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किसानों ने गेहूं की फसल जोती, किया कृषि कानूनों का विरोध
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खुदागंज में कृषि कानून के विरोध में किसान ने अपनी फसल ट्रैक्टर से जोत दी। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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खुदागंज (शाहजहांपुर)। कृषि कानूनों के विरोध में भड़के फुलवा गांव के कई किसानों ने मंगलवार दोपहर अपनी गेहूं की फसल को जोतकर नष्ट कर दिया। खेतों में प्रदर्शन कर सरकार से नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसानों से अपनी फसल को बर्बाद न करने की अपील की।
खुदागंज थाना क्षेत्र के गांव फुलवा निवासी रविंद्र और महेंद्र ने गांव के अन्य किसानों के साथ खेत में खड़ी एक एकड़ से अधिक गेहूं की फसल को जोत कर नए कृषि कानूनों का विरोध जताया। किसानों ने कहा कि अधिक लागत लगाने के बावजूद सरकार द्वारा समर्थन मूल्य किसानों को नहीं मिल पाता। ये सब बिचौलिये हड़प जाते हैं। साथ ही डीजल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। इतने महंगे डीजल से सिंचाई करने पर हमारा बजट गड़बड़ा जाएगा। इस सरकार में फसल को पैदा कर अपना समय क्यों बर्बाद करें इसलिए हम लोगों ने गेहूं की फसल को जोत डाला। किसानों ने सरकार से मांग की है कि डीजल के दाम कम कर नए कृषि कानून को वापस लिया जाए अन्यथा हम सरकार को गेहूं का एक भी दाना नहीं देंगे। सिर्फ अपनी जरूरत के लिए ही घर में अनाज रखेंगे। विरोध करने वाले किसानों में प्रमोद, अंकित, सुनील, शिशुपाल सिंह, रामकुमार, सुखदेव, धर्मवीर, अंकित, देवेन्द्र, शिवम, आदर्श, राजेन्द्र, सोनू, पप्पू, मोनू आदि किसान शामिल रहे। संवाद
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खुदागंज थाना क्षेत्र के गांव फुलवा निवासी रविंद्र और महेंद्र ने गांव के अन्य किसानों के साथ खेत में खड़ी एक एकड़ से अधिक गेहूं की फसल को जोत कर नए कृषि कानूनों का विरोध जताया। किसानों ने कहा कि अधिक लागत लगाने के बावजूद सरकार द्वारा समर्थन मूल्य किसानों को नहीं मिल पाता। ये सब बिचौलिये हड़प जाते हैं। साथ ही डीजल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। इतने महंगे डीजल से सिंचाई करने पर हमारा बजट गड़बड़ा जाएगा। इस सरकार में फसल को पैदा कर अपना समय क्यों बर्बाद करें इसलिए हम लोगों ने गेहूं की फसल को जोत डाला। किसानों ने सरकार से मांग की है कि डीजल के दाम कम कर नए कृषि कानून को वापस लिया जाए अन्यथा हम सरकार को गेहूं का एक भी दाना नहीं देंगे। सिर्फ अपनी जरूरत के लिए ही घर में अनाज रखेंगे। विरोध करने वाले किसानों में प्रमोद, अंकित, सुनील, शिशुपाल सिंह, रामकुमार, सुखदेव, धर्मवीर, अंकित, देवेन्द्र, शिवम, आदर्श, राजेन्द्र, सोनू, पप्पू, मोनू आदि किसान शामिल रहे। संवाद
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