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ग्यारहवीं शरीफ पर झंडा कलां में उमड़े अकीदतमंद
शाहजहांपुर
Updated Mon, 02 Feb 2015 12:06 AM IST
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शहर के मोहल्ला झंडाकलां में ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर लगे मेले में हजारों जायरीन उमड़ पड़े। अकीदतमंदों ने हजरत शेख अब्दुल कादर जिलानी (बड़े पीर) की याद में लगे झंडे के समक्ष प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगी। बड़े पीर को गौसे आजम भी कहा जाता है। मन्नतें मांगने का सिलसिला सुबह शुरू होकर देर रात तक चलता रहा।
ग्यारहवीं शरीफ पर लगने वाले प्रख्यात मेले में बड़ी तादाद में दुकानें लगी हैं। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने मेले में झूलों, चाट-पकौड़ी आदि का लुत्फ लिया, वहीं अधिकांश पुरुष वर्ग हलुवा-पराठा की दुकानों पर देखा गया। घरेलू सामान और खेल-खिलौनों की खरीददारी के साथ साज-श्रंगार के आइटम भी खूब बिके। भीड़ को देखते हुए यातायात सुचारू रखने तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस बल भी तैनात रहा। रविवार को मुख्य दिन होने के कारण सुदूर क्षेत्रों से हजारों अकीदतमंद उमड़ पड़े। झंडे के समीप गुलपोशी और चादरपोशी करने को लंबी कतारें लगी रहीं।
इस अवसर पर कई स्थानों पर लंगर भी चलाए गए। सज्जादानशीन सैयद मो. सलीम मियां ने मुल्क और कौम की तरक्की के लिए दुआ की। मेला की व्यवस्था में गयासुद्दीन, याहिया, वली हसन, मो. कमील, सैय्यद गुफरान, उस्मान आदि का योगदान रहा।
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शाह बर्री मियां की दरगाह पर हुआ लंगर
जलालाबाद। नगर स्थित सुप्रसिद्ध निजाम शाह बर्री मियां की दरगाह पर निजामिया कमेटी की ओर से हजरत गौस पाक की ग्यारहवीं तारीख मनाते हुए लंगर का आयोजन किया। इसमें नगर समेत आसपास के गांवों के तमाम लोगों ने लंगर को तर्बरूख के रूप में खाया। इस माह को हुजूर गौस पाक के नाम से मनाया जाता है। इसकी मुबारक रब्बी उल आखिर की ग्यारहवीं तारीख को गौसे आजम की याद में मनाई जाती है। इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोग जगह-जगह लंगरों का आयोजन करते हैं और वसीयत से कमजोर लोग अपने घरों में ही तबर्रुख बनाकर नियाज कराते हैं। इसके बाद उसे लोगों के बीच बांटते हैं। दरगाह पर हुए आयोजन में कमेटी के प्रबंधक मो. इस्लाम खां, शमशाद हुसैन, शकील अहमद खां, शाहिद हुसैन, अख्तर खां आदि का सहयोग रहा।
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ग्यारहवीं शरीफ पर लगने वाले प्रख्यात मेले में बड़ी तादाद में दुकानें लगी हैं। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने मेले में झूलों, चाट-पकौड़ी आदि का लुत्फ लिया, वहीं अधिकांश पुरुष वर्ग हलुवा-पराठा की दुकानों पर देखा गया। घरेलू सामान और खेल-खिलौनों की खरीददारी के साथ साज-श्रंगार के आइटम भी खूब बिके। भीड़ को देखते हुए यातायात सुचारू रखने तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस बल भी तैनात रहा। रविवार को मुख्य दिन होने के कारण सुदूर क्षेत्रों से हजारों अकीदतमंद उमड़ पड़े। झंडे के समीप गुलपोशी और चादरपोशी करने को लंबी कतारें लगी रहीं।
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इस अवसर पर कई स्थानों पर लंगर भी चलाए गए। सज्जादानशीन सैयद मो. सलीम मियां ने मुल्क और कौम की तरक्की के लिए दुआ की। मेला की व्यवस्था में गयासुद्दीन, याहिया, वली हसन, मो. कमील, सैय्यद गुफरान, उस्मान आदि का योगदान रहा।
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शाह बर्री मियां की दरगाह पर हुआ लंगर
जलालाबाद। नगर स्थित सुप्रसिद्ध निजाम शाह बर्री मियां की दरगाह पर निजामिया कमेटी की ओर से हजरत गौस पाक की ग्यारहवीं तारीख मनाते हुए लंगर का आयोजन किया। इसमें नगर समेत आसपास के गांवों के तमाम लोगों ने लंगर को तर्बरूख के रूप में खाया। इस माह को हुजूर गौस पाक के नाम से मनाया जाता है। इसकी मुबारक रब्बी उल आखिर की ग्यारहवीं तारीख को गौसे आजम की याद में मनाई जाती है। इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोग जगह-जगह लंगरों का आयोजन करते हैं और वसीयत से कमजोर लोग अपने घरों में ही तबर्रुख बनाकर नियाज कराते हैं। इसके बाद उसे लोगों के बीच बांटते हैं। दरगाह पर हुए आयोजन में कमेटी के प्रबंधक मो. इस्लाम खां, शमशाद हुसैन, शकील अहमद खां, शाहिद हुसैन, अख्तर खां आदि का सहयोग रहा।