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समितियों के खातेदार करते रहे गुहार.. अधिकारी झूठी बताकर कार्रवाई से करते रहे इनकार
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पुवायां/खुटार। सहकारी समितियों पर किसानों के नाम पर किए गए घोटाले की रकम करोड़ों में पहुंच सकती है। सचिव के निलंबन के बाद अब तमाम ऐसे किसान सामने आ रहे हैं, जिनके नाम पर फर्जीवाड़ा कर लाखों की धनराशि हड़प ली गई। घोटाले में अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही क्योंकि जब इस गोलमाल को उजागर करने के लिए किसान उनके पास शिकायत करने पहुंच तो अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले को दबाने में जुटे रहे। बाद में शिकायत शासन स्तर पर पहुंची तो पूरा घोटाला सामने आ गया। खुटार क्षेत्र में किसान सेवा सहकारी समिति मलिका, साधन सहकारी समिति नरौठा देवीदास और साधन सहकारी समिति पुनौती में विपिन तिवारी के सचिव रहते तमाम किसानों से चेक लेकर उनके नाम से भारी राशि निकालकर हड़प ली गई। मामले की जानकारी होने पर किसानों ने शिकायत की तो सचिव ने कह दिया कि उन्होंने जरूरत के कारण रुपये निकाले हैं, वह सबके खाते में रुपये जमा कर देंगे। इस कारण कुछ किसान चुप बैठ गए।
कुछ किसानों ने मामले की शिकायत शासन स्तर पर की तो जांच टीम का गठन किया गया और प्रथम दृष्ट्या घोटाला सामने आने पर सचिव को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की जांच अभी चल रही है। पूरे मामले में एआर कोऑपरेटिव गणेश शंकर गुप्ता का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर कॉल की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
समिति बंद होने से किसान परेशान
सचिव के निलंबन के बाद पुनौती की साधन सहकारी समिति का कार्यालय और गोदाम बंद पड़ा है। इससे किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। परेशान किसानों ने मामले की जांच जल्द पूरी कर किसी अन्य सचिव की तैनाती कर समिति खुलवाने की मांग की है।
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शिकायतों को ही बता दिया गलत
खुटार के गांव पुनौती खुर्द निवासी किसान खुशविंदर सिंह और उनकी पत्नी देवेंद्र कौर पुनौती समिति की सदस्य हैं। खुशविंदर सिंह से सचिव ने हस्ताक्षर कराने के बाद चेक ले लिया और उनके नाम 80 हजार रुपये निकाल लिए। उनकी पत्नी देवेंद्र कौर के नाम भी 30 हजार रुपये निकाल लिए गए। देवेंद्र कौर की चेक बुक और बैंक पासबुक आज तक वापस ही नहीं की गई है, जिस कारण उनको आशंका है कि उनके खाते से और भी राशि निकाली जा सकती है। कई बार कहने के बाबजूद भी सचिव व मैनेजर टरकाते रहे। खुशविंदर ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो एआर कोऑपरेटिव ने 18 अगस्त 19 को जांच में लिख दिया कि चेक से खुशविंदर के ही हस्ताक्षर से रुपये निकाले गए हैं, शिकायत निराधार है।
जिला सहकारी बैंक के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध
पुवायां। समितियों के सदस्यों को धनराशि जिला सहकारी बैंक से दी जाती है। ऐसे में भारी घोटाले में जिला सहकारी बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। बताया जाता है कि सचिव ने कुछ किसानों के खातों में रकम जमा भी कर दी है, लेकिन इसके बाद भी तमाम किसान अपने नाम से निकाले गए कर्ज को लेकर परेशान घूम रहे हैं। खुशविंदर सिंह ने बैंक जाकर अपने खाते का स्टेटमेंट मांगा तो उनको नहीं दिया गया। बाद में सचिव ने खुशविंदर सिंह की चेक पर ही लिखकर दे दिया कि उन्हें 40 हजार रुपये देने हैं। इसके अलावा गांव टोडरपुर के महेंद्र सिंह से चेक लेकर 90 हजार, हिटौटा के रूपेंद्र सिंह के खाते से एक लाख, मैनिया के कुलवंत सिंह के खाते से 90 हजार रुपये निकाले गए हैं। इस तरह एक ही समिति पर सौ से अधिक किसानों के नाम रुपये निकाल कर एक भारी घोटाला किया गया है।
सचिव विपिन तिवारी उधार रुपये और चेक ले लेता था। इसी भरोसे उन्हें चेक दे दिया था। जिसके बाद पता चला कि वह लोगों से करोड़ों रुपये ठग चुका है। अब घर जाने पर पता चला कि वह घर छोड़कर भाग गया है। - कुलवंत सिंह, गांव मैनियां खुटार
पत्नी के नाम एक एकड़ से भी कम भूमि है फिर भी पता चल रहा है कि एक लाख रुपये का कर्ज पत्नी के नाम पर लिया गया है, जो इतनी कम जमीन पर संभव नहीं है। मेरे नाम पर भी 80 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। - खुशविंदर सिंह, गांव पुनौती खुर्द खुटार
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कुछ किसानों ने मामले की शिकायत शासन स्तर पर की तो जांच टीम का गठन किया गया और प्रथम दृष्ट्या घोटाला सामने आने पर सचिव को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की जांच अभी चल रही है। पूरे मामले में एआर कोऑपरेटिव गणेश शंकर गुप्ता का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर कॉल की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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समिति बंद होने से किसान परेशान
सचिव के निलंबन के बाद पुनौती की साधन सहकारी समिति का कार्यालय और गोदाम बंद पड़ा है। इससे किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। परेशान किसानों ने मामले की जांच जल्द पूरी कर किसी अन्य सचिव की तैनाती कर समिति खुलवाने की मांग की है।
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शिकायतों को ही बता दिया गलत
खुटार के गांव पुनौती खुर्द निवासी किसान खुशविंदर सिंह और उनकी पत्नी देवेंद्र कौर पुनौती समिति की सदस्य हैं। खुशविंदर सिंह से सचिव ने हस्ताक्षर कराने के बाद चेक ले लिया और उनके नाम 80 हजार रुपये निकाल लिए। उनकी पत्नी देवेंद्र कौर के नाम भी 30 हजार रुपये निकाल लिए गए। देवेंद्र कौर की चेक बुक और बैंक पासबुक आज तक वापस ही नहीं की गई है, जिस कारण उनको आशंका है कि उनके खाते से और भी राशि निकाली जा सकती है। कई बार कहने के बाबजूद भी सचिव व मैनेजर टरकाते रहे। खुशविंदर ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो एआर कोऑपरेटिव ने 18 अगस्त 19 को जांच में लिख दिया कि चेक से खुशविंदर के ही हस्ताक्षर से रुपये निकाले गए हैं, शिकायत निराधार है।
जिला सहकारी बैंक के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध
पुवायां। समितियों के सदस्यों को धनराशि जिला सहकारी बैंक से दी जाती है। ऐसे में भारी घोटाले में जिला सहकारी बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। बताया जाता है कि सचिव ने कुछ किसानों के खातों में रकम जमा भी कर दी है, लेकिन इसके बाद भी तमाम किसान अपने नाम से निकाले गए कर्ज को लेकर परेशान घूम रहे हैं। खुशविंदर सिंह ने बैंक जाकर अपने खाते का स्टेटमेंट मांगा तो उनको नहीं दिया गया। बाद में सचिव ने खुशविंदर सिंह की चेक पर ही लिखकर दे दिया कि उन्हें 40 हजार रुपये देने हैं। इसके अलावा गांव टोडरपुर के महेंद्र सिंह से चेक लेकर 90 हजार, हिटौटा के रूपेंद्र सिंह के खाते से एक लाख, मैनिया के कुलवंत सिंह के खाते से 90 हजार रुपये निकाले गए हैं। इस तरह एक ही समिति पर सौ से अधिक किसानों के नाम रुपये निकाल कर एक भारी घोटाला किया गया है।
सचिव विपिन तिवारी उधार रुपये और चेक ले लेता था। इसी भरोसे उन्हें चेक दे दिया था। जिसके बाद पता चला कि वह लोगों से करोड़ों रुपये ठग चुका है। अब घर जाने पर पता चला कि वह घर छोड़कर भाग गया है। - कुलवंत सिंह, गांव मैनियां खुटार
पत्नी के नाम एक एकड़ से भी कम भूमि है फिर भी पता चल रहा है कि एक लाख रुपये का कर्ज पत्नी के नाम पर लिया गया है, जो इतनी कम जमीन पर संभव नहीं है। मेरे नाम पर भी 80 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। - खुशविंदर सिंह, गांव पुनौती खुर्द खुटार