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भाजपा नेता मनोज कश्यप की मौत
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जलालाबाद। जिले में बुखार बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। जलालाबाद के रहने वाले भाजपा नेता मनोज कश्यप को पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा था। मगर उन्होंने किसी तरह की जांच नहीं कराई। जबकि डॉक्टर ने उन्हें कोरोना संक्रमण की जांच कराने कहा था। सोमवार की रात उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी और उन्हें बचाया न जा सका। उनका अंतिम संस्कार कोविड 19 की गाइडलाइन के अनुसार ही किया गया।
करीब 46 वर्षीय मनोज कश्यप की भाजपा के तेज तर्रार नेताओं में गिनती थी। वह भाजपा बृज क्षेत्र के उपाध्यक्ष रह चुके थे। पिछले कुछ दिनों से उन पर भाजपा बूथ अध्यक्ष सत्यापन अधिकारी की जिम्मेदारी थी। पत्नी सरोज कश्यप के मुताबिक मनोज कश्यप को पिछले 12 दिनों से बुखार आ रहा था। वह घर में रहकर प्राइवेट डॉक्टर से इलाज करा रहे थे। 26 अगस्त को बरेली में हुई बैठक से लौटने के बाद उन्हें बुखार आया था। तीन दिन पहले उन्होंने सीएमओ को फोन किया था। सीएमओ के निर्देश पर मनोज को देखने के लिए उनके घर सीएचसी से डॉ. रूपक गए थे। उन्होंने कोरोना जांच कराने को कहा था, लेकिन जांच नहीं कराई गई। डॉ. रुपक दवा देने के बाद चले गए। हालांकि दवा से मनोज को कोई फायदा नहीं हुआ। मंगलवार अपराह्न करीब तीन बजे कोविड 19 की गाइडलाइन के अनुसार एंबुलेंस में मनोज कश्यप का पार्थिव शरीर जलालाबाद उनके घर लाया गया। साथ में पीपीई किट पहने हुए स्वास्थ्य कर्मचारी भी थे। वहां पहले से लोगों की भीड़ जमा थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने परिजन और नजदीकी लोगों केे दूर से मनोज के अंतिम दर्शन कराए गए। फिर उसी एंबुलेंस में रामगंगा ढाईघाट ले जाया गया। उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एसडीएम सौरभ भट्ट, सीओ ब्रह्मपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
तीन दिन पहले मनोज कश्यप की सीएमओ से फोन पर हुई थी। मेरे पास सीएमओ ऑफिस से फोन आया था। इसके बाद मनोज कश्यप के घर डॉ. रूपक गुप्ता को भेजा गया। उन्होंने मनोज को हो रही दिक्कतों के अनुरूप दवा दिलवाई थी। सोमवार रात उन्हें सीएचसी लाया गया तो उनकी मौत हो चुकी थी। - डॉ ओमेंद्र राठौर, चिकित्साधीक्षक, जलालाबाद
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भाजपा नेता बुखार से पीड़ित थे। चूंकि उनकी कोरोना जांच नहीं हो सकी थी, इसलिए संदिग्ध परिस्थितियों में मौत पर एहतियात बरतते हुए शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही उनका अंतिम संस्कार कराया गया, ताकि अन्य लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
- डॉ. एयूपी सिन्हा, सीएमएस
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करीब 46 वर्षीय मनोज कश्यप की भाजपा के तेज तर्रार नेताओं में गिनती थी। वह भाजपा बृज क्षेत्र के उपाध्यक्ष रह चुके थे। पिछले कुछ दिनों से उन पर भाजपा बूथ अध्यक्ष सत्यापन अधिकारी की जिम्मेदारी थी। पत्नी सरोज कश्यप के मुताबिक मनोज कश्यप को पिछले 12 दिनों से बुखार आ रहा था। वह घर में रहकर प्राइवेट डॉक्टर से इलाज करा रहे थे। 26 अगस्त को बरेली में हुई बैठक से लौटने के बाद उन्हें बुखार आया था। तीन दिन पहले उन्होंने सीएमओ को फोन किया था। सीएमओ के निर्देश पर मनोज को देखने के लिए उनके घर सीएचसी से डॉ. रूपक गए थे। उन्होंने कोरोना जांच कराने को कहा था, लेकिन जांच नहीं कराई गई। डॉ. रुपक दवा देने के बाद चले गए। हालांकि दवा से मनोज को कोई फायदा नहीं हुआ। मंगलवार अपराह्न करीब तीन बजे कोविड 19 की गाइडलाइन के अनुसार एंबुलेंस में मनोज कश्यप का पार्थिव शरीर जलालाबाद उनके घर लाया गया। साथ में पीपीई किट पहने हुए स्वास्थ्य कर्मचारी भी थे। वहां पहले से लोगों की भीड़ जमा थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने परिजन और नजदीकी लोगों केे दूर से मनोज के अंतिम दर्शन कराए गए। फिर उसी एंबुलेंस में रामगंगा ढाईघाट ले जाया गया। उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एसडीएम सौरभ भट्ट, सीओ ब्रह्मपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
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तीन दिन पहले मनोज कश्यप की सीएमओ से फोन पर हुई थी। मेरे पास सीएमओ ऑफिस से फोन आया था। इसके बाद मनोज कश्यप के घर डॉ. रूपक गुप्ता को भेजा गया। उन्होंने मनोज को हो रही दिक्कतों के अनुरूप दवा दिलवाई थी। सोमवार रात उन्हें सीएचसी लाया गया तो उनकी मौत हो चुकी थी। - डॉ ओमेंद्र राठौर, चिकित्साधीक्षक, जलालाबाद
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भाजपा नेता बुखार से पीड़ित थे। चूंकि उनकी कोरोना जांच नहीं हो सकी थी, इसलिए संदिग्ध परिस्थितियों में मौत पर एहतियात बरतते हुए शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही उनका अंतिम संस्कार कराया गया, ताकि अन्य लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
- डॉ. एयूपी सिन्हा, सीएमएस