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कठिना नदी के किनारे गन्ने के खेत में दिखा बाघ
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Tue, 07 Jun 2016 11:48 PM IST
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कठिना नदी के किनारे गन्ने के खेत में दिखा बाघ
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खुटार क्षेत्र में कई दिन से देखा जा रहा बाघ मंगलवार को कठिना नदी के किनारे झाड़ियों में देखा जाने के बाद मौके पर कई गांवों के लोगों की भारी भीड़ लग गई। सूचना के बाद पूरे दिन वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे। देर शाम वनकर्मी मौके पर पहुंचे और लोगों को सावधान रहने की बात कहते हुए वापस चले गए। गौरतलब है कि खुटार क्षेत्र में कई दिन से एक बाघ घूम रहा है। चार दिन पूर्व बाघ ने गांव बरवटपुर में गुरदेव सिंह के यहां कुत्ते को मार डाला था। अगले दिन बाघ ने गोला मार्ग पर कठिना नदी के किनारे गन्ने में नीलगाय को मार दिया। इससे लोगों में दहशत फैल गई। मंगलवार को बाघ कठिना नदी के किनारे लालगिरि बाबा स्थान के पास पहुंच गया। स्थान पर भंडारे का कार्यक्रम चल रहा था। बाघ देखकर लोगों ने शोर मचाया तो बाघ पास की झाड़ियों में चला गया। इसके बाद बाघ होने की चर्चा फैली तो गांव छेदीपुर, सुआबोझ, खुटार, रसवां कलां सहित तमाम गांवों से भारी भीड़ मौके पर पहुंच गई। लोगों ने पेड़ पर चढ़कर बाघ को झाड़ियों में देखा तो ढेले फेंकने शुरू कर दिए। भारी शोर शराबे और भीड़ के कारण बाघ झाड़ियों से नहीं निकला लेकिन दहाड़ मारता रहा। सूचना के बाद भी वनकर्मी और पुलिस कोई भी मौके नहीं पहुंचा। ऐसे में यदि बाघ झाड़ियों के बाहर निकलकर लोगों पर हमला कर देता तो बड़ी घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता था। कई दिन से बाघ होने का पता चलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो जाती है और शोर शराबा कर बाघ को खदेड़ने का प्रयास किया जाता है। इससे बाघ को भी खतरा पैदा हो गया है। खुटार रेंजर एसएन यादव के मोबाइल पर कॉल कर बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। खुटार वन चौकी के वन दरोगा एसके गौतम और वनरक्षक कामता प्रसाद ने बताया कि लोगों ने बाघ को देखा है। उन लोगों ने भी पदमार्क ट्रेस किए हैं। बाघ मौजूद होने के स्थान पर पटाखे चलाकर और गांव के लोगों की मदद से बाघ को जंगल में खदेड़े जाने का प्रयास किया जा रहा है।
आखिर कब तक मौन रहेंगे वन विभाग के अधिकारी?
इस समय खुटार में रात ही नहीं दिन में भी बाघ आया! बाघ आया! के नाम पर शोर मच जाता है। गांव के तमाम लोग एकत्र होने के बाद फायरिंग कर और शोर मचाकर बाघ को खेतों और नदी की ओर खदेड़ देते है। मामले की सूचना वन विभाग के कर्मचारियों को दी जाती है तो कुछ कर्मचारी मौके पर पहुंचकर लोगों को सावधान रहने की सलाह देकर वापस चले जाते हैं। गांव के लोगों की सुरक्षा तो दूर अभी तक वन विभाग के किसी भी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर गांव के लोगों से बात करने की जरुरत तक नहीं समझी है। गौरतलब है कि छह वर्ष पूर्व खुटार रेंज में एक बाघ आ गया था। वन विभाग की लचर कार्यशैली को लेकर बाघ ने पांच लोगों को मार दिया था। क्षेत्र के लोगों के हाइवे जाम करने के साथ ही आक्रोश को देखते हुए वन विभाग ने बाघ को रेंज से खदेड़ दिया था। जिसको बाद में फर्रुखाबाद के पास पकड़ा गया था। अब फिर से क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी को देखते हुए क्षेत्र के लोगों की पुरानी यादें ताजा हो गई है। इस बार बाघ अभी तक ऐसी किसी घटना को अंजाम नहीं दे पाया है। बाघ गावं बीवटपुर में कुत्ते को और कोचर फार्म के पास नीलगाय को मार चुका है। इन गांवों के लोगों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी किसी बड़ी घटना के इंतजार में रहकर चुप्पी साधे बैठे है। कई दिनों से बाघ की चहलकदमी से क्षेत्र के कई गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है।
दो तेंदुओं की हो चुकी है मौत
खुटार। खुटार रेंज में दो वर्ष में दो तेंदुओं की मौत हो चुकी है। एक तेंदुआ गांव छापाबोझी के पास जंगल में मृत मिला था। जबकि दूसरा तेंदुआ गांव नरौठा के पास गन्ने के खेत में मृत मिला था। इसके बाद भी वन विभाग के लोग इस समय क्षेत्र में घूम रहे बाघ के मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी से शिकारियों की बाघ पर भी निगाह हो सकती है। अगर वन विभाग के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में वन विभाग को बड़ी क्षति होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
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आखिर कब तक मौन रहेंगे वन विभाग के अधिकारी?
इस समय खुटार में रात ही नहीं दिन में भी बाघ आया! बाघ आया! के नाम पर शोर मच जाता है। गांव के तमाम लोग एकत्र होने के बाद फायरिंग कर और शोर मचाकर बाघ को खेतों और नदी की ओर खदेड़ देते है। मामले की सूचना वन विभाग के कर्मचारियों को दी जाती है तो कुछ कर्मचारी मौके पर पहुंचकर लोगों को सावधान रहने की सलाह देकर वापस चले जाते हैं। गांव के लोगों की सुरक्षा तो दूर अभी तक वन विभाग के किसी भी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर गांव के लोगों से बात करने की जरुरत तक नहीं समझी है। गौरतलब है कि छह वर्ष पूर्व खुटार रेंज में एक बाघ आ गया था। वन विभाग की लचर कार्यशैली को लेकर बाघ ने पांच लोगों को मार दिया था। क्षेत्र के लोगों के हाइवे जाम करने के साथ ही आक्रोश को देखते हुए वन विभाग ने बाघ को रेंज से खदेड़ दिया था। जिसको बाद में फर्रुखाबाद के पास पकड़ा गया था। अब फिर से क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी को देखते हुए क्षेत्र के लोगों की पुरानी यादें ताजा हो गई है। इस बार बाघ अभी तक ऐसी किसी घटना को अंजाम नहीं दे पाया है। बाघ गावं बीवटपुर में कुत्ते को और कोचर फार्म के पास नीलगाय को मार चुका है। इन गांवों के लोगों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी किसी बड़ी घटना के इंतजार में रहकर चुप्पी साधे बैठे है। कई दिनों से बाघ की चहलकदमी से क्षेत्र के कई गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है।
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दो तेंदुओं की हो चुकी है मौत
खुटार। खुटार रेंज में दो वर्ष में दो तेंदुओं की मौत हो चुकी है। एक तेंदुआ गांव छापाबोझी के पास जंगल में मृत मिला था। जबकि दूसरा तेंदुआ गांव नरौठा के पास गन्ने के खेत में मृत मिला था। इसके बाद भी वन विभाग के लोग इस समय क्षेत्र में घूम रहे बाघ के मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी से शिकारियों की बाघ पर भी निगाह हो सकती है। अगर वन विभाग के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में वन विभाग को बड़ी क्षति होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
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