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अब गलती पर पर्दा डालने की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Thu, 14 Jul 2016 11:51 PM IST
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प्रशासन
- फोटो : अमर उजाला
ब्लड ग्रुप बताने में लापरवाही का मामला
सीएमएस कह रहे हैं हमने न ब्लड मांग, न ही जांच कराई
इलाज करने वाले डाक्टर का कहना है ब्लड मांगा गया था
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक ने ओ निगेटिव बताया था
मरीज के मेडिकल रिकार्ड से ब्लड ग्रुप जांच का पर्चा गायब
ब्लड ग्रुप गलत बताने से मरीज की मौत के मामले में अब जिला अस्पताल प्रशासन पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। मरीज की केस हिस्ट्री से ब्लड ग्रुप जांच संबंधी पर्चे गायब हैं। इसके चलते सीएमएस डा. केशव स्वामी दावा कर रहे हैं कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीज विजय की किसी प्रकार की जांच नहीं की गई और न ही ब्लड की डिमांड की गई। अस्पताल के रिकार्ड में भी इस संबंध में कोई लिखापढ़ी है। हालांकि उनकी दावे की हवा मरीज का इलाज कर रहे सर्जन के बयान से निकल गई। सर्जन का कहना है कि विजय के लिए 23 जून को एक यूनिट ब्लड की डिमांड की गई थी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीज के ब्लड ग्रुप की जांच कराई गई थी और वहां से ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव बताया गया था। हालांकि मरीज के रिकार्ड से यह कागज गायब हैं।
विजय की मौत के बाद उसके परिवारीजनों के आरोप के बारे में जब सीएमएस डा. केशव स्वामी से बात की गई तो उनका कहना था कि मरीज के ब्लड ग्रुप की जांच कराए जाने की बात बिल्कुल गलत है। आरोप लगाने वालों के पास इस तरह के कोई साक्ष्य भी नहीं हैं। ब्लड बैंक में भी मृतक के ब्लड की जांच नहीं की गई है। अस्सी फीसदी से अधिक जला मरीज एक महीना से ज्यादा जीवित रहा, इसमें अस्पताल प्रशासन की लापरवाही कहां से सामने आ गई। लगाए जा रहे सारे आरोप बेबुनियाद हैं।
वहीं इस संबंध में विजय का इलाज कर रहे सर्जन डा. महेंद्र कुमार से भी बात की गई। डा. महेंद्र कुमार का कहना है कि विजय को अस्सी फीसदी जली अवस्था में भर्ती कराया गया था। मैंने उसे हायर सेंटर ले जाने के लिए कहा था लेकिन परिवार वाले उसे बाहर ले जाने की स्थिति में नहीं थी। मरीज के परिवार के कहने पर मैंने इलाज शुरू किया था। 22 जून को मैंने एक यूनिट ब्लड की डिमांड की थी। विजय के परिवार के लोग 23 जून को उसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव होने की रिपोर्ट लेकर आए थे। चूंकि रिपोर्ट बाहर की थी, इसलिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में जांच कराई गई। वहां से विजय का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव बताया गया। हालांकि इसका कोई रिकार्ड न तो मरीज की फाइल में है और न ब्लड बैंक के रिकार्ड में। डा. महेंद्र कुमार ने यह भी बताया कि परिवार के लोग खून चढ़वाने में काफी टालमटोल करते रहे। दस जुलाई को जब मैं छुट्टी पर तब विजय को ब्लड चढ़ाया गया। हालांकि ये मेरी जानकारी में था।
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जाम में फंसे रहे स्कूली बच्चे और अन्य लोग
सुबह करीब आठ बजे शव रखकर जाम लगाने से बरेली मोड़ के आसपास के स्कूलों के बच्चे जाम में फंसे रहे। वहीं लोगों को भी जाम का सामना करना पड़ा। किसी को ऑफिस पहुंचना था, तो किसी को दुकान खोलने जाना था। जाम की वजह से सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। राजघाट चौकी और बरेली मोड़ से ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया।
मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होगी।
- अवनेश्वर चंद्र श्रीवास्तव, सीओ सिटी
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सीएमएस कह रहे हैं हमने न ब्लड मांग, न ही जांच कराई
इलाज करने वाले डाक्टर का कहना है ब्लड मांगा गया था
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक ने ओ निगेटिव बताया था
मरीज के मेडिकल रिकार्ड से ब्लड ग्रुप जांच का पर्चा गायब
ब्लड ग्रुप गलत बताने से मरीज की मौत के मामले में अब जिला अस्पताल प्रशासन पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। मरीज की केस हिस्ट्री से ब्लड ग्रुप जांच संबंधी पर्चे गायब हैं। इसके चलते सीएमएस डा. केशव स्वामी दावा कर रहे हैं कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीज विजय की किसी प्रकार की जांच नहीं की गई और न ही ब्लड की डिमांड की गई। अस्पताल के रिकार्ड में भी इस संबंध में कोई लिखापढ़ी है। हालांकि उनकी दावे की हवा मरीज का इलाज कर रहे सर्जन के बयान से निकल गई। सर्जन का कहना है कि विजय के लिए 23 जून को एक यूनिट ब्लड की डिमांड की गई थी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीज के ब्लड ग्रुप की जांच कराई गई थी और वहां से ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव बताया गया था। हालांकि मरीज के रिकार्ड से यह कागज गायब हैं।
विजय की मौत के बाद उसके परिवारीजनों के आरोप के बारे में जब सीएमएस डा. केशव स्वामी से बात की गई तो उनका कहना था कि मरीज के ब्लड ग्रुप की जांच कराए जाने की बात बिल्कुल गलत है। आरोप लगाने वालों के पास इस तरह के कोई साक्ष्य भी नहीं हैं। ब्लड बैंक में भी मृतक के ब्लड की जांच नहीं की गई है। अस्सी फीसदी से अधिक जला मरीज एक महीना से ज्यादा जीवित रहा, इसमें अस्पताल प्रशासन की लापरवाही कहां से सामने आ गई। लगाए जा रहे सारे आरोप बेबुनियाद हैं।
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वहीं इस संबंध में विजय का इलाज कर रहे सर्जन डा. महेंद्र कुमार से भी बात की गई। डा. महेंद्र कुमार का कहना है कि विजय को अस्सी फीसदी जली अवस्था में भर्ती कराया गया था। मैंने उसे हायर सेंटर ले जाने के लिए कहा था लेकिन परिवार वाले उसे बाहर ले जाने की स्थिति में नहीं थी। मरीज के परिवार के कहने पर मैंने इलाज शुरू किया था। 22 जून को मैंने एक यूनिट ब्लड की डिमांड की थी। विजय के परिवार के लोग 23 जून को उसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव होने की रिपोर्ट लेकर आए थे। चूंकि रिपोर्ट बाहर की थी, इसलिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में जांच कराई गई। वहां से विजय का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव बताया गया। हालांकि इसका कोई रिकार्ड न तो मरीज की फाइल में है और न ब्लड बैंक के रिकार्ड में। डा. महेंद्र कुमार ने यह भी बताया कि परिवार के लोग खून चढ़वाने में काफी टालमटोल करते रहे। दस जुलाई को जब मैं छुट्टी पर तब विजय को ब्लड चढ़ाया गया। हालांकि ये मेरी जानकारी में था।
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जाम में फंसे रहे स्कूली बच्चे और अन्य लोग
सुबह करीब आठ बजे शव रखकर जाम लगाने से बरेली मोड़ के आसपास के स्कूलों के बच्चे जाम में फंसे रहे। वहीं लोगों को भी जाम का सामना करना पड़ा। किसी को ऑफिस पहुंचना था, तो किसी को दुकान खोलने जाना था। जाम की वजह से सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। राजघाट चौकी और बरेली मोड़ से ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया।
मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होगी।
- अवनेश्वर चंद्र श्रीवास्तव, सीओ सिटी