{"_id":"5e2b3d758ebc3e4b37680cd8","slug":"dablapment-shahjahanpur-news-bly3933339185","type":"story","status":"publish","title_hn":"दृष्टिबाधित नन्ही देवी.. और दिखता सिस्टम को नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दृष्टिबाधित नन्ही देवी.. और दिखता सिस्टम को नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। भूख से बेहाल बच्चे तो नहीं रोए, मगर घर का चूल्हा मुफलिसी की चुगलियां खाने लगा। किसी शायर का ये लाइनें शहर से सटे भावलखेड़ा क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली दृष्टिबाधित नन्ही देवी के ऊपर सटीक बैठती हैं। कहने को तो नन्ही देवी जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं, लेकिन सही मायने में देखा जाए तो हमारा पूरा सिस्टम ही अंधा हो चुका है, तभी तो उसे नन्ही देवी जैसे लोग दिखाई नहीं पड़ते। यही वजह है कि नन्हीं देवी ने तो अब अपने भाग्य को भी कोसना बंद कर दिया है।
दृष्टिबाधित नन्ही देवी के तीन बच्चे भी हैं। गरीबी मेें उनके पति अक्सर बीमार रहते और बच्चे भूख से बिलबिलाने के अलावा कुछ कर नहीं पाते। भूमिहीन होने के बाद भी नन्ही देवी भ्रष्टतंत्र के आगे बेबस हैं। वह एक नहीं, कई बार राशन कार्ड के लिए आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन मजाल है कि उनका राशनकार्ड बनवा दिया जाता। इतना ही नहीं, सरकार की अन्य योजनाओं से भी उनका दूर-दूर तक नाता नहीं है, तभी तो उन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं दिलाया जा सका। सरकारें बदलती रहीं लेकिन नन्ही देवी का नसीब नहीं बदला। घर के नाम पर उसके पास एक ऐसी जीर्ण-शीर्ण झोंपड़ी है, जिसमें दरवाजा भी नहीं है। खुले आसमान के नीचे चूल्हा उसकी मुफलिसी की कहानी बयां करने को काफी है। तीन बच्चों और पति समेत वह अपने पेट की आग कैसे शांत करती होगी, जब उसका चूल्हा ही ठंडा रहता है। संवेदनशीलता की आंखों से उसकी गरीबी को देखा तो जा सकता है, लेकिन ऐसा चश्मा शायद अब लोगों ने लगाना छोड़ दिया है।
विकास खंड ददरौल की ग्राम पंचायत कुतुबापुर निवासी नन्ही देवी ने पति के साथ विकासखंड ददरौल में लगे मेगा कैंप में दिव्यांग पेंशन योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक स्वीकृत नहीं हुई है। राशन कार्ड बनवाने के लिए छह माह पहले पति के साथ तहसील जाकर आवेदन किया, लेकिन अब तक बनकर नहीं आया। अचरज की बात यह है कि जिन व्यक्तियों को राशन की जरूरत ही नहीं है। उन्हें अंत्योदय पात्रता सूची में रखकर राशन दिया जा रहा है। इसके अलावा ही वह आवास, पेंशन, शौचालय जैसी गरीबों के लिए चलाई गई तमाम योजनाओं में आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन उसकी बारी आज तक नहीं आई। बीमार रहने के बावजूद पति रामू मजदूरी कर परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटा पाते हैं।
विज्ञापन
नन्ही देवी की दयनीय दशा के बारे में जानकारी नहीं है। इस मामले को दिखाया जाएगा। पात्रता की सूची के हिसाब से नन्ही देवी को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
- गोविंद बल्लभ पाठक, खंड विकास अधिकारी ददरौल
किसी भी योजना की पात्रता तय करने का दायित्व ग्राम प्रधान और सचिव का होता है। नन्ही देवी के मामले में जांच कराई जाएगी और जिस योजना में महिला को पात्र पाया जाएगा। उसके अनुरूप सहायता दी जाएगी।
- वेद सिंह चौहान, एसडीएम सदर
विज्ञापन
दृष्टिबाधित नन्ही देवी के तीन बच्चे भी हैं। गरीबी मेें उनके पति अक्सर बीमार रहते और बच्चे भूख से बिलबिलाने के अलावा कुछ कर नहीं पाते। भूमिहीन होने के बाद भी नन्ही देवी भ्रष्टतंत्र के आगे बेबस हैं। वह एक नहीं, कई बार राशन कार्ड के लिए आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन मजाल है कि उनका राशनकार्ड बनवा दिया जाता। इतना ही नहीं, सरकार की अन्य योजनाओं से भी उनका दूर-दूर तक नाता नहीं है, तभी तो उन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं दिलाया जा सका। सरकारें बदलती रहीं लेकिन नन्ही देवी का नसीब नहीं बदला। घर के नाम पर उसके पास एक ऐसी जीर्ण-शीर्ण झोंपड़ी है, जिसमें दरवाजा भी नहीं है। खुले आसमान के नीचे चूल्हा उसकी मुफलिसी की कहानी बयां करने को काफी है। तीन बच्चों और पति समेत वह अपने पेट की आग कैसे शांत करती होगी, जब उसका चूल्हा ही ठंडा रहता है। संवेदनशीलता की आंखों से उसकी गरीबी को देखा तो जा सकता है, लेकिन ऐसा चश्मा शायद अब लोगों ने लगाना छोड़ दिया है।
विज्ञापन
विकास खंड ददरौल की ग्राम पंचायत कुतुबापुर निवासी नन्ही देवी ने पति के साथ विकासखंड ददरौल में लगे मेगा कैंप में दिव्यांग पेंशन योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक स्वीकृत नहीं हुई है। राशन कार्ड बनवाने के लिए छह माह पहले पति के साथ तहसील जाकर आवेदन किया, लेकिन अब तक बनकर नहीं आया। अचरज की बात यह है कि जिन व्यक्तियों को राशन की जरूरत ही नहीं है। उन्हें अंत्योदय पात्रता सूची में रखकर राशन दिया जा रहा है। इसके अलावा ही वह आवास, पेंशन, शौचालय जैसी गरीबों के लिए चलाई गई तमाम योजनाओं में आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन उसकी बारी आज तक नहीं आई। बीमार रहने के बावजूद पति रामू मजदूरी कर परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटा पाते हैं।
विज्ञापन
नन्ही देवी की दयनीय दशा के बारे में जानकारी नहीं है। इस मामले को दिखाया जाएगा। पात्रता की सूची के हिसाब से नन्ही देवी को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
- गोविंद बल्लभ पाठक, खंड विकास अधिकारी ददरौल
किसी भी योजना की पात्रता तय करने का दायित्व ग्राम प्रधान और सचिव का होता है। नन्ही देवी के मामले में जांच कराई जाएगी और जिस योजना में महिला को पात्र पाया जाएगा। उसके अनुरूप सहायता दी जाएगी।
- वेद सिंह चौहान, एसडीएम सदर