{"_id":"5ea8f5bf5527df650325f47721cc6568","slug":"try-raping-minor-in-hospital-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाबालिग से रेप की कोशिश अस्पताल में ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नाबालिग से रेप की कोशिश अस्पताल में
शाहजहांपुर।
Updated Thu, 05 Nov 2015 08:21 PM IST
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जिला अस्पताल में दूसरी मंजिल पर सुनसान गैलरी में बृहस्पतिवार की दोपहर 17 वर्षीय किशोर ने चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 10 वर्षीय बालिका के साथ रेप की कोशिश की। किशोरी के शोर मचाने पर उसकी मां पहुंच गई। उसके विरोध करने पर आरोपी लड़के ने बालिका की मां के थप्पड़ मार दिया। शोर-शराबे को सुनकर मौके पर भीड़ इकट्ठी हो गई। लोगों ने आरोपी को पकड़कर उसकी धुनाई कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस आरोपी को कोतवाली ले आई। बालिका की मां की तहरीर पर पुलिस ने छेड़खानी और पाक्सो की एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
थाना निगोही क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली बालिका की मां ने कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि उसके खुदागंज क्षेत्र के गांव में रहने वाले ननदोई जिला अस्पताल में दूसरी मंजिल पर मेडिकल वार्ड में भर्ती हैं। वह उनकी देखभाल कर रही हैं। बुधवार को उनके पास देखभाल के लिए कोई नहीं था, तो उन्होंने अपनी दस साल की बेटी को अस्पताल में छोड़ दिया। पड़ोस के बेड पर हरदोई के पिहानी क्षेत्र के गांव का एक मरीज भर्ती है। मरीज का 17 वर्षीय पोता तीमारदारी के लिए अस्पताल में रुका हुआ था। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे किशोर उनकी बेटी को टॉफी दिलाने के बहाने दूसरी मंजिल पर सुनसान गैलरी में ले गया और रेप की कोशिश की। बालिका के शोर मचाने पर उसकी मां मौके पर पहुंच गई। उसके विरोध करने पर किशोर ने उसे थप्पड़ मारा। इतने में शोर-शराबा सुनकर मौके पर भीड़ इकट्ठी हो गई। लोगों ने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। सूचना मिलने पर अस्पताल चौकी की पुलिस मौके पर पहुंच गई और कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस आरोपी को पकड़कर थाने ले आई। बालिका की मां की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ धारा 354 ए और 7/8 पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में पता चला है कि वह पढ़ाई-लिखाई नहीं करता, बल्कि आवारगी मिजाज का है। बालिका का मेडिकल परीक्षण शुरू कराने के साथ ही पास्को एक्ट के तहत सभी विधिक कार्यवाही पुलिस-प्रशासनिक स्तर पर शुरू करा दी गई हैं।
अस्पताल में भर्ती मरीजों से मिलने दिनभर तीमारदारों की भीड़ लगी रहती है। शासन स्तर पर अस्पताल में सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की मांग की जा चुकी है। सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी डिमांड भेजी गई है, लेकिन वह स्वीकृत नहीं हुई। बालिका के साथ हुई घटना शर्मनाक है। फिर से सुरक्षा की मांग की जाएगी।
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- डॉ. केशव स्वामी, सीएमएस जिला अस्पताल
- बालिका की मां की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। अस्पताल चौकी में सुरक्षा की दृष्टि से फोर्स बढ़ा दी गई है। विशेषकर महिला पुलिस और होमगार्ड अस्पताल में निगरानी करेंगे।
- डॉ. कृष्ण गोपाल यादव, सीओ सिटी
अस्पताल में सुरक्षित नहीं महिलाएं
शाहजहांपुर। जिला अस्पताल में सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी बनाई गई है, लेकिन वहां तैनात पुलिस एंबुलेंस चालकों और लोगों से उगाही में लगी रहती है। अस्पताल की सुरक्षा रामभरोसे है।
जिला अस्पताल दूसरी मंजिल तक वार्ड हैं। तीसरी मंजिल में डीवीडी वार्ड और मेडिकल वार्ड है। उसके सामने और गैलरी का हिस्सा अक्सर सुनसान ही रहता है। अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर महिला अस्पताल बना हुआ है। वहां महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी नहीं रहती। रात में अक्सर गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराने के लेकर महिला स्टाफ से नोकझोंक होती रहती है। कुछ माह पहले इलाज में लापरवाही से प्रसूता की मौत के मामले में अस्पताल में काफी हंगामा हुआ था। इसके बाद महिला पुलिस तैनात की गई थी, लेकिन मामला ठंडा होने के बाद महिला पुलिस को हटा दिया गया। अस्पताल में पूरी रात लोगों की आवाजाही रहती है। इन पर ध्यान देने के लिए सिक्योरिटी का इंतजाम नहीं है। इससे पहले एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने महिला अस्पताल में भर्ती एक महिला से छेड़खानी का प्रयास किया था। पुलिस ने इस मामले को रफादफा कर दिया था। अस्पताल में पुलिस कर्मी एंबुलेंस चालकों और इधर-उधर उगाही करते रहते हैं। अस्पताल में कोई पुलिस कर्मी राउंड नहीं लगाता है। किसी घटना के बाद ही पुलिस अस्पताल में पहुंचती है।
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थाना निगोही क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली बालिका की मां ने कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि उसके खुदागंज क्षेत्र के गांव में रहने वाले ननदोई जिला अस्पताल में दूसरी मंजिल पर मेडिकल वार्ड में भर्ती हैं। वह उनकी देखभाल कर रही हैं। बुधवार को उनके पास देखभाल के लिए कोई नहीं था, तो उन्होंने अपनी दस साल की बेटी को अस्पताल में छोड़ दिया। पड़ोस के बेड पर हरदोई के पिहानी क्षेत्र के गांव का एक मरीज भर्ती है। मरीज का 17 वर्षीय पोता तीमारदारी के लिए अस्पताल में रुका हुआ था। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे किशोर उनकी बेटी को टॉफी दिलाने के बहाने दूसरी मंजिल पर सुनसान गैलरी में ले गया और रेप की कोशिश की। बालिका के शोर मचाने पर उसकी मां मौके पर पहुंच गई। उसके विरोध करने पर किशोर ने उसे थप्पड़ मारा। इतने में शोर-शराबा सुनकर मौके पर भीड़ इकट्ठी हो गई। लोगों ने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। सूचना मिलने पर अस्पताल चौकी की पुलिस मौके पर पहुंच गई और कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस आरोपी को पकड़कर थाने ले आई। बालिका की मां की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ धारा 354 ए और 7/8 पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में पता चला है कि वह पढ़ाई-लिखाई नहीं करता, बल्कि आवारगी मिजाज का है। बालिका का मेडिकल परीक्षण शुरू कराने के साथ ही पास्को एक्ट के तहत सभी विधिक कार्यवाही पुलिस-प्रशासनिक स्तर पर शुरू करा दी गई हैं।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों से मिलने दिनभर तीमारदारों की भीड़ लगी रहती है। शासन स्तर पर अस्पताल में सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की मांग की जा चुकी है। सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी डिमांड भेजी गई है, लेकिन वह स्वीकृत नहीं हुई। बालिका के साथ हुई घटना शर्मनाक है। फिर से सुरक्षा की मांग की जाएगी।
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- डॉ. केशव स्वामी, सीएमएस जिला अस्पताल
- बालिका की मां की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। अस्पताल चौकी में सुरक्षा की दृष्टि से फोर्स बढ़ा दी गई है। विशेषकर महिला पुलिस और होमगार्ड अस्पताल में निगरानी करेंगे।
- डॉ. कृष्ण गोपाल यादव, सीओ सिटी
अस्पताल में सुरक्षित नहीं महिलाएं
शाहजहांपुर। जिला अस्पताल में सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी बनाई गई है, लेकिन वहां तैनात पुलिस एंबुलेंस चालकों और लोगों से उगाही में लगी रहती है। अस्पताल की सुरक्षा रामभरोसे है।
जिला अस्पताल दूसरी मंजिल तक वार्ड हैं। तीसरी मंजिल में डीवीडी वार्ड और मेडिकल वार्ड है। उसके सामने और गैलरी का हिस्सा अक्सर सुनसान ही रहता है। अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर महिला अस्पताल बना हुआ है। वहां महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी नहीं रहती। रात में अक्सर गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराने के लेकर महिला स्टाफ से नोकझोंक होती रहती है। कुछ माह पहले इलाज में लापरवाही से प्रसूता की मौत के मामले में अस्पताल में काफी हंगामा हुआ था। इसके बाद महिला पुलिस तैनात की गई थी, लेकिन मामला ठंडा होने के बाद महिला पुलिस को हटा दिया गया। अस्पताल में पूरी रात लोगों की आवाजाही रहती है। इन पर ध्यान देने के लिए सिक्योरिटी का इंतजाम नहीं है। इससे पहले एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने महिला अस्पताल में भर्ती एक महिला से छेड़खानी का प्रयास किया था। पुलिस ने इस मामले को रफादफा कर दिया था। अस्पताल में पुलिस कर्मी एंबुलेंस चालकों और इधर-उधर उगाही करते रहते हैं। अस्पताल में कोई पुलिस कर्मी राउंड नहीं लगाता है। किसी घटना के बाद ही पुलिस अस्पताल में पहुंचती है।