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करनापुर चीनी मिल के कर्मचारी हड़ताल पर
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Apr 2017 12:37 AM IST
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हड़ताल
- फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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किसान सहकारी चीनी मिल करनापुर के लगभग छह सौ ठेका कर्मचारी बृहस्पतिवार से कांम बंद करके मिल गेट पर धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें तीन महीने से पगार नहीं दी गई है, इससे उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
भारी घाटे के चलते किसान सहकारी चीनी मिल को बसपा शासनकाल में बंद कर दिया गया था और मिल के तमाम कर्मचारियों की बीआरएस दे दिया गया। वर्ष 2012 में मिल को फिर से चालू किया गया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव ने पुवायां आकर मिल का शुभारंभ किया था। मिल शुरू करने पर कर्मचारियों की भर्ती न कर आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारी रखे गए थे। वर्तमान में मिल में दिल्ली की आईसीसीपीएल कंपनी के माध्यम से 296 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसके अलावा चार स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से लगभग तीन सौ कर्मचारी मिल में कार्यरत हैं।
ठेकेदार और आउटसोर्सिंग कंपनी के सभी कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को काम बंद कर दिया और मिल गेट पर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने मिल प्रंबधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। आईसीसीपीएल कंपनी के माध्यम से लगे कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान पेराई सत्र में मिल को 15 नवंबर से चालू किया गया था। उन्हें नवंबर और दिसंबर में तो पगार दी गई लेकिन जनवरी से भुगतान नहीं किया गया। होली पर भी उन लोगों को वेतन नहीं दिया गया, लेकिन वह चुप रहे। तीन महीने से मानदेय नहीं मिलने से उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। ठेकेदार के स्तर से लगे कर्मचारियों को भी दो माह से कोई भुगतान नहीं किया गया है। ठेकेदार सतीश वर्मा, अमरीश वर्मा, सूफी शाह, नूरहसन ने बताया कि मिल से भुगतान नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को रुपये नहीं दे पाए हैं। किसान सहकारी चीनी मिल 12 अप्रैल को नो केन हो गई थी। कर्मचारियों की हड़ताल से मिल में तमाम कार्य ठप पड़ गए हैं। आईसीसीपीएल कंपनी के कर्मचारी अपना बकाया 70 लाख रुपये और चारों ठेकेदारों के कर्मचारी अपना बकाया 25 लाख रुपये बता रहे हैं।
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आमने-सामने
मैंने आईसीसीपीएल कंपनी के खाते में भुगतान करा दिया है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों को भुगतान क्यों नहीं किया है, इसका जवाब कंपनी के लोग ही दे सकते हैं। मिल के स्तर से कोई कमी नहीं है।
- डीके सक्सेना, प्रधान प्रबंधक किसान सहकारी चीनी मिल करनापुर पुवायां
चीनी मिल में भुगतान फंसा है। लखनऊ स्तर से भी भुगतान अभी तक नहीं मिला है। जैसे ही भुगतान मिलेगा, कर्मचारियों को तुरंत वेतन दे दिया जाएगा। कर्मचारियों का 40 लाख रुपया बकाया है।
- जेके सिंघल, महाप्रबंधक आईसीसीपीएल कंपनी दिल्ली
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भारी घाटे के चलते किसान सहकारी चीनी मिल को बसपा शासनकाल में बंद कर दिया गया था और मिल के तमाम कर्मचारियों की बीआरएस दे दिया गया। वर्ष 2012 में मिल को फिर से चालू किया गया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव ने पुवायां आकर मिल का शुभारंभ किया था। मिल शुरू करने पर कर्मचारियों की भर्ती न कर आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारी रखे गए थे। वर्तमान में मिल में दिल्ली की आईसीसीपीएल कंपनी के माध्यम से 296 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसके अलावा चार स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से लगभग तीन सौ कर्मचारी मिल में कार्यरत हैं।
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ठेकेदार और आउटसोर्सिंग कंपनी के सभी कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को काम बंद कर दिया और मिल गेट पर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने मिल प्रंबधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। आईसीसीपीएल कंपनी के माध्यम से लगे कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान पेराई सत्र में मिल को 15 नवंबर से चालू किया गया था। उन्हें नवंबर और दिसंबर में तो पगार दी गई लेकिन जनवरी से भुगतान नहीं किया गया। होली पर भी उन लोगों को वेतन नहीं दिया गया, लेकिन वह चुप रहे। तीन महीने से मानदेय नहीं मिलने से उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। ठेकेदार के स्तर से लगे कर्मचारियों को भी दो माह से कोई भुगतान नहीं किया गया है। ठेकेदार सतीश वर्मा, अमरीश वर्मा, सूफी शाह, नूरहसन ने बताया कि मिल से भुगतान नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को रुपये नहीं दे पाए हैं। किसान सहकारी चीनी मिल 12 अप्रैल को नो केन हो गई थी। कर्मचारियों की हड़ताल से मिल में तमाम कार्य ठप पड़ गए हैं। आईसीसीपीएल कंपनी के कर्मचारी अपना बकाया 70 लाख रुपये और चारों ठेकेदारों के कर्मचारी अपना बकाया 25 लाख रुपये बता रहे हैं।
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मैंने आईसीसीपीएल कंपनी के खाते में भुगतान करा दिया है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों को भुगतान क्यों नहीं किया है, इसका जवाब कंपनी के लोग ही दे सकते हैं। मिल के स्तर से कोई कमी नहीं है।
- डीके सक्सेना, प्रधान प्रबंधक किसान सहकारी चीनी मिल करनापुर पुवायां
चीनी मिल में भुगतान फंसा है। लखनऊ स्तर से भी भुगतान अभी तक नहीं मिला है। जैसे ही भुगतान मिलेगा, कर्मचारियों को तुरंत वेतन दे दिया जाएगा। कर्मचारियों का 40 लाख रुपया बकाया है।
- जेके सिंघल, महाप्रबंधक आईसीसीपीएल कंपनी दिल्ली