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Shahjahanpur News: एक साल में सिर्फ दो मंजिला सत्संग भवन व शौचालय बना, वह भी अधूरा

Sun, 24 May 2026 01:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 01:08 AM IST
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In one year, only a two-story Satsang Bhavan and a toilet were constructed and even those remain incomplete.
जलालाबाद ​स्थित परशुराम जन्मस्थली प्रांगण में निर्माणाधीन सत्संग हाल। संवाद
जलालाबाद। परशुराम जन्मस्थली को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और वहां श्रद्धालुओं से जुड़ी बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का शुरू हुआ कार्य तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। करीब एक साल पहले निर्माण कार्य शुरू होने के बावजूद अब तक यहां सत्संग हाल और शौचालय ही बन सका है। इन दोनों का भी अभी फिनिशिंग कार्य होना बाकी है।
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प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2022 में नगर को भगवान परशुराम की जन्मस्थली घोषित किया था। जनवरी 2025 में शासन ने जन्मस्थली को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 19 करोड़ और परशुराम मंदिर के पास रामताल के सौंदर्यीकरण को 11 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड ने मंदिर प्रांगण के सौंदर्यीकरण का ठेका मेरठ की कंपनी एसके ट्रेडर्स को दिया था।
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कंपनी ने बीते साल अप्रैल माह में पुराने भवनों और खाली पड़े परिसर को ध्वस्त कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। एक साल से धीमी गति से काम होने से अब तक दो मंजिला सत्संग भवन और उसके सामने टॉयलेट ब्लाॅक बन सका है। दोनों जगह फिनिशिंग के अलावा सत्संग भवन में अभी लिफ्ट लगने का काम पूरा नही हुआ है।
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यहां एक यात्री टिनशेड, नाला और मार्ग निर्माण, पूरे परिसर में पत्थर बिछाने, गेट निर्माण, मंदिर के जर्जर बरामदों के निर्माण, पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार, बिजली व्यवस्था आदि अन्य कई काम होना शेष हैं।

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श्रद्धालुओं को हो रही है परेशानी

निर्माण कार्य होने से पूरे मंदिर परिसर में मलबा, निर्माण से जुड़ी सामग्री और गंदगी छितराई हुई है। यहां बच्चों के मुंडन और अन्नप्राशन सहित अन्य कई धार्मिक आयोजन संपन्न कराने के लिए नगर के अलावा प्रतिदिन दूरदराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है। इन अव्यवस्थाओं के कारण यहां पहुंचने वाले लोगों को बैठने तक की जगह तक नहीं मिल पाती। नालियों में मिट्टी भर जाने से गंदा पानी भी रास्तों पर बहता रहता है। अव्यवस्था के चलते यहां आने वालों के लिए पीने के पानी का भी संकट बना हुआ है। इन सभी अव्यवस्थाओं से श्रद्धालुओं को बेहद परेशानी हो रही है।

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नक्शा उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण काम की गति तेज नहीं हो सकी। दो दिन पहले विभागीय जीएम के साथ लखनऊ में बैठक हुई थी। आर्किटेक्ट की डीपीआर में कुछ कमी थी, जिसे बैठक में बता दिया गया है। जल्द ही नया नक्शा उपलब्ध होते ही शेष काम तेजी से होने लगेंगे। -रवि कुमार दुबे, अभियंता, यूपीपीसीएल (कार्यदायी कंपनी)
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