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अमीर और गरीब परिवार के बीच अंतर को समझा गया नाटक ये सिस्टम है भाई..
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शाहजहांपुर के गांधी भवन में ये सिस्टम है भाई...नाटक का मंचन करते नाट्य कला समिति कलाकार । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। अभियंता दिवस पर टैलेंट मेकर नाट्य कला समिति की ओर से नाटक ये सिस्टम है भाई... का मंचन गांधी भवन प्रेक्षागृह में किया गया। लेखक व निर्देशक हंसराज विकल के निर्देशन में सफल मंचन हुआ।
नाटक में दो अलग-अलग परिवारों की जीवन शैली को दिखाया गया। एक परिवार राजनीति से जुड़ा है, जिसके राजसी ठाठ-बाट हैं। एक दिन अचानक राजनीतिक परिवार के मुखिया की मौत हो जाती है। उसके बाद उसकी राजगद्दी को उसके इकलौते बेटे को सौंप दिया जाता है। वहीं दूसरे परिवार का मुखिया एक फैक्ट्री में नौकरी करता है। कार्यकाल के समय ही मुखिया की मौत हो जाती है। फिर शुरू होता है उनके परिवार में आर्थिक तंगी भरे संघर्ष का दौर, जिससे पूरा परिवार हताश और निराश हो जाता है। बेटे की नौकरी की आस में पूरा परिवार दर-दर भटकता है और अंत में उनकी सारी उम्मीदें टूट जाती हैं। नाटक के भावपूर्ण मंचन के लिए कलाकारों को खूब सराहना मिली।
ये लोग रहे नाटक के सूत्रधार
नाटक में मंच पर सूत्रधार दयानंद शर्मा-हंसराज विकल, रामकुमार सक्सेना-अनिल कुमार, विमला सक्सेना-राधा, अनूप सक्सेना-शुभम वर्मा, आरती सक्सेना-श्रेष्ठी कुमारी, निशा सक्सेना-इशिका श्रीवास्तव, रिंकी सक्सेना-सीता, भगवान दास तिवारी (मंत्री)-सुहेल मोहम्मद, शकुंतला तिवारी-सोनम शुक्ला, धनराज तिवारी-अभिषेक, मोहन (नौकर)-राज, महेंद्र सिंह-वरूण गुप्ता, प्रकाश श्रीवास्तव-संदीप आर्य, जयपाल यादव-ऐश्वर्य अवस्थी, सूरजपाल सागर-आमोद कुमार, अधिकारी-भावना सिंह, फैक्ट्री नेता (एक)-अरशद आजाद, फैक्ट्री नेता (दो)-सुमित सक्सेना, सहयोगी नेता-इंद्रजीत सक्सेना ने अपनी-अपनी भूमिका का बखूबी निर्वाह किया। मंच ने परेविजय राज, भावना सिंह, आशीष शर्मा, प्रेमशंकर राना, संदीप आर्य, विजय राना, राज ने कार्य किया।
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ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजकुमार पिथौरिया, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में अधिशासी अभियंता राजेश चौधरी, विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक अभियंता अजय कुमार तथा सहायक अभियंता केपी मिश्रा रहे। संचालन कवि इंदु अजनबी ने किया।
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नाटक में दो अलग-अलग परिवारों की जीवन शैली को दिखाया गया। एक परिवार राजनीति से जुड़ा है, जिसके राजसी ठाठ-बाट हैं। एक दिन अचानक राजनीतिक परिवार के मुखिया की मौत हो जाती है। उसके बाद उसकी राजगद्दी को उसके इकलौते बेटे को सौंप दिया जाता है। वहीं दूसरे परिवार का मुखिया एक फैक्ट्री में नौकरी करता है। कार्यकाल के समय ही मुखिया की मौत हो जाती है। फिर शुरू होता है उनके परिवार में आर्थिक तंगी भरे संघर्ष का दौर, जिससे पूरा परिवार हताश और निराश हो जाता है। बेटे की नौकरी की आस में पूरा परिवार दर-दर भटकता है और अंत में उनकी सारी उम्मीदें टूट जाती हैं। नाटक के भावपूर्ण मंचन के लिए कलाकारों को खूब सराहना मिली।
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ये लोग रहे नाटक के सूत्रधार
नाटक में मंच पर सूत्रधार दयानंद शर्मा-हंसराज विकल, रामकुमार सक्सेना-अनिल कुमार, विमला सक्सेना-राधा, अनूप सक्सेना-शुभम वर्मा, आरती सक्सेना-श्रेष्ठी कुमारी, निशा सक्सेना-इशिका श्रीवास्तव, रिंकी सक्सेना-सीता, भगवान दास तिवारी (मंत्री)-सुहेल मोहम्मद, शकुंतला तिवारी-सोनम शुक्ला, धनराज तिवारी-अभिषेक, मोहन (नौकर)-राज, महेंद्र सिंह-वरूण गुप्ता, प्रकाश श्रीवास्तव-संदीप आर्य, जयपाल यादव-ऐश्वर्य अवस्थी, सूरजपाल सागर-आमोद कुमार, अधिकारी-भावना सिंह, फैक्ट्री नेता (एक)-अरशद आजाद, फैक्ट्री नेता (दो)-सुमित सक्सेना, सहयोगी नेता-इंद्रजीत सक्सेना ने अपनी-अपनी भूमिका का बखूबी निर्वाह किया। मंच ने परेविजय राज, भावना सिंह, आशीष शर्मा, प्रेमशंकर राना, संदीप आर्य, विजय राना, राज ने कार्य किया।
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ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजकुमार पिथौरिया, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में अधिशासी अभियंता राजेश चौधरी, विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक अभियंता अजय कुमार तथा सहायक अभियंता केपी मिश्रा रहे। संचालन कवि इंदु अजनबी ने किया।