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पेट में कपड़ा छूटने का मामला : सात दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद महिला की मौत
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मृतका नीलम का । फाइल फोटो
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के दौरान पेट में कपड़ा छूटने के मामले में पीड़ित महिला ने दम तोड़ दिया। वह सात दिन से वेंटिलेटर पर थी। परिजन ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया है। इधर सात दिन से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी जांच कमेटी ने महिला के परिवार से किसी तरह की जानकारी नहीं ली है। पिता ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ हर हाल में कार्रवाई करने की बात की है।
तिलहर क्षेत्र के रमापुर उत्तरी निवासी मनोज ने प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी का जनवरी में राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराया था। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से उसके पेट में कपड़ा छूट गया और आंत भी कट गई। इसके बाद हालत बिगड़ने पर महिला का दूसरे निजी मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कर कपड़ा निकाला गया।
पति मनोज ने पत्नी को 15 जुलाई को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया। आंत के ऑपरेशन के बाद महिला पिछले सात दिन से वेंटिलेटर पर थी। हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। आखिरकार सोमवार की रात उसकी की लखनऊ के केजीएमयू में मौत हो गई। परिजन शव को घर ले आए। मंगलवार को तिलहर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। छह माह पहले हुए महिला के ऑपरेशन के बाद से मनोज का परिवार बहुत परेशान है। इलाज के लिए मनोज को अपनी करीब सात बीघा खेती गिरवी रखना पड़ गई और पत्नी के जेवर तक बेचने पड़े। लखनऊ के केजीएमयू मेें महज सात दिन के इलाज के दौरान मनोज के करीब 80-90 हजार रुपये खर्च हो गए। इसके बावजूद पत्नी बच नहीं सकी।
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डीएम के संज्ञान लेने पर बनाई गई थी जांच कमेटी
डीएम के शिकायत का संज्ञान लेने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट मांगी गई थी। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने मामले की जांच सबसे पहले महिला सीएमएस को दी थी, लेकिन उन्होंने जांच करने से इनकार कर दिया था। उसके बाद तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। स्त्री प्रसूति एवं रोग विभागाध्यक्ष डॉ.अर्चना मिश्रा से राजकीय मेडिकल कॉलेज का संपर्क तक नहीं हो सका। इसके बाद चार सदस्यीय टीम बनाई गई जिसमें डॉ. रितु रस्तोगी और डॉ. सरोज को शामिल किया गया।
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सात दिन में जांच टीम ने एक बार भी पीड़ित से संपर्क नहीं किया
महिला के पिता राधेश्याम ने बताया कि 15 जुलाई को बेटी को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया था। जहां आंत का ऑपरेशन के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ था। ऑपरेशन के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। रिश्वत की मांग पूरी न करने की कीमत बेटी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। पिता द्वारा आरोपी डॉक्टर की शिकायत डीएम से की गई। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज ने जांच कमेटी बनाई। पिता का कहना है कि सात दिन बीत जाने के बाद भी जांच करने वाले या फिर किसी भी अधिकारी का उनके पास फोन तक नहीं आया है। उन्होंने कहा कि बेटी की मौत के जिम्मेदार डॉक्टर को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सब कुछ करेंगे। अगर अधिकारियों से न्याय नहीं मिला तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। दो छोटे-छोटे बच्चे मां के आंचल से महरूम हो गए हैं।
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जांच शुरू कर दी गई है। ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर भी बाहर है। जांच शुरू होने में देर इसलिए लग गई क्योंकि कुछ डॉक्टरों से संपर्क नहीं हो पाया था। ध्येय है कि जांच निष्पक्ष हो। जांच रिपोर्ट मिलते ही डीएम को भेज दी जाएगी।
-डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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तिलहर क्षेत्र के रमापुर उत्तरी निवासी मनोज ने प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी का जनवरी में राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराया था। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से उसके पेट में कपड़ा छूट गया और आंत भी कट गई। इसके बाद हालत बिगड़ने पर महिला का दूसरे निजी मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कर कपड़ा निकाला गया।
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पति मनोज ने पत्नी को 15 जुलाई को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया। आंत के ऑपरेशन के बाद महिला पिछले सात दिन से वेंटिलेटर पर थी। हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। आखिरकार सोमवार की रात उसकी की लखनऊ के केजीएमयू में मौत हो गई। परिजन शव को घर ले आए। मंगलवार को तिलहर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। छह माह पहले हुए महिला के ऑपरेशन के बाद से मनोज का परिवार बहुत परेशान है। इलाज के लिए मनोज को अपनी करीब सात बीघा खेती गिरवी रखना पड़ गई और पत्नी के जेवर तक बेचने पड़े। लखनऊ के केजीएमयू मेें महज सात दिन के इलाज के दौरान मनोज के करीब 80-90 हजार रुपये खर्च हो गए। इसके बावजूद पत्नी बच नहीं सकी।
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डीएम के संज्ञान लेने पर बनाई गई थी जांच कमेटी
डीएम के शिकायत का संज्ञान लेने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट मांगी गई थी। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने मामले की जांच सबसे पहले महिला सीएमएस को दी थी, लेकिन उन्होंने जांच करने से इनकार कर दिया था। उसके बाद तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। स्त्री प्रसूति एवं रोग विभागाध्यक्ष डॉ.अर्चना मिश्रा से राजकीय मेडिकल कॉलेज का संपर्क तक नहीं हो सका। इसके बाद चार सदस्यीय टीम बनाई गई जिसमें डॉ. रितु रस्तोगी और डॉ. सरोज को शामिल किया गया।
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सात दिन में जांच टीम ने एक बार भी पीड़ित से संपर्क नहीं किया
महिला के पिता राधेश्याम ने बताया कि 15 जुलाई को बेटी को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया था। जहां आंत का ऑपरेशन के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ था। ऑपरेशन के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। रिश्वत की मांग पूरी न करने की कीमत बेटी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। पिता द्वारा आरोपी डॉक्टर की शिकायत डीएम से की गई। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज ने जांच कमेटी बनाई। पिता का कहना है कि सात दिन बीत जाने के बाद भी जांच करने वाले या फिर किसी भी अधिकारी का उनके पास फोन तक नहीं आया है। उन्होंने कहा कि बेटी की मौत के जिम्मेदार डॉक्टर को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सब कुछ करेंगे। अगर अधिकारियों से न्याय नहीं मिला तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। दो छोटे-छोटे बच्चे मां के आंचल से महरूम हो गए हैं।
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जांच शुरू कर दी गई है। ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर भी बाहर है। जांच शुरू होने में देर इसलिए लग गई क्योंकि कुछ डॉक्टरों से संपर्क नहीं हो पाया था। ध्येय है कि जांच निष्पक्ष हो। जांच रिपोर्ट मिलते ही डीएम को भेज दी जाएगी।
-डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज