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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेषः हिम्मत नहीं हारी, पति की मौत के बाद खेतों में चलाया हल...निभाई जिम्मेदारी
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रोजा के गांव छीतेपुर में अपनी परचून की दुकान में बैठकर काम करतीं पुष्पा देवी। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। हंसी-खुशी चलती जिंदगी में पति की बीमारी और फिर मौत से भूचाल आ गया। मगर पुष्पा विषम परिस्थितियों में बिखरी नहीं। मन में ठाना कि वह इतनी अबला नहीं कि किसी पर बोझ बन जाए। खेत के छोटे से टुकड़े में खुद हल चलाया, बच्चों को पढ़ाया और आज दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। नारी शक्ति के प्रतीक के तौर पर पुष्पा अब दूसरी महिलाओं को भी स्वावलंबन की सीख दे रही हैं।
मूलरूप से लखीमपुर के गांव लखनौरिया की रहने वाली पुष्पा देवी (40) की शादी 20 साल पहले रोजा क्षेत्र के छीतेपुर गांव के रहने वाले धनीराम से हुई थी। पति खेतीबाड़ी करते थे और पुष्पा घर संभालती थीं। पुष्पा को दो बेटे और दो बेटियां हुईं। सामान्य आर्थिक हालात में सबकुछ ठीक चल रहा था, अचानक पति धनीराम बीमार पड़ गए। कर्ज लेकर इलाज कराया मगर दिमाग की नस फटने से धनीराम की 29 सितंबर 2018 को मौत हो गई। ससुराल वालों पर बोझ बनने की बजाय पुष्पा ने खुद परिवार को संभालने की ठान ली। पुष्पा ने करीब छह बीघा खेतीबाड़ी को संभालना शुरू किया। शुरुआत में दिक्कत हुई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। फिर खेतीबाड़ी में गेहूं-गन्ने की परंपरागत फसलों से खास आमदनी न होने पर उन्होंने आलू, मटर, प्याज, लहसुन उगाना शुरू कर दिया। इससे नकदी प्राप्त होने लगी। आठवीं तक पढ़ी पुष्पा ने बच्चों को संभालने के साथ ही खेत में हल चलाया, मजदूरी की लेकिन किसी के आगे हाथ फैलाना स्वीकार नहीं किया। बच्चों की पढ़ाई में आर्थिक स्थिति का रोड़ा आया तो पुष्पा ने घर पर ही परचून की दुकान खोल ली।
दूसरी महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित
पुष्पा देवी विनोबा सेवा आश्रम से जुड़ी हैं। आश्रम के संस्थापक यश भारती से सम्मानित रमेश भइया बताते हैं कि पुष्पा व्यस्तता के बीच समय निकालकर आश्रम की गतिविधियों में हिस्सा लेतीं हैं। जागरूकता और कृषि संबंधी कार्यक्रमों में शामिल होतीं हैं। पुष्पा उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक हैं जो जिंदगी के झंझावतों के सामने हथियार डाल देती हैं।
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अभी लोन चुकाने का संकट
पुष्पा के मुताबिक, उनके पति ने 2015 में बैंक आफ बड़ौदा से किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया था, जिस पर ब्याज चढ़कर लगभग एक लाख रुपये हो गया है। तमाम प्रयासों के बावजूद वह लोन चुकाने में सक्षम नहीं हो पा रही है। पति की मौत के बाद अन्य लोगों के कर्ज चुकाने और खर्चों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल रही। ऋण माफी योजना में भी लाभ नहीं मिला। पुष्पा धीरे-धीरे लोन भरने के लिए रुपये जुटा रही हैं लेकिन प्रशासन से उम्मीद भी कर रही हैं कि अगर ऋण माफी या किसी अन्य योजना के जरिये ऋण अदायगी में राहत मिल जाए तो गृहस्थी चलती रहेगी।
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मूलरूप से लखीमपुर के गांव लखनौरिया की रहने वाली पुष्पा देवी (40) की शादी 20 साल पहले रोजा क्षेत्र के छीतेपुर गांव के रहने वाले धनीराम से हुई थी। पति खेतीबाड़ी करते थे और पुष्पा घर संभालती थीं। पुष्पा को दो बेटे और दो बेटियां हुईं। सामान्य आर्थिक हालात में सबकुछ ठीक चल रहा था, अचानक पति धनीराम बीमार पड़ गए। कर्ज लेकर इलाज कराया मगर दिमाग की नस फटने से धनीराम की 29 सितंबर 2018 को मौत हो गई। ससुराल वालों पर बोझ बनने की बजाय पुष्पा ने खुद परिवार को संभालने की ठान ली। पुष्पा ने करीब छह बीघा खेतीबाड़ी को संभालना शुरू किया। शुरुआत में दिक्कत हुई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। फिर खेतीबाड़ी में गेहूं-गन्ने की परंपरागत फसलों से खास आमदनी न होने पर उन्होंने आलू, मटर, प्याज, लहसुन उगाना शुरू कर दिया। इससे नकदी प्राप्त होने लगी। आठवीं तक पढ़ी पुष्पा ने बच्चों को संभालने के साथ ही खेत में हल चलाया, मजदूरी की लेकिन किसी के आगे हाथ फैलाना स्वीकार नहीं किया। बच्चों की पढ़ाई में आर्थिक स्थिति का रोड़ा आया तो पुष्पा ने घर पर ही परचून की दुकान खोल ली।
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दूसरी महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित
पुष्पा देवी विनोबा सेवा आश्रम से जुड़ी हैं। आश्रम के संस्थापक यश भारती से सम्मानित रमेश भइया बताते हैं कि पुष्पा व्यस्तता के बीच समय निकालकर आश्रम की गतिविधियों में हिस्सा लेतीं हैं। जागरूकता और कृषि संबंधी कार्यक्रमों में शामिल होतीं हैं। पुष्पा उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक हैं जो जिंदगी के झंझावतों के सामने हथियार डाल देती हैं।
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अभी लोन चुकाने का संकट
पुष्पा के मुताबिक, उनके पति ने 2015 में बैंक आफ बड़ौदा से किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया था, जिस पर ब्याज चढ़कर लगभग एक लाख रुपये हो गया है। तमाम प्रयासों के बावजूद वह लोन चुकाने में सक्षम नहीं हो पा रही है। पति की मौत के बाद अन्य लोगों के कर्ज चुकाने और खर्चों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल रही। ऋण माफी योजना में भी लाभ नहीं मिला। पुष्पा धीरे-धीरे लोन भरने के लिए रुपये जुटा रही हैं लेकिन प्रशासन से उम्मीद भी कर रही हैं कि अगर ऋण माफी या किसी अन्य योजना के जरिये ऋण अदायगी में राहत मिल जाए तो गृहस्थी चलती रहेगी।