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उन्नतिशील प्रजातियां ही उत्कृष्ट खेती का आधार
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 13 Mar 2015 12:04 AM IST
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गन्ना शोध परिषद में मध्य प्रदेश से आए एक दल को जिले की विभिन्न गन्ना प्रजातियों के बारे में बताया गया। साथ ही गन्ना की बेहतर पैदावार के बारे में भी बताया गया।
गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने मध्य प्रदेश से आई टीम को ‘मुख्यमंत्री खेत दर्शन’ योजना के तहत तमाम जानकारियां दीं। बताया कि उन्नतशील प्रजातियां ही उत्कृष्ट खेती का आधार होती हैं। इसलिए स्वीकृत प्रजातियाें की बुवाई करना चाहिए। साथ ही प्रमाणिक पौधशालाओं से बीज लेना चाहिए। इसके लिए उन्होंने मृदा का हेल्थ कार्ड बनवाने के बारे में भी बताया। कहा कि इससे मृदा प्रदूषण कम होने के साथ ही उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। बताया कि किसान खेत की मिट्टी संस्थान लेकर आएं। इससे उनके खेत का हेल्थ कार्ड बन जाएगा।
डॉ. शर्मा ने कहा कि गेहूं और धान की कटाई के बाद किसान खेत में आग न लगाएं। इसके लिए 10-10 किलोग्राम ट्राईकोगामा फंगस और यूरिया का छिड़काव करें। इसके बाद खेत को तैयार करने से कार्बनिक पदार्थ बढ़ जाते हैं। इस दौरान प्रसार अधिकारी राजेंद्र मिश्र, डॉ. केपी पांडेय, डॉ. अनेग सिंह ने भ्रमण दल को तमाम जानकारियां दीं। भ्रमण के लिए आने वालों में इंद्रजीत दोहरे, रामदत्त शर्मा, शिवनाथ भदौरिया, नरेंद्र सिंह के साथ ही किसान भी मौजूद रहे।
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गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने मध्य प्रदेश से आई टीम को ‘मुख्यमंत्री खेत दर्शन’ योजना के तहत तमाम जानकारियां दीं। बताया कि उन्नतशील प्रजातियां ही उत्कृष्ट खेती का आधार होती हैं। इसलिए स्वीकृत प्रजातियाें की बुवाई करना चाहिए। साथ ही प्रमाणिक पौधशालाओं से बीज लेना चाहिए। इसके लिए उन्होंने मृदा का हेल्थ कार्ड बनवाने के बारे में भी बताया। कहा कि इससे मृदा प्रदूषण कम होने के साथ ही उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। बताया कि किसान खेत की मिट्टी संस्थान लेकर आएं। इससे उनके खेत का हेल्थ कार्ड बन जाएगा।
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डॉ. शर्मा ने कहा कि गेहूं और धान की कटाई के बाद किसान खेत में आग न लगाएं। इसके लिए 10-10 किलोग्राम ट्राईकोगामा फंगस और यूरिया का छिड़काव करें। इसके बाद खेत को तैयार करने से कार्बनिक पदार्थ बढ़ जाते हैं। इस दौरान प्रसार अधिकारी राजेंद्र मिश्र, डॉ. केपी पांडेय, डॉ. अनेग सिंह ने भ्रमण दल को तमाम जानकारियां दीं। भ्रमण के लिए आने वालों में इंद्रजीत दोहरे, रामदत्त शर्मा, शिवनाथ भदौरिया, नरेंद्र सिंह के साथ ही किसान भी मौजूद रहे।
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