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डीआईओएस ने किया स्कूल प्रबंधक को तलब
शाहजहांपुर
Updated Fri, 10 Apr 2015 08:36 PM IST
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बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में वित्तविहीन कॉलेजों के शिक्षकों की मनमानी से त्रस्त डीआईओएस ने आखिर कार्रवाई शुरू कर ही दी। पहले दिन डॉ. सुदामा प्रसाद बाल विद्या मंदिर कन्या इंटर कॉलेज फंसा। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से इस कॉलेज के आठ शिक्षकों को इंटर का मूल्यांकन करने के लिए नियुक्त किया था, लेकिन एक भी शिक्षक नहीं पहुंचा। इसे घोर लापरवाही मानते हुए प्रबंधक को डीआईओएस ने अपने कार्यालय में 11 अप्रैल को अपराह्न दो बजे स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है। प्रबंधक को स्कूल की मान्यता प्रत्याहरण अथवा कोई अन्य विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
डीआईओएस राकेश कुमार ने बताया कि उक्त कॉलेज से आभा श्रीवास्तव, डॉ. राखी मिश्रा, शिखा दीक्षित, संतोष श्रीवास्तव, राम औतार शर्मा, संध्या शर्मा, शिखा त्रिपाठी और फरहत आरा मलिक को इंटर के मूल्यांकन के लिए नियुक्त किया था। मूल्यांकन कार्य 30 मार्च से चल रहा है।
डीआईओएस ने नोटिस में कहा है कि वह लिखित रूप से स्पष्ट करें कि क्यों न इस कृत्य के लिए उत्तरदायी मानते हुए संस्था की विभागीय मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति कर दी जाए, अन्यथा कोई अन्य विधिक कार्रवाई कराई जाए।
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इंटर के मूल्यांकन में विलंब के लिए बोर्ड भी दोषी
शाहजहांपुर। यूपी बोर्ड भी मूल्यांकन कार्य के पिछड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा। राजकीय इंटर कॉलेज केंद्र पर हर बार एक से डेढ़ लाख तक उत्तर पुस्तिकाएं आवंटित की जाती रही हैं, लेकिन इस बार केंद्र पर चार लाख से अधिक कापियां भेज दी गईं, जिसमें करीब साढ़े तीन लाख कापी उपलब्ध भी कराई जा चुकी है। ऐसे में मूल्यांकन प्रभावित होना लाजिमी है।
हाईस्कूल के मूल्यांकन के लिए जिले में इस्लामिया इंटर कॉलेज और एबी रिच इंटर कॉलेज को केंद्र बनाया गया है और दोनों केंद्रों पर करीब ढाई लाख उत्तर पुस्तिकाएं ही भेजी गई हैं, जिस कारण बहिष्कार के बावजूद इन केंद्रों पर 40 फीसदी मूल्यांकन पूरा हो चुका है, जबकि इसी अवधि में जीआईसी में अभी तक इंटर का मात्र 28 फीसदी मूल्यांकन ही हो सका है।
हाईस्कूल मूल्यांकन केंद्रों पर जहां सौ से डेढ़ सौ तक शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहीं इंटर के मूल्यांकन केंद्र पर लगभग 500 शिक्षकों की कमी है। इंटर के मूल्यांकन में 886 परीक्षकों की तैनाती थी, जिसमें से 380 शिक्षक ही मूल्यांकन कर रहे हैं।
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डीआईओएस राकेश कुमार ने बताया कि उक्त कॉलेज से आभा श्रीवास्तव, डॉ. राखी मिश्रा, शिखा दीक्षित, संतोष श्रीवास्तव, राम औतार शर्मा, संध्या शर्मा, शिखा त्रिपाठी और फरहत आरा मलिक को इंटर के मूल्यांकन के लिए नियुक्त किया था। मूल्यांकन कार्य 30 मार्च से चल रहा है।
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डीआईओएस ने नोटिस में कहा है कि वह लिखित रूप से स्पष्ट करें कि क्यों न इस कृत्य के लिए उत्तरदायी मानते हुए संस्था की विभागीय मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति कर दी जाए, अन्यथा कोई अन्य विधिक कार्रवाई कराई जाए।
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इंटर के मूल्यांकन में विलंब के लिए बोर्ड भी दोषी
शाहजहांपुर। यूपी बोर्ड भी मूल्यांकन कार्य के पिछड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा। राजकीय इंटर कॉलेज केंद्र पर हर बार एक से डेढ़ लाख तक उत्तर पुस्तिकाएं आवंटित की जाती रही हैं, लेकिन इस बार केंद्र पर चार लाख से अधिक कापियां भेज दी गईं, जिसमें करीब साढ़े तीन लाख कापी उपलब्ध भी कराई जा चुकी है। ऐसे में मूल्यांकन प्रभावित होना लाजिमी है।
हाईस्कूल के मूल्यांकन के लिए जिले में इस्लामिया इंटर कॉलेज और एबी रिच इंटर कॉलेज को केंद्र बनाया गया है और दोनों केंद्रों पर करीब ढाई लाख उत्तर पुस्तिकाएं ही भेजी गई हैं, जिस कारण बहिष्कार के बावजूद इन केंद्रों पर 40 फीसदी मूल्यांकन पूरा हो चुका है, जबकि इसी अवधि में जीआईसी में अभी तक इंटर का मात्र 28 फीसदी मूल्यांकन ही हो सका है।
हाईस्कूल मूल्यांकन केंद्रों पर जहां सौ से डेढ़ सौ तक शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहीं इंटर के मूल्यांकन केंद्र पर लगभग 500 शिक्षकों की कमी है। इंटर के मूल्यांकन में 886 परीक्षकों की तैनाती थी, जिसमें से 380 शिक्षक ही मूल्यांकन कर रहे हैं।