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भैंसी नदी सूखी तो वेंटिलेटर पर आ गई गोमती
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भैंस नदी में बने गहरे गड्ढे, गायब हुई नदी
- फोटो : POWAYAN
पुवायां। गोमती नदी की जलधार रुकने का एक बड़ा कारण उसकी सहायक नदियों के अस्तित्व पर संकट आना भी है। पुवायां क्षेत्र में तीन नदियां गोमती की सहायक हैं, जिसमें भैंसी नदी पूरी तरह से सूख चुकी है और नदी भूमि पर अवैध कब्जे हो चुके हैं।
करीबन 42 किमी लंबी भैंसी नदी गोमती की सहायक नदियों में से एक है। फिलहाल भैंसी नदी अथाह प्रदूषण और अवैध कब्जों के चलते दम तोड़ चुकी है। यह नदी लगभग 15 वर्ष से बिल्कुल सूख चुकी है। भैंसी नदी पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के डंडरौल और शाहजहांपुर की सीमा से लगी करीब 50 वर्ग किमी में फैली भैंसासुर झील से निकलती है। वहां से प्रवाहित होते हुए भैंसी नदी पुवायां के जसवंतपुर के पास लखीमपुर की सीमा में प्रवेश करती है और लखीमपुर के इमलिया घाट के पास गोमती में मिल जाती है।
कभी पुवायां और लखीमपुर की मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के करीब 47 गांवों के लोगों को भैंसी नदी का लाभ मिलता था। नदी के पानी से फसलों की सिंचाई होती थी। कई अप्रत्यक्ष लाभ भी थे लेकिन बाद में नदी के किनारे बने दो कारखानों ने नदी में अपशिष्ट छोड़कर नदी का पानी जलीय जंतुओं के लिए जहर बना दिया और रही सही कसर अवैध कब्जों ने पूरी कर दी। नदी में 15 वर्ष से धार नहीं बह सकी है।
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अवैध खनन करने वालों ने बिगाड़ा नदी का स्वरूप
भैंसी नदी से पुवायां क्षेत्र में कई स्थानों पर रोज रेत और मिट्टी का भारी खनन किया जा रहा है। खनन अधिकारी, प्रशासन और पुलिस कोई भी इस ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझता है। हालत यह हो गई है कि भैंसी नदी में तमाम स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं और भैंसी नदी का स्वरूप ही बिगड़ गया है।
साठा की फसल और भारी जल दोहन भी बना वजह
पुवायां क्षेत्र में तमाम वर्षों तक साठा धान की खेती भारी क्षेत्रफल में की जाती रही। साठा में भारी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए गहरी बोरिंग कराई गई और अंधाधुंध जल दोहन किया गया। इससे नदी के स्रोत सूख गए और बाद में नदी भी सूख गई।
लोकभारती कर रही नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास
जुलाई 2019 में पुवायां के गांव मीरपुर के पास से लोकभारती संस्था ने भैंनदी नदी को पुर्नजीवित करने के अभियान का शुभारंभ किया था। इसके बाद काफी समय तक प्रत्येक रविवार को स्वयंसेवक नदी की सफाई को जुटते रहे। शाहजहांपुर के तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह, मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, एसडीएम, मनरेगा के डिप्टी कमिश्नर आदि ने स्वयं फावड़ा चलाकर भैंसी मुक्ति यज्ञ में भागीदारी की। तमाम प्रयासों के बाद भैंसी में बंडा के गांव कर्रखेड़ा गांव तक पानी भी आया लेकिन अब नदी सूखी पड़ी है।
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करीबन 42 किमी लंबी भैंसी नदी गोमती की सहायक नदियों में से एक है। फिलहाल भैंसी नदी अथाह प्रदूषण और अवैध कब्जों के चलते दम तोड़ चुकी है। यह नदी लगभग 15 वर्ष से बिल्कुल सूख चुकी है। भैंसी नदी पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के डंडरौल और शाहजहांपुर की सीमा से लगी करीब 50 वर्ग किमी में फैली भैंसासुर झील से निकलती है। वहां से प्रवाहित होते हुए भैंसी नदी पुवायां के जसवंतपुर के पास लखीमपुर की सीमा में प्रवेश करती है और लखीमपुर के इमलिया घाट के पास गोमती में मिल जाती है।
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कभी पुवायां और लखीमपुर की मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के करीब 47 गांवों के लोगों को भैंसी नदी का लाभ मिलता था। नदी के पानी से फसलों की सिंचाई होती थी। कई अप्रत्यक्ष लाभ भी थे लेकिन बाद में नदी के किनारे बने दो कारखानों ने नदी में अपशिष्ट छोड़कर नदी का पानी जलीय जंतुओं के लिए जहर बना दिया और रही सही कसर अवैध कब्जों ने पूरी कर दी। नदी में 15 वर्ष से धार नहीं बह सकी है।
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अवैध खनन करने वालों ने बिगाड़ा नदी का स्वरूप
भैंसी नदी से पुवायां क्षेत्र में कई स्थानों पर रोज रेत और मिट्टी का भारी खनन किया जा रहा है। खनन अधिकारी, प्रशासन और पुलिस कोई भी इस ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझता है। हालत यह हो गई है कि भैंसी नदी में तमाम स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं और भैंसी नदी का स्वरूप ही बिगड़ गया है।
साठा की फसल और भारी जल दोहन भी बना वजह
पुवायां क्षेत्र में तमाम वर्षों तक साठा धान की खेती भारी क्षेत्रफल में की जाती रही। साठा में भारी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए गहरी बोरिंग कराई गई और अंधाधुंध जल दोहन किया गया। इससे नदी के स्रोत सूख गए और बाद में नदी भी सूख गई।
लोकभारती कर रही नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास
जुलाई 2019 में पुवायां के गांव मीरपुर के पास से लोकभारती संस्था ने भैंनदी नदी को पुर्नजीवित करने के अभियान का शुभारंभ किया था। इसके बाद काफी समय तक प्रत्येक रविवार को स्वयंसेवक नदी की सफाई को जुटते रहे। शाहजहांपुर के तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह, मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, एसडीएम, मनरेगा के डिप्टी कमिश्नर आदि ने स्वयं फावड़ा चलाकर भैंसी मुक्ति यज्ञ में भागीदारी की। तमाम प्रयासों के बाद भैंसी में बंडा के गांव कर्रखेड़ा गांव तक पानी भी आया लेकिन अब नदी सूखी पड़ी है।

भैंसी नदी में हुआ अवैध खनन- फोटो : POWAYAN