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किसान आंदोलन में पुवायां के किसानों की रही है बड़ी भूमिका
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20 मार्च को पुवायां के गुटैया में किसान महापंचायत को संबोधित करते भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरे
- फोटो : POWAYAN
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पुवायां (शाहजहांपुर)। कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन में पुवायां तहसील के किसानों की बड़ी भूमिका निभाई है। आंदोलन में शामिल होने के लिए यहां के किसान लगातार गाजीपुर बॉर्डर जाते रहे। अनाज से लेकर चीनी, दूध आदि की व्यवस्था भी क्षेत्र से की जाती रहीं। कृषि कानून वापस की घोषणा पर किसान अपने संघर्ष को सफल मानते हुए बेहद खुश हैं।
शाहजहांपुर में पुवायां तहसील अन्न पैदावार में काफी आगे हैं। आधुनिक तरीके से खेती में भी पुवायां का नाम आगे रहा है। किसानों के संगठन टिकैत गुट, चढूनी गुट, भानु गुट, किसान मजदूर संगठन, राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन आदि के जिलाध्यक्ष पुवायां क्षेत्र के ही हैं। यही कारण रहा कि कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ तो पुवायां क्षेत्र में इसका काफी असर रहा।
भाकियू टिकैत गुट के पूर्व जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, वर्तमान जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह धालीवाल, तहसील अध्यक्ष अनिल सिंह यादव तमाम बार किसानों को लेकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे और आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया। आंदोलन की शुरुआत में भानु गुट और वीएम सिंह के संगठन के नेता भी खूब सक्रिय रहे, लेकिन 26 जनवरी को लालकिले पर हुए बवाल के बाद दोनों संगठन किसान आंदोलन से अलग हो गए थे। तब टिकैत गुट और चढ़ूूनी गुट के कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से क्षेत्र में आंदोलन करते रहे।
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नरेश टिकैत की हुई थी महा पंचायत
भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत 21 मार्च को पुवायां के गुटैया में आए थे। उन्होंने यहां महापंचायत की थी। कृषि कानूनों पर आंदोलन के बीच हुई महापंचायत में शाहजहांपुर, पीलीभीत और लखीमपुर के किसान भारी संख्या में जुटे थे। क्षेत्र से किसानों ने डिब्बाबंद दूध, चीनी, चावल, आटा, आलू आदि ट्रकों में भरवाकर बॉर्डर पर भिजवाकर आंदोलन में सहयोग किया था। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी भी बंडा के सुनासिर गुरुद्वारे में आए थे।
रामपुर, सुनासर, लौहंगापुर रहे केंद्र
किसान आंदोलन में खुटार का रामपुर कलां, लौहंगापुर और बंडा का सुनासर केंद्र रहे। आंदोलन को मजबूत करने के लिए रणनीति तय की और आर्थिक सहयोग भी किया। सपा मुखिया अखिलेश यादव का कार्यक्रम सुनासिर के नानकपुरी में लगा और निरस्त होने के कुछ ही दिन बाद फिर से कार्यक्रम तय हुआ और अखिलेश यादव भी यहां पहुंचे।
लखीमपुर हिंसा के बाद पुवायां में था आक्रोश
लखीमपुर में केंद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्रा के पुत्र की गाड़ी से किसानों की कुचलकर मौत हो जाने के बाद पुवायां के किसानों में आक्रोश दिखा था। खुटार के लौहंगापुर में किसानों ने जाम कर दिया था। बंडा के मकसूदापुर और पुवायां के राजीव चौक पर भी जाम किया था। राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी सहित तमाम किसान नेता खुटार से होकर लखीमपुर गए थे।
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शाहजहांपुर में पुवायां तहसील अन्न पैदावार में काफी आगे हैं। आधुनिक तरीके से खेती में भी पुवायां का नाम आगे रहा है। किसानों के संगठन टिकैत गुट, चढूनी गुट, भानु गुट, किसान मजदूर संगठन, राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन आदि के जिलाध्यक्ष पुवायां क्षेत्र के ही हैं। यही कारण रहा कि कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ तो पुवायां क्षेत्र में इसका काफी असर रहा।
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भाकियू टिकैत गुट के पूर्व जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, वर्तमान जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह धालीवाल, तहसील अध्यक्ष अनिल सिंह यादव तमाम बार किसानों को लेकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे और आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया। आंदोलन की शुरुआत में भानु गुट और वीएम सिंह के संगठन के नेता भी खूब सक्रिय रहे, लेकिन 26 जनवरी को लालकिले पर हुए बवाल के बाद दोनों संगठन किसान आंदोलन से अलग हो गए थे। तब टिकैत गुट और चढ़ूूनी गुट के कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से क्षेत्र में आंदोलन करते रहे।
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नरेश टिकैत की हुई थी महा पंचायत
भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत 21 मार्च को पुवायां के गुटैया में आए थे। उन्होंने यहां महापंचायत की थी। कृषि कानूनों पर आंदोलन के बीच हुई महापंचायत में शाहजहांपुर, पीलीभीत और लखीमपुर के किसान भारी संख्या में जुटे थे। क्षेत्र से किसानों ने डिब्बाबंद दूध, चीनी, चावल, आटा, आलू आदि ट्रकों में भरवाकर बॉर्डर पर भिजवाकर आंदोलन में सहयोग किया था। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी भी बंडा के सुनासिर गुरुद्वारे में आए थे।
रामपुर, सुनासर, लौहंगापुर रहे केंद्र
किसान आंदोलन में खुटार का रामपुर कलां, लौहंगापुर और बंडा का सुनासर केंद्र रहे। आंदोलन को मजबूत करने के लिए रणनीति तय की और आर्थिक सहयोग भी किया। सपा मुखिया अखिलेश यादव का कार्यक्रम सुनासिर के नानकपुरी में लगा और निरस्त होने के कुछ ही दिन बाद फिर से कार्यक्रम तय हुआ और अखिलेश यादव भी यहां पहुंचे।
लखीमपुर हिंसा के बाद पुवायां में था आक्रोश
लखीमपुर में केंद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्रा के पुत्र की गाड़ी से किसानों की कुचलकर मौत हो जाने के बाद पुवायां के किसानों में आक्रोश दिखा था। खुटार के लौहंगापुर में किसानों ने जाम कर दिया था। बंडा के मकसूदापुर और पुवायां के राजीव चौक पर भी जाम किया था। राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी सहित तमाम किसान नेता खुटार से होकर लखीमपुर गए थे।