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‘गृहमंत्री भारत के संविधान से हटाएं धर्म निरपेक्षता जैसा शब्द’
शाहजहांपुर
Updated Wed, 25 Feb 2015 11:50 PM IST
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गृहमंत्री को चुनाव पूर्व अपना किया गया वादा पूरा कर संविधान से धर्म निरपेक्षता जैसा शब्द हटाना चाहिए। गृहमंत्री राजनाथ सिंह जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तब उन्होंने वादा किया था कि वह संविधान से धर्म निरपेक्षता जैसा शब्द ही खत्म कर देंगे। वादा याद दिलाते हुए शारदा पीठ के श्रीमद् जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कहा अब उन्हें अपना वादा पूरा करना चाहिए। वह एसएस कॉलेज में स्वामी शुकदेवानंद अर्द्ध शताब्दी निर्वाण महोत्सव में अपने विचार रख रहे थे।
जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि भाजपा नेता अयोध्या में कहते हैं कि मंदिर यहीं बनाएंगे और दिल्ली पहुंचकर कहते हैं कि मंदिर नहीं बनाएंगे। आज देश की स्थितियां काफी विषम हैं। किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं से आशा करना हिंदू समाज को निराश करेगा। नेताओं से देशहित की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में साधु संतों का दायित्व बढ़ गया है कि वह देश हित के लिए आगे आए।
उन्होंने कहा कि सरकार पैसों से विकास का रास्ता खोलना चाहती है, जो गलत है। विकास के साथ-साथ आध्यात्मिकता व राष्ट्रीयता जो हिंदू संस्कृति का मूल प्राण है, उस पर भी आग्रह करना होगा। सरकारी नीतियों से देश के गुलाम होने की आशंका पैदा हो रही है। हमारे देश की पहचान अर्थ से नहीं, अपितु त्याग और बलिदान से थी। अब अर्थ संपन्नता के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाए जा रहे हैं, जो ठीक नहीं है।
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जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि भाजपा नेता अयोध्या में कहते हैं कि मंदिर यहीं बनाएंगे और दिल्ली पहुंचकर कहते हैं कि मंदिर नहीं बनाएंगे। आज देश की स्थितियां काफी विषम हैं। किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं से आशा करना हिंदू समाज को निराश करेगा। नेताओं से देशहित की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में साधु संतों का दायित्व बढ़ गया है कि वह देश हित के लिए आगे आए।
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उन्होंने कहा कि सरकार पैसों से विकास का रास्ता खोलना चाहती है, जो गलत है। विकास के साथ-साथ आध्यात्मिकता व राष्ट्रीयता जो हिंदू संस्कृति का मूल प्राण है, उस पर भी आग्रह करना होगा। सरकारी नीतियों से देश के गुलाम होने की आशंका पैदा हो रही है। हमारे देश की पहचान अर्थ से नहीं, अपितु त्याग और बलिदान से थी। अब अर्थ संपन्नता के लिए दूसरों के आगे हाथ फैलाए जा रहे हैं, जो ठीक नहीं है।
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