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एमएसएमई की समृद्धि के प्रावधान चुनाव घोषणा पत्र में करें शामिल राजनीतिक दल
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रोहित गोयल।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र की शीर्ष संस्था इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के पदाधिकारियों ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों से अपने चुनाव घोषणा पत्र मेें ऐसे प्रावधान शामिल करने का अनुरोध किया है, जिनसे एमएसएमई सेक्टर समृद्ध हो सके।
उनका कहना है कि एमएसएमई क्षेत्र आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से मजबूत होने पर उनसे जुड़ी प्रदेश की आधी आबादी खुशहाली के दायरे में आ जाएगी। आईआईए के पदाधिकारियों के अनुसार प्रदेश में 89.99 लाख एमएसएमई इकाइयां स्थापित हैं जो देश की कुल संख्या के सापेक्ष 14.20 प्रतिशत हैं। इन इकाइयों से 165.26 लाख मतदाता जुड़े हैं। इस तरह 255.25 लाख परिवारों का भरण-पोषण एमएसएमई से हो रहा है।
यदि एक परिवार में औसतन चार सदस्य मान लिए जाएं तो प्रदेश की 10.21 करोड़ आबादी का जीवन यापन इसी क्षेत्र पर निर्भर है। अर्थात प्रदेश के लगभग 50 प्रतिशत लोगों की आजीविका का आधार लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग इकाइयां हैं।
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राजनीतिक दलों से उद्यमियों की अपेक्षाएं
- सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों में 30 फीसदी सामान की खरीदारी एमएसएमई से की जाए।
- एमएसएमई इकाइयों को आवंटित भूखंड फ्रीहोल्ड किए जाएं।
- औद्योगिक भवनों पर हाउस टैक्स आवासीय भवनों से कम किया जाए।
- एमएसएमई से उत्पादित और पावर ग्रिड को जाने वाली सौर बिजली की मीटरिंग कराई जाए।
- पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित हों।
- विभिन्न विभागों की एनओसी के लिए थर्ड पार्टी (स्वतंत्र संस्था) नियुक्त करने की व्यवस्था हो।
- एमएसएमई सेक्टर के लिए मंडी शुल्क खत्म किया जाए।
- विधान परिषद में एमएसएमई उद्यमियों के लिए सीटें आरक्षित हों।
- प्रदूषण में कमी को उद्योगों में पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा मिले।
उद्योग इकाइयों के संचालकों की बात
एमएसएमई के उत्थान के लिए राजनीतिक दलों को नौ ऐसे सुझाव दिए हैं, जिन्हेें चुनाव घोषणा पत्र मेें शामिल किया जा सकता है। लघु उद्यमियों की कई समस्याएं हैं, जिनमेें औद्योगिक भवनों से आवासीय क्षेत्र की तुलना में 7.5 गुना ज्यादा भवन कर लिया जाना प्रमुुख है। शिक्षकों की तरह एमएसएमई को विधान परिषद में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। - अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए
एमएसएमई सेक्टर से लाखों परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। हम गरीबी मिटाने और आत्मनिर्भर भारत बनाने में हर सरकार को प्रत्यक्ष सहयोग कर रहे हैं, लेकिन उसके बदले मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसीलिए लघु उद्योगों की उन्नति के कई प्रस्ताव तैयार किए गए हैं जो कि राजनीतिक दलों के प्रमुख पदाधिकारियों को जल्द भेजे जाएंगे। -अभिनव ओमर, मंडल चेयरमैन, आईआईए
उत्तर प्रदेश न केवल जनसंख्या, बल्कि एमएसएमई की संख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने चुनाव घोषणा पत्रों में जनता की भलाई के लिए कुछ वायदे भी करेंगे। इसीलिए मतदाता के रूप में अपनी बात कहने के लिए आईआईए उन्हें बताएगी कि एमएसएमई से जुड़े लोगों की उनसे क्या अपेक्षाएं हैं। -शुभम खन्ना, चैप्टर चेयरमैन, आईआईए
अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक आने से विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयास में जुट गई हैं। इसलिए अपनी बात उन तक पहुंचाने का यह बेहतर समय है। चुनाव घोषणा पत्र में राजनीतिक दल ऐसे प्रावधान करें कि उद्योगों को उत्पादन के अनुकूल माहौल मिल सके। -रोहित गोयल, चैप्टर सचिव, आईआईए
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उनका कहना है कि एमएसएमई क्षेत्र आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से मजबूत होने पर उनसे जुड़ी प्रदेश की आधी आबादी खुशहाली के दायरे में आ जाएगी। आईआईए के पदाधिकारियों के अनुसार प्रदेश में 89.99 लाख एमएसएमई इकाइयां स्थापित हैं जो देश की कुल संख्या के सापेक्ष 14.20 प्रतिशत हैं। इन इकाइयों से 165.26 लाख मतदाता जुड़े हैं। इस तरह 255.25 लाख परिवारों का भरण-पोषण एमएसएमई से हो रहा है।
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यदि एक परिवार में औसतन चार सदस्य मान लिए जाएं तो प्रदेश की 10.21 करोड़ आबादी का जीवन यापन इसी क्षेत्र पर निर्भर है। अर्थात प्रदेश के लगभग 50 प्रतिशत लोगों की आजीविका का आधार लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग इकाइयां हैं।
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राजनीतिक दलों से उद्यमियों की अपेक्षाएं
- सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों में 30 फीसदी सामान की खरीदारी एमएसएमई से की जाए।
- एमएसएमई इकाइयों को आवंटित भूखंड फ्रीहोल्ड किए जाएं।
- औद्योगिक भवनों पर हाउस टैक्स आवासीय भवनों से कम किया जाए।
- एमएसएमई से उत्पादित और पावर ग्रिड को जाने वाली सौर बिजली की मीटरिंग कराई जाए।
- पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित हों।
- विभिन्न विभागों की एनओसी के लिए थर्ड पार्टी (स्वतंत्र संस्था) नियुक्त करने की व्यवस्था हो।
- एमएसएमई सेक्टर के लिए मंडी शुल्क खत्म किया जाए।
- विधान परिषद में एमएसएमई उद्यमियों के लिए सीटें आरक्षित हों।
- प्रदूषण में कमी को उद्योगों में पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा मिले।
उद्योग इकाइयों के संचालकों की बात
एमएसएमई के उत्थान के लिए राजनीतिक दलों को नौ ऐसे सुझाव दिए हैं, जिन्हेें चुनाव घोषणा पत्र मेें शामिल किया जा सकता है। लघु उद्यमियों की कई समस्याएं हैं, जिनमेें औद्योगिक भवनों से आवासीय क्षेत्र की तुलना में 7.5 गुना ज्यादा भवन कर लिया जाना प्रमुुख है। शिक्षकों की तरह एमएसएमई को विधान परिषद में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। - अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए
एमएसएमई सेक्टर से लाखों परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। हम गरीबी मिटाने और आत्मनिर्भर भारत बनाने में हर सरकार को प्रत्यक्ष सहयोग कर रहे हैं, लेकिन उसके बदले मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसीलिए लघु उद्योगों की उन्नति के कई प्रस्ताव तैयार किए गए हैं जो कि राजनीतिक दलों के प्रमुख पदाधिकारियों को जल्द भेजे जाएंगे। -अभिनव ओमर, मंडल चेयरमैन, आईआईए
उत्तर प्रदेश न केवल जनसंख्या, बल्कि एमएसएमई की संख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने चुनाव घोषणा पत्रों में जनता की भलाई के लिए कुछ वायदे भी करेंगे। इसीलिए मतदाता के रूप में अपनी बात कहने के लिए आईआईए उन्हें बताएगी कि एमएसएमई से जुड़े लोगों की उनसे क्या अपेक्षाएं हैं। -शुभम खन्ना, चैप्टर चेयरमैन, आईआईए
अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक आने से विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयास में जुट गई हैं। इसलिए अपनी बात उन तक पहुंचाने का यह बेहतर समय है। चुनाव घोषणा पत्र में राजनीतिक दल ऐसे प्रावधान करें कि उद्योगों को उत्पादन के अनुकूल माहौल मिल सके। -रोहित गोयल, चैप्टर सचिव, आईआईए

अशोक अग्रवाल।- फोटो : SHAHJAHANPUR

अभिनव ओमर।- फोटो : SHAHJAHANPUR

शुभम खन्ना।- फोटो : SHAHJAHANPUR