{"_id":"5d5997318ebc3e89da3d73f9","slug":"helth-shahjahanpur-news-bly3728130137","type":"story","status":"publish","title_hn":"...अरे 24 घंटे में पूरी हो गई मेडिकल कॉलेज टीम की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...अरे 24 घंटे में पूरी हो गई मेडिकल कॉलेज टीम की जांच
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शाहजहांपुर। मिर्जापुर के गांव सिंगहा यूसुफपुर निवासी प्रसूता रेखा की मौत के मामले में शनिवार को गठित की गई जांच कमेटी ने 24 घंटे में जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है। आधे-अधूरे स्तर पर की गई जांच में यह बताया गया है कि सीमा नाम की आशा प्रसूता और उसके पति को बरगलाकर प्राइवेट अस्पताल ले गई। आशा कहां की है, यह टीम को नहीं मालूम है।
प्रसूता रेखा की मौत प्राइवेट अस्पताल में बच्ची जनने के बाद अधिक रक्तस्राव होने पर बरेली ले जाते समय रास्ते में हुई थी, लेकिन इस घटनाक्रम में जिला महिला अस्पताल सवालों के घेरे में आ गया है। क्योंकि 11 अगस्त की शाम पांच बजे जितेंद्र अपनी पत्नी रेखा को लेकर जब अस्पताल पहुंचा तो उसे बेड न होने की बात कहकर पहले ही भगा दिया गया, जब उसने डीएम इंद्र विक्रम सिंह से शिकायत की तो डीएम के निर्देश पर रेखा को भर्ती तो कर लिया गया लेकिन डॉक्टर व नर्स ने उसे देखा तक नही। मजबूरन उसे प्राइवेट अस्पताल भागना पड़ा। जब स्वास्थ्य विभाग कठघरे में खड़ा हुआ तो मेडिकल कॉलेज प्राचार्य अभय कुमार सिन्हा ने पांच सदस्यीय डॉक्टरों की जांच टीम गठित कर दी। जांच टीम ने इस घटनाक्रम में एक आशा को दोषी दर्शाने के साथ आधे-अधूरे स्तर पर इस आशय के साथ रिपोर्ट सौंपी कि जांच टीम को यह नहीं मालूम है कि आशा किस क्षेत्र की है।
जांच टीम ने घटना के समय जो मरीज और उनके तीमारदार मौजूद थे उनके लिए गए बयान के आधार पर जांच रिपोर्ट सौपी है।
डॉ. पूजा त्रिपाठी, प्रवक्ता, मेडिकल कॉलेज
महिला स्वास्थ्य और सुरक्षा के दावे हवा हवाई
संसाधनों के बावजूद भी सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव पर सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए किए जाने वाले बड़े-बड़े दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। मिर्जापुर के सिंगहा यूसुफपुर की प्रसूता की मौत ने स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रसूता की मौत से मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने के दावे की कलई भी खुल गई है।
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जरियनपुर सीएचसी में भी चली गई थी प्रसूता की जान
12 अगस्त को थाना कलान क्षेत्र के गांव नौगवां मुबारिकपुर निवासी सतीश अपनी प्रसव पीड़ित 40 वर्षीय पत्नी सोनवती को सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए मिर्जापुर के जरियनपुर में स्थित सीएचसी पर लेकर गया था। जहां रात करीब 11 बजे सोनवती ने बेटे को जन्म दिया। आरोप है कि पांच हजार रुपये नर्स को नहीं देने पर उसने सोनवती की ब्लीडिंग रोकने के लिए कोई दवा नहीं दी। इस वजह से उसकी पत्नी की मौत हो गई।
शव को कुत्तों के नोंचने का मामला भी ठंडे बस्ते में
31 जुलाई को तड़के चार बजे कुछ लोगों ने जिला अस्पताल गेट के पास पड़ी 50 वर्षीय महिला को कुछ लोगों की सूचना पर हेल्प डेस्क वाले उसे उठाकर ट्रामा सेंटर ले गए तो उसे मृत घोषित कर दिया गया था। महिला के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि वह अस्पताल गेट पर दो दिन पहले ही मर चुकी थी और उसके शव को कुत्ते नोंच-नोंचकर खा रहे थे। मामला मीडिया से सुर्खियों में आया तो आनन-फानन में तीन डॉक्टरों की कमेटी को मामले की जांच सौंप दी गई, लेकिन जांच रिपोर्ट को फाइल में बंद करके रख दिया गया।
स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर मरीजों का पूरा ध्यान रखने के आदेश हैं। अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी व होमगार्ड भी तैनात किए गए हैं। यदि कोई घटना होती है तो मामले की जांच के बाद जो भी दोषी होता उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती।
डॉ. आरपी रावत सीएमओ
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प्रसूता रेखा की मौत प्राइवेट अस्पताल में बच्ची जनने के बाद अधिक रक्तस्राव होने पर बरेली ले जाते समय रास्ते में हुई थी, लेकिन इस घटनाक्रम में जिला महिला अस्पताल सवालों के घेरे में आ गया है। क्योंकि 11 अगस्त की शाम पांच बजे जितेंद्र अपनी पत्नी रेखा को लेकर जब अस्पताल पहुंचा तो उसे बेड न होने की बात कहकर पहले ही भगा दिया गया, जब उसने डीएम इंद्र विक्रम सिंह से शिकायत की तो डीएम के निर्देश पर रेखा को भर्ती तो कर लिया गया लेकिन डॉक्टर व नर्स ने उसे देखा तक नही। मजबूरन उसे प्राइवेट अस्पताल भागना पड़ा। जब स्वास्थ्य विभाग कठघरे में खड़ा हुआ तो मेडिकल कॉलेज प्राचार्य अभय कुमार सिन्हा ने पांच सदस्यीय डॉक्टरों की जांच टीम गठित कर दी। जांच टीम ने इस घटनाक्रम में एक आशा को दोषी दर्शाने के साथ आधे-अधूरे स्तर पर इस आशय के साथ रिपोर्ट सौंपी कि जांच टीम को यह नहीं मालूम है कि आशा किस क्षेत्र की है।
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जांच टीम ने घटना के समय जो मरीज और उनके तीमारदार मौजूद थे उनके लिए गए बयान के आधार पर जांच रिपोर्ट सौपी है।
डॉ. पूजा त्रिपाठी, प्रवक्ता, मेडिकल कॉलेज
महिला स्वास्थ्य और सुरक्षा के दावे हवा हवाई
संसाधनों के बावजूद भी सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव पर सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए किए जाने वाले बड़े-बड़े दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। मिर्जापुर के सिंगहा यूसुफपुर की प्रसूता की मौत ने स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रसूता की मौत से मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने के दावे की कलई भी खुल गई है।
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जरियनपुर सीएचसी में भी चली गई थी प्रसूता की जान
12 अगस्त को थाना कलान क्षेत्र के गांव नौगवां मुबारिकपुर निवासी सतीश अपनी प्रसव पीड़ित 40 वर्षीय पत्नी सोनवती को सुरक्षित प्रसव करवाने के लिए मिर्जापुर के जरियनपुर में स्थित सीएचसी पर लेकर गया था। जहां रात करीब 11 बजे सोनवती ने बेटे को जन्म दिया। आरोप है कि पांच हजार रुपये नर्स को नहीं देने पर उसने सोनवती की ब्लीडिंग रोकने के लिए कोई दवा नहीं दी। इस वजह से उसकी पत्नी की मौत हो गई।
शव को कुत्तों के नोंचने का मामला भी ठंडे बस्ते में
31 जुलाई को तड़के चार बजे कुछ लोगों ने जिला अस्पताल गेट के पास पड़ी 50 वर्षीय महिला को कुछ लोगों की सूचना पर हेल्प डेस्क वाले उसे उठाकर ट्रामा सेंटर ले गए तो उसे मृत घोषित कर दिया गया था। महिला के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि वह अस्पताल गेट पर दो दिन पहले ही मर चुकी थी और उसके शव को कुत्ते नोंच-नोंचकर खा रहे थे। मामला मीडिया से सुर्खियों में आया तो आनन-फानन में तीन डॉक्टरों की कमेटी को मामले की जांच सौंप दी गई, लेकिन जांच रिपोर्ट को फाइल में बंद करके रख दिया गया।
स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर मरीजों का पूरा ध्यान रखने के आदेश हैं। अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी व होमगार्ड भी तैनात किए गए हैं। यदि कोई घटना होती है तो मामले की जांच के बाद जो भी दोषी होता उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती।
डॉ. आरपी रावत सीएमओ