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दोनों हाथ से दिव्यांग अरविंद को मिला उर्वरक बिक्री लाइसेंस
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दिव्यांग अरविंद सिंह
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। अगर किसी काम के प्रति मन में सच्ची लगन और खुद पर भरोसा हो तो तमाम मुश्किलों के बीच भी राहें आसान हो जाती हैं। तिलहर क्षेत्र के गांव हरभानपुर निवासी युवा अरविंद सिंह राजपूत ऐसे ही जज्बे के धनी हैं। पांच वर्ष पहले एक ट्रेन दुर्घटना में दोनों हाथ गंवाने के बाद अरविंद को कुछ समय के लिए अपना भविष्य अंधकारमय दिखा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कृषि विषय से बीएससी की पढ़ाई पूरी कर ली। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक ने भी उनके हौसले को बढ़ाते हुए उनके आवेदन पर उर्वरक बिक्री लाइसेंस स्वीकृत कर दिया।
तीन भाई और दो बहनों में दूसरे नंबर के अरविंद के साथ वर्ष 2016 में ट्रेन हादसा हुआ, उस वक्त वह 20 वर्ष के थे और इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे थे। तिलहर में रेलवे क्रॉसिंग पार करते वक्त वह ट्रेन की चपेट में आ गए। किसी तरह उनके जीवन की रक्षा हो सकी, लेकिन उन्हें कंधों से दोनों हाथ गंवाने पड़ गए। पिता छोटे लाल सिंह राजपूत समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी हिम्मत बंधाई। घर वालों के स्नेहपूर्ण सहयोग के बूते वह फिर से आगे की पढ़ाई में जुट गए। इंटरमीडिएट पास करने के बाद अरविंद ने बीएससी करने की ठानी। कानपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत फर्रुखाबाद के दद्दू जी महाविद्यालय से कृषि स्नातक में प्रवेश लेने पर नोट्स बनाने की समस्या आई तो उन्होंने पैरों से कलम पकड़कर लिखने का अभ्यास किया। उन्हें यह कोशिश करते देख सहपाठी उनके नोट्स बनाने में मदद करने लगे। बाद में अच्छे नंबर से परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
जीवन यापन के लिए उन्होंने उर्वरक बिक्री प्रतिष्ठान खोलने की योजना बनाई, क्योंकि इसके लिए वह निर्धारित शैक्षिक अहर्ता हासिल कर चुके थे। उर्वरक बिक्री लाइसेंस आवेदन के लिए उन्होंने अपना शपथ पत्र बनवाया, लेकिन उस पर हस्ताक्षर अपने पिता से कराए। बाद में अरविंद अपने पिता को साथ लेकर कृषि कार्यालय पहुंचे तो उनके हौसले को देख जिला कृषि अधिकारी भी बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने आवेदन लेकर तत्काल लाइसेंस स्वीकृत कर दिया।
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अरविंद सिंह बहुत होनहार युवा हैं और उनके जज्बे से हर युवा को सीख लेनी चाहिए। वह लाइसेंस के लिए मेरे पास आए और अपनी कहानी सुनाकर भावुक हो उठे। उनका उर्वरक बिक्री लाइसेंस स्वीकृत कर दिया गया है। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
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तीन भाई और दो बहनों में दूसरे नंबर के अरविंद के साथ वर्ष 2016 में ट्रेन हादसा हुआ, उस वक्त वह 20 वर्ष के थे और इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे थे। तिलहर में रेलवे क्रॉसिंग पार करते वक्त वह ट्रेन की चपेट में आ गए। किसी तरह उनके जीवन की रक्षा हो सकी, लेकिन उन्हें कंधों से दोनों हाथ गंवाने पड़ गए। पिता छोटे लाल सिंह राजपूत समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी हिम्मत बंधाई। घर वालों के स्नेहपूर्ण सहयोग के बूते वह फिर से आगे की पढ़ाई में जुट गए। इंटरमीडिएट पास करने के बाद अरविंद ने बीएससी करने की ठानी। कानपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत फर्रुखाबाद के दद्दू जी महाविद्यालय से कृषि स्नातक में प्रवेश लेने पर नोट्स बनाने की समस्या आई तो उन्होंने पैरों से कलम पकड़कर लिखने का अभ्यास किया। उन्हें यह कोशिश करते देख सहपाठी उनके नोट्स बनाने में मदद करने लगे। बाद में अच्छे नंबर से परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
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जीवन यापन के लिए उन्होंने उर्वरक बिक्री प्रतिष्ठान खोलने की योजना बनाई, क्योंकि इसके लिए वह निर्धारित शैक्षिक अहर्ता हासिल कर चुके थे। उर्वरक बिक्री लाइसेंस आवेदन के लिए उन्होंने अपना शपथ पत्र बनवाया, लेकिन उस पर हस्ताक्षर अपने पिता से कराए। बाद में अरविंद अपने पिता को साथ लेकर कृषि कार्यालय पहुंचे तो उनके हौसले को देख जिला कृषि अधिकारी भी बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने आवेदन लेकर तत्काल लाइसेंस स्वीकृत कर दिया।
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अरविंद सिंह बहुत होनहार युवा हैं और उनके जज्बे से हर युवा को सीख लेनी चाहिए। वह लाइसेंस के लिए मेरे पास आए और अपनी कहानी सुनाकर भावुक हो उठे। उनका उर्वरक बिक्री लाइसेंस स्वीकृत कर दिया गया है। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी