जिले में करीब 4000 अधिवक्ता पंजीकृत हैं। तीन हजार वकीलों को सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद का लाभ मिल सकता है, जिनका रजिस्ट्रेशन 3 साल पुराना हो गया है। फिलहाल बार एसोसिएशन की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर वकीलों की मदद के लिए राशन उपलब्ध कराया का रहा है। अब तक 200 से ज्यादा लोगों को मदद दी जा चुकी है।