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पति-पत्नी ने फांसी लगाकर दी जान

Sun, 02 Apr 2017 12:17 AM IST
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 02 Apr 2017 12:17 AM IST
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Husband and wife hanged
आत्महत्या - फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
थाना कांट क्षेत्र के गांव मितेपुर में दंपति ने शनिवार सुबह घर में फांसी लगाकर जान दे दी। महिला का शव भूसे की कोठरी और उसके पति का शव कमरे में फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना पर घरवाले चुप हैं। पुलिस भी अभी तक दोनों के आत्महत्या करने की वजह पता नहीं कर पाई है।
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गांव मितेपुर निवासी रुकुम सिंह वर्मा ने बताया कि उनके भाई 36 वर्षीय आत्माराम शनिवार सुबह उठने के बाद खेत पर ट्यूबवेल चलाने चले गए। उनकी पत्नी बेलावती घरेलू काम में लग गईं। बच्चे चाय पीने के बाद खेलने निकल गए। इसी बीच बेलावती भूसे वाले कमरे में गईं और रस्सी से गले में फांसी का फंदा कसकर कुंडे से लटक गईं। करीब नौ बजे जब आत्माराम खेत से लौटे तो उनकी मां सदावती घर के बाहर बैठी थीं। पास ही बच्चे खेल रहे थे। आत्माराम घर के अंदर पहुंचे तो भूसे की कोठरी में पत्नी को फांसी के फंदे पर लटका देखा। उन्होंने रस्सी काटकर पत्नी को फंदे से नीचे उतारा। जिंदा होने की उम्मीद में पत्नी के मुंह पर पानी छिड़का, लेकिन जब शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो वह इस कदर सदमे में आ गए कि खुद भी घर की पहली मंजिल के कमरे में पहुंचकर फांसी लगा ली। 
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आत्माराम का 15 वर्षीय बेटा रामरहीस घर के अंदर पहुंचा तो उसने मां का शव पड़ा देखा। उसने चीखते हुए पिता को आवाज लगाई और दौड़ता हुआ छत पर पहुंचा तो वहां पिता को फंदे पर लटका देख उसके होश उड़ गए। उसकी चीखपुकार पर आत्माराम की मां सदावती और बाहर खेल रहे बच्चे अंदर पहुंचे तो कोहराम मच गया। कुछ ही देर में आत्माराम के घर पर भीड़ लग गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना की जानकारी ली, लेकिन घरवाले दोनों के आत्महत्या करने की कोई ठोस वजह नहीं बता सके। पुलिस ने दोनों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। कांट थाने के प्रभारी निरीक्षक देवेश सिंह ने बताया कि मितेपुर में पति-पत्नी के फांसी लगाकर जान देने का मामला सामने आया है। घरवालों से घटना के संबंध में जानकारी ली गई, लेकिन वे कोई ठोस कारण नहीं बता पा रहे हैं। घटना के समय आत्माराम के बच्चे घर के बाहर खेल रहे थे। उनकी मां भी घर में मौजूद नहीं थीं।
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गेहूं की गहाई के बाद साथ ढोया था भूसा
शाहजहांपुर। मितेपुर गांव में दंपति के आत्महत्या करने पर हर कोई हैरान है। पोस्टमार्टम हाउस पर घरवालों के साथ मौजूद गांव वालों का कहना था कि शुक्रवार को दोनों ने गेहूं की गहाई कराने के बाद साथ भूसा ढोया था। फिर न जाने अचानक यह सब क्या हो गया। आत्माराम वर्मा तीन भाई थे। एक भाई की चार साल पहले टीबी से मौत हो गई थी। बड़े भाई रुकुम सिंह दस साल पहले थाना तिलहर क्षेत्र के गांव ईसमहा स्थित ससुराल में जाकर रहने लगे। पिता मेवाराम ने सन्यास ले लिया है। वह अक्सर तीर्थयात्रा पर रहते हैं। कभी-कभार घर आते भी हैं तो एक-दो दिन रुकने के बाद फिर चले जाते हैं। मां सदावती ही आत्माराम के साथ रहती हैं। 

अनाथ हो गए बच्चे
शाहजहांपुर। आत्माराम-बेलावती के पांच बच्चे हैं। इनमें सबसे बड़ा बेटा रामरहीस पंद्रह साल का है और सबसे छोटी बेटी शीतल पांच साल की है। एक साथ माता-पिता की मौत के बाद रामरहीस, रूपराम, अतर सिंह, सितारा, शीतल अनाथ हो गए हैं। दादी सदावती के पास बैठे बच्चों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सदावती सिसकियां भरते हुए बच्चों को दिलासा देने का प्रयास कर रहीं थीं।


यह कैसे हो गया, कुछ समझ नहीं आ रहा
शाहजहांपुर। दामाद आत्माराम और बेटी बेलावती की मौत की खबर सुनकर सेहरामऊ  दक्षिणी के गांव पंथी से आए लज्जाराम ने कहा कि उनके सामने कभी दोनों के आपस में झगड़ने की बात नहीं आई, लेकिन शनिवार सुबह जब उन्हें दोनों के आत्महत्या करने की सूचना मिली तो वह खुद नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर यह सब कैसे हो गया।
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