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पहाड़ों पर हुई बारिश से जिले की नदियों में फिर आया उफान
सार
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नरौरा समेत अन्य बैराजों से गंगा, रामगंगा में 74000 क्यूसेक पानी जा रहा है और ड्यूनी डॉम से 2279 क्यूसेक पानी निकलने से गर्रा के जलस्तर में वृद्धि हुई है। फिलहाल, कलान के भैंसार बांध पर गंगा बीते दिन की तुलना में पांच सेमी बढ़कर 142.45 मीटर पर बह रही है। सूखा के कारण ग्रामीणों ने रामगंगा के तट के पास में भी उर्द, मूंग, मूंगफली, मक्का आदि फसलें बोईं, लेकिन अब रामगंगा उफनाने के कारण नारायण नगर पश्चिमी, मंझा, मोहनपुर, हैदलपुर साहनी आदि गांवों के लोगों को फसलें नष्ट होने की काफी चिंता है।पिछले सप्ताह मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ों पर भारी वर्षा होने के कारण बांधों और बैराजों से अतिरिक्त पानी निकालना पड़ा और नदियों का जलस्तर थोड़ा बढ़ा है।
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विस्तार
शाहजहांपुर। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा के कारण बांधों-बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी बढ़ने के साथ ही जिले से होकर बहने वाली नदियों में फिर उफान आ गया है। जलालाबाद व कलान तहसील में गंगा, रामगंगा और शहर के समीप गर्रा नदी अपने तटों से बाहर निकलकर फैलाव लेने लगी हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नरौरा समेत अन्य बैराजों से गंगा, रामगंगा में 74000 क्यूसेक पानी जा रहा है और ड्यूनी डॉम से 2279 क्यूसेक पानी निकलने से गर्रा के जलस्तर में वृद्धि हुई है। नदियों में पानी बढ़ने से तटवर्ती गांवों के ग्रामीण बाढ़ की विपदा को लेकर भयभीत हैं।
दो दिन पहले नरौरा बैराज से गंगा में 25838 क्यूसेक पानी निकला था। यह पानी बीती रात यहां पहुंचा, बीते दिन 63654 क्यूसेक पानी की निकासी होने से गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार मंगलवार को भी नरौरा बैराज से निकल रहे पानी की मात्रा कम नहीं हुई। इसलिए गंगा का जलस्तर बुधवार को बढ़ने के आसार हैं। फिलहाल, कलान के भैंसार बांध पर गंगा बीते दिन की तुलना में पांच सेमी बढ़कर 142.45 मीटर पर बह रही है। उधर, रामनगर, खो, हरेली, किच्छा आदि बांधों-बैराजों से रामगंगा में 9853 क्यूसेक पानी जा रहा है।
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खास बात यह है कि विभाग के अधिकारी बाढ़ की स्थिति से इन्कार कर रहे हैं, लेकिन मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा-रामगंगा के तटवर्ती गांवों के बाशिंदे एकबार फिर भयभीत होने लगे हैं। गंगा के किनारे बसे आजाद नगर, इस्लामनगर, कमथरी, चितार आदि गांवों के लोगों का कहना है कि इससे पहले आई बाढ़ में वह अपना सब कुछ गवां चुके हैं और अब खोने के लिए सिर्फ उनकी जान बची है। ग्रामीण इस बात से भी नाराज हैं कि प्रशासन उन्हें बाढ़ आने की पहले से कोई सूचना नहीं देता है।
रामगंगा में फिर फसलें डूबने की आशंका
परौर। क्षेत्र में रामगंगा में पानी बढ़ने से आसपास के ग्रामीण नदी के किनारे वाले खेतों में खड़ी फसलें बाढ़ में डूबने की आशंका से परेशान हैं। पानी इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि रामगंगा के किनारे पर खड़ी वैकल्पिक फसलों के भी जाने का अंदेशा पैदा हो गया है। सूखा के कारण ग्रामीणों ने रामगंगा के तट के पास में भी उर्द, मूंग, मूंगफली, मक्का आदि फसलें बोईं, लेकिन अब रामगंगा उफनाने के कारण नारायण नगर पश्चिमी, मंझा, मोहनपुर, हैदलपुर साहनी आदि गांवों के लोगों को फसलें नष्ट होने की काफी चिंता है।
पिछले सप्ताह मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ों पर भारी वर्षा होने के कारण बांधों और बैराजों से अतिरिक्त पानी निकालना पड़ा और नदियों का जलस्तर थोड़ा बढ़ा है। सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा को छोड़कर सभी बांधों और बैराजों से पानी निकलने की मात्रा कम हो गई है। फिलहाल सभी नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे हैं और उनमें बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। - सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नरौरा समेत अन्य बैराजों से गंगा, रामगंगा में 74000 क्यूसेक पानी जा रहा है और ड्यूनी डॉम से 2279 क्यूसेक पानी निकलने से गर्रा के जलस्तर में वृद्धि हुई है। नदियों में पानी बढ़ने से तटवर्ती गांवों के ग्रामीण बाढ़ की विपदा को लेकर भयभीत हैं।
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दो दिन पहले नरौरा बैराज से गंगा में 25838 क्यूसेक पानी निकला था। यह पानी बीती रात यहां पहुंचा, बीते दिन 63654 क्यूसेक पानी की निकासी होने से गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार मंगलवार को भी नरौरा बैराज से निकल रहे पानी की मात्रा कम नहीं हुई। इसलिए गंगा का जलस्तर बुधवार को बढ़ने के आसार हैं। फिलहाल, कलान के भैंसार बांध पर गंगा बीते दिन की तुलना में पांच सेमी बढ़कर 142.45 मीटर पर बह रही है। उधर, रामनगर, खो, हरेली, किच्छा आदि बांधों-बैराजों से रामगंगा में 9853 क्यूसेक पानी जा रहा है।
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खास बात यह है कि विभाग के अधिकारी बाढ़ की स्थिति से इन्कार कर रहे हैं, लेकिन मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा-रामगंगा के तटवर्ती गांवों के बाशिंदे एकबार फिर भयभीत होने लगे हैं। गंगा के किनारे बसे आजाद नगर, इस्लामनगर, कमथरी, चितार आदि गांवों के लोगों का कहना है कि इससे पहले आई बाढ़ में वह अपना सब कुछ गवां चुके हैं और अब खोने के लिए सिर्फ उनकी जान बची है। ग्रामीण इस बात से भी नाराज हैं कि प्रशासन उन्हें बाढ़ आने की पहले से कोई सूचना नहीं देता है।
रामगंगा में फिर फसलें डूबने की आशंका
परौर। क्षेत्र में रामगंगा में पानी बढ़ने से आसपास के ग्रामीण नदी के किनारे वाले खेतों में खड़ी फसलें बाढ़ में डूबने की आशंका से परेशान हैं। पानी इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि रामगंगा के किनारे पर खड़ी वैकल्पिक फसलों के भी जाने का अंदेशा पैदा हो गया है। सूखा के कारण ग्रामीणों ने रामगंगा के तट के पास में भी उर्द, मूंग, मूंगफली, मक्का आदि फसलें बोईं, लेकिन अब रामगंगा उफनाने के कारण नारायण नगर पश्चिमी, मंझा, मोहनपुर, हैदलपुर साहनी आदि गांवों के लोगों को फसलें नष्ट होने की काफी चिंता है।
पिछले सप्ताह मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ों पर भारी वर्षा होने के कारण बांधों और बैराजों से अतिरिक्त पानी निकालना पड़ा और नदियों का जलस्तर थोड़ा बढ़ा है। सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा को छोड़कर सभी बांधों और बैराजों से पानी निकलने की मात्रा कम हो गई है। फिलहाल सभी नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे हैं और उनमें बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। - सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग