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दहेज हत्या में पति को उम्रकैद
शाहजहांपुर
Updated Fri, 02 Oct 2015 12:14 AM IST
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दहेज के लिए विवाहिता को पीटकर मार डालने और खुदकुशी दिखाने के लिए तालाब में लाश डाल देने की घटना में अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम एहसानुल्लाह खां ने बृहस्पतिवार को दोषी सिद्ध पति को उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसी मामले में दूसरे दोषी सिद्ध अभियुक्त ससुर 10 वर्ष की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना जबकि ननद और ननदोई को सात-सात साल की कैद और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
न्यायालय में प्रस्तुत पूरे घटनाक्रम का प्रस्तुत ब्योरे के अनुसार, घटना 10 जुलाई 2012 को प्रकाश में आया। शाहजहांपुर के मोहल्ला हुसैनपुरा निवासी विश्राम सागर मिश्र ने उक्त तिथि को दोपहर के समय अल्हागंज थाने में अपनी बेटी स्वाति को मार कर ससुराल पक्ष द्वारा तालाब में फेंक दिए जाने की तहरीर दी गई। स्वाति की शादी 26 जनवरी 2011 को अल्हागंज थाना क्षेत्र के मोहल्ला पीरगंज निवासी अशोक वाजपेयी से की थी। उस शादी में करीब स्वाति के घर वालों ने करीब चार रुपये दान-दहेज में खर्च किए थे। बाद में ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त 50 हजार रुपये और मोटरसाइकिल की मांग करनी शुरू कर दी। मायके वालों ने मांग पूरी करने में असमर्थता जाहिर की। फिर अचानक 10 जुलाई 2012 की सुबह अशोक और उसके पिता इंद्रमोहन ने विश्राम सागर को फोन पर बताया कि उनकी बेटी कहीं चली गई है। यह अपने परिवारजनों के साथ वहां पहुंचे को घर के पास के तालाब में इनकी बेटी की लाश मिली। इन्होंने इसके बाद पुलिस में दामाद, समधी और हरदोई निवासी मृतका की ननद बिट्टो देवी और ननदोई रामराज के खिलाफ सामूहिक तौर पर साजिश रचकर हत्या करने की शिकायत दर्ज कराई।
शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीन स्थानों पर चोट के निशान पाए गए। दाहिने गाल पर खरोंच के निशान थे, चेहरे पर दाहिनी ओर कुचले जाने से होने वाले घाव का निशान था और दोनों नाक के छेद में खून भरा हुआ था। आंतरिक परीक्षण में मस्तिष्क में सूजन और आंखें बाहर निकली होने का उल्लेख था। इसके बाद विवेचना पूरी कर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी। न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों के परीक्षण, गवाहों के बयान और सरकारी वकील उमेश चंद गुर्जर के तर्कों को सुनने के बाद बृहस्पतिवार को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुनाया।
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न्यायालय में प्रस्तुत पूरे घटनाक्रम का प्रस्तुत ब्योरे के अनुसार, घटना 10 जुलाई 2012 को प्रकाश में आया। शाहजहांपुर के मोहल्ला हुसैनपुरा निवासी विश्राम सागर मिश्र ने उक्त तिथि को दोपहर के समय अल्हागंज थाने में अपनी बेटी स्वाति को मार कर ससुराल पक्ष द्वारा तालाब में फेंक दिए जाने की तहरीर दी गई। स्वाति की शादी 26 जनवरी 2011 को अल्हागंज थाना क्षेत्र के मोहल्ला पीरगंज निवासी अशोक वाजपेयी से की थी। उस शादी में करीब स्वाति के घर वालों ने करीब चार रुपये दान-दहेज में खर्च किए थे। बाद में ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त 50 हजार रुपये और मोटरसाइकिल की मांग करनी शुरू कर दी। मायके वालों ने मांग पूरी करने में असमर्थता जाहिर की। फिर अचानक 10 जुलाई 2012 की सुबह अशोक और उसके पिता इंद्रमोहन ने विश्राम सागर को फोन पर बताया कि उनकी बेटी कहीं चली गई है। यह अपने परिवारजनों के साथ वहां पहुंचे को घर के पास के तालाब में इनकी बेटी की लाश मिली। इन्होंने इसके बाद पुलिस में दामाद, समधी और हरदोई निवासी मृतका की ननद बिट्टो देवी और ननदोई रामराज के खिलाफ सामूहिक तौर पर साजिश रचकर हत्या करने की शिकायत दर्ज कराई।
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शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीन स्थानों पर चोट के निशान पाए गए। दाहिने गाल पर खरोंच के निशान थे, चेहरे पर दाहिनी ओर कुचले जाने से होने वाले घाव का निशान था और दोनों नाक के छेद में खून भरा हुआ था। आंतरिक परीक्षण में मस्तिष्क में सूजन और आंखें बाहर निकली होने का उल्लेख था। इसके बाद विवेचना पूरी कर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी। न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों के परीक्षण, गवाहों के बयान और सरकारी वकील उमेश चंद गुर्जर के तर्कों को सुनने के बाद बृहस्पतिवार को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुनाया।
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