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कन्या भोज के साथ वासंतिक नवरात्र का पारायण
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Fri, 15 Apr 2016 11:51 PM IST
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कन्या भोज के साथ वासंतिक नवरात्र का पारायण
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वासंतिक नवरात्र के अंतिम दिन मां भगवती के भक्तों ने देवी मां के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री का आवाहन कर उनकी स्तुति की और बाद में कन्या भोज कराकर नवरात्र व्रतों का पारायण किया।
चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन मंदिरों में कन्या भोज कराने को लेकर भक्त उमड़ पडे़। चूंकि घरों में भोज कराने के लिए कन्याओं की तलाश मुश्किल थी, इसलिए सबसे आसान काम लोगों ने तलाश लिया। बाजार से दही-जलेबी लेकर सुबह से ही मंदिरों की निकल पड़े। वहीं, घरों में उपवास पर चल रहे भक्तों ने अंतिम दिन देवी मंडपों में मां सिद्धिदात्री का पूजन किया और बाद में हवन पूजन कर कन्याओं को खीर-पूड़ी, पूड़ी-सब्जी, हलवा-पूड़ी और दही-जलेबी खिलाकर उन्हें दान-दक्षिणा दी। भक्तों ने कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।
मंदिरों में भी हवन पूजन कर कन्याओं को भोज कराया गया। भोज कराने के बाद ही श्रद्धालुओं ने व्रतों का पारायण किया। मां काली मंदिर में विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। इससे पूर्व रात्रि में माता की चौकी का भी आयोजन किया गया था। श्री दुर्गा मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, मां काली मंदिर में देर रात तक श्रद्धालुओं की मां भगवती के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ती रही।
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लाला तेली बजरिया स्थित बड़ा शिव मंदिर में महिलाओं ने मां भगवती के छंद और गीत गाकर खूब ऩृत्य किया। दोपहर बाद हवन के बाद हलवा-चना का प्रसाद वितरित किया गया। पुजारी सुरेश चंद्र मिश्रा की देखरेख में हुए अनुष्ठान में सुनील अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल, अजीत मिश्रा, सुमित मिश्रा, दिव्यांशु, छमा, प्रमिला अग्रवाल, कांती पांडेय, प्रेमवती, रूपा सक्सेना आदि का योगदान रहा।
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चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन मंदिरों में कन्या भोज कराने को लेकर भक्त उमड़ पडे़। चूंकि घरों में भोज कराने के लिए कन्याओं की तलाश मुश्किल थी, इसलिए सबसे आसान काम लोगों ने तलाश लिया। बाजार से दही-जलेबी लेकर सुबह से ही मंदिरों की निकल पड़े। वहीं, घरों में उपवास पर चल रहे भक्तों ने अंतिम दिन देवी मंडपों में मां सिद्धिदात्री का पूजन किया और बाद में हवन पूजन कर कन्याओं को खीर-पूड़ी, पूड़ी-सब्जी, हलवा-पूड़ी और दही-जलेबी खिलाकर उन्हें दान-दक्षिणा दी। भक्तों ने कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।
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मंदिरों में भी हवन पूजन कर कन्याओं को भोज कराया गया। भोज कराने के बाद ही श्रद्धालुओं ने व्रतों का पारायण किया। मां काली मंदिर में विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। इससे पूर्व रात्रि में माता की चौकी का भी आयोजन किया गया था। श्री दुर्गा मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, मां काली मंदिर में देर रात तक श्रद्धालुओं की मां भगवती के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ती रही।
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लाला तेली बजरिया स्थित बड़ा शिव मंदिर में महिलाओं ने मां भगवती के छंद और गीत गाकर खूब ऩृत्य किया। दोपहर बाद हवन के बाद हलवा-चना का प्रसाद वितरित किया गया। पुजारी सुरेश चंद्र मिश्रा की देखरेख में हुए अनुष्ठान में सुनील अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल, अजीत मिश्रा, सुमित मिश्रा, दिव्यांशु, छमा, प्रमिला अग्रवाल, कांती पांडेय, प्रेमवती, रूपा सक्सेना आदि का योगदान रहा।