{"_id":"5f68fca68ebc3ed55d572732","slug":"heavy-private-vehicles-scam-on-roadways-earnings-shahjahanpur-news-bly4206581114","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोडवेज की कमाई पर भारी प्राइवेट वाहनों की डग्गामारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोडवेज की कमाई पर भारी प्राइवेट वाहनों की डग्गामारी
विज्ञापन
शाहजहांपुर। रोडवेज के एक किलोमीटर की परिधि में प्राइवेट वाहनों का संचालन शुरू न हो, ऐसा प्रावधान है। इसके बावजूद चाहे रोडवेज बस अड्डा हो या फिर वर्कशॉप, दोनों ही जगह से प्राइवेट वाहन चालक सवारियों को हाईजैक कर लेते हैं। इससे रोडवेज की बसों में सवारियां पूरी भी नहीं हो पाती हैं। शाहजहांपुर में रोडवेज की बसों का कुछ यही हाल है। इसका असर रोडवेज की कमाई पर पड़ रहा है।
देश में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने पर स्वास्थ्य सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद गया था। कुछ दिनों तक रोडवेज की बसों का संचालन भी नहीं हुआ। लेकिन प्रवासी मजदूरों के आवागमन और लोगों सहूलियत के लिए फिर से रोडवेज की बसों का संचालन शुरू कर दिया गया। वर्तमान समय में भी कोविड 19 के बावजूद रोडवेज की बसों का संचालन नियमित रूप से किया जा रहा है, लेकिन सवारियां कम होने के कारण लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। रोडवेज के अधिकारियों की माने तो कमाई कम होने का कारण कोरोना संक्रमण का खतरा होना की बजाय, प्राइवेट वाहनों का संचालन ज्यादा है। प्राइवेट वाहन चालकों द्वारा रोडवेज के पास और वर्कशॉप के सामने से सवारियां भरी जाती हैं, जिस पर रोक नहीं लग पा रही है, जबकि इसके लिए कई बार प्रशासन व आरटीओ को पत्र लिखा गया है। पहले जहां रोडवेज की बसों से 25 से 30 लाख रुपये की कमाई होती थी, वहीं अब 15 से 20 लाख रुपये ही हो पा रही है।
पुवायां और निगोही के लिए भरी जाती है सवारियां
रोडवेज के पास और वर्कशॉप के सामने प्राइवेट वाहनों की कतार लगी रहती है। इसमें पुवायां और निगोही के लिए जमकर सवारियां भरी जाती है, जबकि रोडवेज की ओर से इन रूटों पर दर्जनों बसों का संचालन किया जाता है। इनमें निगम के साथ ही अनुबंधित बसें भी शामिल हैं।
विज्ञापन
सरेंडर चल रही रोडवेज की 46 बसें
कोरोना संक्रमण और प्राइवेट वाहनों के संचालन की वजह से सवारियां कम होने पर रोडवेज को अपनी बसें सरेंडर तक करना पड़ गया है। इनमें निगम की 22 और अनुबंधित 24 बसें शामिल हैं। इस समय संचालित होने वाली बसों की संख्या 154 हैं, जिसमें 100 निगम और 54 अनुबंधित बसें हैं। रोडवेज के पास निगम की कुल 122 और अनुबंधित 78 बसें हैं।
पिछले एक सप्ताह में रोडवेज की कमाई
11 सितंबर - 15.10 लाख
12 सितंबर - 18.73 लाख
13 सितंबर - 15.20 लाख
14 सितंबर - 16.76 लाख
15 सितंबर - 20.60 लाख
16 सितंबर - 19.15 लाख
17 सितंबर - 18.77 लाख
18 सितंबर - 15.34 लाख
19 सितंबर - 17.29 लाख
लॉकडाउन के बाद रोडवेज की कमाई पर काफी असर पड़ा है। कोरोना संक्रमण की वजह से वैसे ही सवारियां कम है, डग्गामार वाहनों ने और बंटाधार कर रखा है। रोडवेज के पास और वर्कशॉप के सामने से डग्गामार वाहन सवारियां भरते हैं। जबकि रोडवेज से एक किमी की परिधि के अंदर प्राइवेट वाहनों के संचालन पर रोक है। जिसका पालन आरटीओ व पुलिस विभाग द्वारा नहीं कराया जा रहा है। - विनय शुक्ला, बुकिंग लिपिक, रोडवेज डिपो शाहजहांपुर।
डग्गामार वाहनों के खिलाफ नियमित रूप से अभियान चलाया जा रहा है। क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। रोडवेज के पास भी चेकिंग की गई है। जहां से सवारियों को भरने पर कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन
विज्ञापन
देश में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने पर स्वास्थ्य सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद गया था। कुछ दिनों तक रोडवेज की बसों का संचालन भी नहीं हुआ। लेकिन प्रवासी मजदूरों के आवागमन और लोगों सहूलियत के लिए फिर से रोडवेज की बसों का संचालन शुरू कर दिया गया। वर्तमान समय में भी कोविड 19 के बावजूद रोडवेज की बसों का संचालन नियमित रूप से किया जा रहा है, लेकिन सवारियां कम होने के कारण लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। रोडवेज के अधिकारियों की माने तो कमाई कम होने का कारण कोरोना संक्रमण का खतरा होना की बजाय, प्राइवेट वाहनों का संचालन ज्यादा है। प्राइवेट वाहन चालकों द्वारा रोडवेज के पास और वर्कशॉप के सामने से सवारियां भरी जाती हैं, जिस पर रोक नहीं लग पा रही है, जबकि इसके लिए कई बार प्रशासन व आरटीओ को पत्र लिखा गया है। पहले जहां रोडवेज की बसों से 25 से 30 लाख रुपये की कमाई होती थी, वहीं अब 15 से 20 लाख रुपये ही हो पा रही है।
विज्ञापन
पुवायां और निगोही के लिए भरी जाती है सवारियां
रोडवेज के पास और वर्कशॉप के सामने प्राइवेट वाहनों की कतार लगी रहती है। इसमें पुवायां और निगोही के लिए जमकर सवारियां भरी जाती है, जबकि रोडवेज की ओर से इन रूटों पर दर्जनों बसों का संचालन किया जाता है। इनमें निगम के साथ ही अनुबंधित बसें भी शामिल हैं।
विज्ञापन
सरेंडर चल रही रोडवेज की 46 बसें
कोरोना संक्रमण और प्राइवेट वाहनों के संचालन की वजह से सवारियां कम होने पर रोडवेज को अपनी बसें सरेंडर तक करना पड़ गया है। इनमें निगम की 22 और अनुबंधित 24 बसें शामिल हैं। इस समय संचालित होने वाली बसों की संख्या 154 हैं, जिसमें 100 निगम और 54 अनुबंधित बसें हैं। रोडवेज के पास निगम की कुल 122 और अनुबंधित 78 बसें हैं।
पिछले एक सप्ताह में रोडवेज की कमाई
11 सितंबर - 15.10 लाख
12 सितंबर - 18.73 लाख
13 सितंबर - 15.20 लाख
14 सितंबर - 16.76 लाख
15 सितंबर - 20.60 लाख
16 सितंबर - 19.15 लाख
17 सितंबर - 18.77 लाख
18 सितंबर - 15.34 लाख
19 सितंबर - 17.29 लाख
लॉकडाउन के बाद रोडवेज की कमाई पर काफी असर पड़ा है। कोरोना संक्रमण की वजह से वैसे ही सवारियां कम है, डग्गामार वाहनों ने और बंटाधार कर रखा है। रोडवेज के पास और वर्कशॉप के सामने से डग्गामार वाहन सवारियां भरते हैं। जबकि रोडवेज से एक किमी की परिधि के अंदर प्राइवेट वाहनों के संचालन पर रोक है। जिसका पालन आरटीओ व पुलिस विभाग द्वारा नहीं कराया जा रहा है। - विनय शुक्ला, बुकिंग लिपिक, रोडवेज डिपो शाहजहांपुर।
डग्गामार वाहनों के खिलाफ नियमित रूप से अभियान चलाया जा रहा है। क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। रोडवेज के पास भी चेकिंग की गई है। जहां से सवारियों को भरने पर कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन