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जलालाबादः पहली बार में जीत गए हरिप्रकाश, दलबदल कर हारे नीरज मौर्य

Fri, 11 Mar 2022 01:59 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 01:59 AM IST
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Hariprakash won for the first time, Neeraj Maurya lost by defecting
जलालाबाद के विजेता भाजपा प्रत्याशी हरि प्रकाश वर्मा । - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। भारतीय जनता पार्टी के लिए हमेशा बंजर रहे जलालाबाद में जिलाध्यक्ष हरिप्रकाश वर्मा ने पहली बार में ही कमल खिला दिया। वहीं, चुनाव से पहले भाजपा से सपा में पहुंचे नीरज मौर्य मात खा गए। जलालाबाद में भाजपा कभी जीत का स्वाद नहीं चख सकी थी। यही वजह थी कि भाजपा ने जलालाबाद जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर भाजपा के कई बड़े नेताओं ने जलालाबाद में अपना फोकस किया हुआ था।
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2017 के चुनाव में हारने वाले भाजपा प्रत्याशी मनोज कश्यप के असमय निधन के बाद पार्टी को यहां पर उपयुक्त प्रत्याशी की तलाश थी। टिकट की आस में 2017 का चुनाव हारकर बसपा से भाजपा में आए नीरज मौर्य अचानक सपा में शामिल हो गए। रोशनलाल वर्मा के भी सपा में जाने के बाद भाजपा को एक टिकट किसान (लोध) बिरादरी का देना था। भाजपा ने अपने जिलाध्यक्ष हरिप्रकाश वर्मा को यहां से मैदान में उतार दिया। हरिप्रकाश वर्मा की निर्विवादित छवि और संगठन में गहरी पकड़ होने के कारण शुरुआत से ही मुकाबला कड़ा माना जा रहा था।
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जिले में सपा के इकलौते विधायक शरदवीर सिंह टिकट कटने से आहत होकर भाजपा में शामिल हो गए। इससे हरिप्रकाश को मजबूती मिली। शरदवीर पूरी ताकत से भाजपा प्रत्याशी को लड़ा रहे थे। हरिप्रकाश ने भाजपा का टिकट न मिलने से असंतुष्ट अन्य लोगों को भी समझा-बुझाकर अपने पाले में खड़ा कर लिया। स्व. मनोज कश्यप की पत्नी सरोज कश्यप को अपना प्रस्तावक बनाकर वह यह संदेश देने में सफल रहे कि पार्टी एक होकर पूरी मजबूती से लड़ रही है। हरिप्रकाश पर बाहरी विधानसभा का होने का आरोप लगा, लेकिन वह क्षेत्र में सक्रिय होकर इससे बाहर निकल आए। हरिप्रकाश का क्षेत्र में विरोध नहीं था। इसी का पूरा लाभ भाजपा को मिला।
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माहौल भांपने से चूके नीरज मौर्य
2007 और 2012 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट से जीते नीरज मौर्य भाजपा छोड़कर सपा में आ जरूर गए, लेकिन सपाई पूरे मन से उनके साथ नहीं आए। मुस्लिम, यादव के साथ मौर्य बिरादरी के वोट के बलबूते जीतने का ख्वाब देख रहे नीरज मौर्य यहीं पर मात खा बैठे। 2017 में भाजपा की लहर के बावजूद सपा की सीट निकालने वाले शरदवीर सिंह का टिकट कटने से भी कुछ सपा समर्थक आक्रोशित थे।

इसका नुकसान नीरज मौर्य को झेलना पड़ा। बसपा में विधायक रहने के दौरान सपाई नीरज मौर्य पर उत्पीड़न का आरोप लगाते थे। जब नीरज मौर्य सपा में आए तो सपाई पूरे मन के साथ उनके साथ नहीं खड़े हुए। वहीं बसपा से अनिरुद्ध यादव के खड़े होने से यादव बिरादरी के वोटों का नुकसान भी नीरज मौर्य को हुआ।
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