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साथियों संग दोस्त की गोली मारकर हत्या
मिर्जापुर(श्ााहजहांपुर)
Updated Mon, 29 Dec 2014 12:10 AM IST
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क्षेत्र के गांव गुटैटी उत्तर निवासी 45 वर्षीय रामरतन कश्यप की उनके घर में भाई की तरह रहने वाले भगत कुम्हार ने अपने दो साथियों संग रुपयों के लेनदेन के विवाद में शनिवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक के भांजे शिव कुमार ने भगत को नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।
धियरपुरा निवासी शिव कुमार ने तहरीर में लिखा है कि ढाई गांव निवासी भगत कुम्हार को उसके मामा रामरतन के बीच शनिवार दोपहर रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया था। भगत ने कुछ रुपये रामरतन से उधार ले रखे थे। शाम करीब सात बजे मामा ढाई गांव से बाजार कर साइकिल से घर लौट रहे थे। शिव कुमार और गांव के कुछ लोग उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। रामरतन जब बल्देवपुर गांव की मोड़ के पास पहुंचे तभी कुछ लोगों ने उनके साथ लूटपाट शुरू कर दी। रामरतन के चिल्लाने पर शिवकुमार ने टार्च की रोशनी में देखा कि भगत और उसके दो साथी तमंचों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। जब तक वह गांव वालों के साथ मामा को बचाने पहुंचा तब तक भगत साथियों के साथ फरार हो गया। रामरतन को चार गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
रामरतन के पास करीब 35 बीघा जमीन थी। वह ब्याज का भी काम करते थे। रामरतन ने खेती की देखभाल के लिए पड़ोस के गांव ढाई में रहने वाले भगत कुम्हार को अपने पास रख लिया था। भगत करीब चार साल से उनके घर में ही रहता था।
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हत्या के बाद भगत रामरतन के घर गया
मृतक रामरतन की पत्नी गुड्डी ने बताया कि गोली मारने के बाद भगत साइकिल लेकर घर पर आया था। उसके हाथ में तमंचा था। जब गुड्डी ने पूछा कि तुम्हारे भाई कहां है तो भगत ने बताया कि उन्हें किसी ने गोली मार दी है वहीं जा रहा हूं लेकिन जब गुड्डी मौके पर पहुंची तो भगत घटनास्थल पर नहीं था। परिवार वालों के मुताबिक रामरतन मकान बनवाने के लिए ढाई गांव में रुपयों का इंतजाम करने गए थे। हालांकि हत्या के बाद उनकी जेब से कुछ भी नहीं मिला।
जुड़वां बच्चे लिए थे गोद
रामरतन की बहन खजानो ने बताया कि उसके पिता रामचंद्र की करीब 25 साल पहले मौत हो गई थी। दो साल पहले मां सरस्वती भी चल बसीं। करीब 22 साल पहले रामरतन ने गुड्डी से शादी की थी। 20 साल तक जब रामरतन के कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने दो वर्ष पहले रिश्ते के साले राजपाल के जुड़वां बेटा अनमोल और बेटी लक्ष्मी को गोद ले लिया था।। क्षेत्र के गांव गुटैटी उत्तर निवासी 45 वर्षीय रामरतन कश्यप की उनके घर में भाई की तरह रहने वाले भगत कुम्हार ने अपने दो साथियों संग रुपयों के लेनदेन के विवाद में शनिवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक के भांजे शिव कुमार ने भगत को नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।
धियरपुरा निवासी शिव कुमार ने तहरीर में लिखा है कि ढाई गांव निवासी भगत कुम्हार को उसके मामा रामरतन के बीच शनिवार दोपहर रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया था। भगत ने कुछ रुपये रामरतन से उधार ले रखे थे। शाम करीब सात बजे मामा ढाई गांव से बाजार कर साइकिल से घर लौट रहे थे। शिव कुमार और गांव के कुछ लोग उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। रामरतन जब बल्देवपुर गांव की मोड़ के पास पहुंचे तभी कुछ लोगों ने उनके साथ लूटपाट शुरू कर दी। रामरतन के चिल्लाने पर शिवकुमार ने टार्च की रोशनी में देखा कि भगत और उसके दो साथी तमंचों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। जब तक वह गांव वालों के साथ मामा को बचाने पहुंचा तब तक भगत साथियों के साथ फरार हो गया। रामरतन को चार गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
रामरतन के पास करीब 35 बीघा जमीन थी। वह ब्याज का भी काम करते थे। रामरतन ने खेती की देखभाल के लिए पड़ोस के गांव ढाई में रहने वाले भगत कुम्हार को अपने पास रख लिया था। भगत करीब चार साल से उनके घर में ही रहता था।
हत्या के बाद भगत रामरतन के घर गया
मृतक रामरतन की पत्नी गुड्डी ने बताया कि गोली मारने के बाद भगत साइकिल लेकर घर पर आया था। उसके हाथ में तमंचा था। जब गुड्डी ने पूछा कि तुम्हारे भाई कहां है तो भगत ने बताया कि उन्हें किसी ने गोली मार दी है वहीं जा रहा हूं लेकिन जब गुड्डी मौके पर पहुंची तो भगत घटनास्थल पर नहीं था। परिवार वालों के मुताबिक रामरतन मकान बनवाने के लिए ढाई गांव में रुपयों का इंतजाम करने गए थे। हालांकि हत्या के बाद उनकी जेब से कुछ भी नहीं मिला।
जुड़वां बच्चे लिए थे गोद
रामरतन की बहन खजानो ने बताया कि उसके पिता रामचंद्र की करीब 25 साल पहले मौत हो गई थी। दो साल पहले मां सरस्वती भी चल बसीं। करीब 22 साल पहले रामरतन ने गुड्डी से शादी की थी। 20 साल तक जब रामरतन के कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने दो वर्ष पहले रिश्ते के साले राजपाल के जुड़वां बेटा अनमोल और बेटी लक्ष्मी को गोद ले लिया था।
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धियरपुरा निवासी शिव कुमार ने तहरीर में लिखा है कि ढाई गांव निवासी भगत कुम्हार को उसके मामा रामरतन के बीच शनिवार दोपहर रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया था। भगत ने कुछ रुपये रामरतन से उधार ले रखे थे। शाम करीब सात बजे मामा ढाई गांव से बाजार कर साइकिल से घर लौट रहे थे। शिव कुमार और गांव के कुछ लोग उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। रामरतन जब बल्देवपुर गांव की मोड़ के पास पहुंचे तभी कुछ लोगों ने उनके साथ लूटपाट शुरू कर दी। रामरतन के चिल्लाने पर शिवकुमार ने टार्च की रोशनी में देखा कि भगत और उसके दो साथी तमंचों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। जब तक वह गांव वालों के साथ मामा को बचाने पहुंचा तब तक भगत साथियों के साथ फरार हो गया। रामरतन को चार गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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रामरतन के पास करीब 35 बीघा जमीन थी। वह ब्याज का भी काम करते थे। रामरतन ने खेती की देखभाल के लिए पड़ोस के गांव ढाई में रहने वाले भगत कुम्हार को अपने पास रख लिया था। भगत करीब चार साल से उनके घर में ही रहता था।
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हत्या के बाद भगत रामरतन के घर गया
मृतक रामरतन की पत्नी गुड्डी ने बताया कि गोली मारने के बाद भगत साइकिल लेकर घर पर आया था। उसके हाथ में तमंचा था। जब गुड्डी ने पूछा कि तुम्हारे भाई कहां है तो भगत ने बताया कि उन्हें किसी ने गोली मार दी है वहीं जा रहा हूं लेकिन जब गुड्डी मौके पर पहुंची तो भगत घटनास्थल पर नहीं था। परिवार वालों के मुताबिक रामरतन मकान बनवाने के लिए ढाई गांव में रुपयों का इंतजाम करने गए थे। हालांकि हत्या के बाद उनकी जेब से कुछ भी नहीं मिला।
जुड़वां बच्चे लिए थे गोद
रामरतन की बहन खजानो ने बताया कि उसके पिता रामचंद्र की करीब 25 साल पहले मौत हो गई थी। दो साल पहले मां सरस्वती भी चल बसीं। करीब 22 साल पहले रामरतन ने गुड्डी से शादी की थी। 20 साल तक जब रामरतन के कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने दो वर्ष पहले रिश्ते के साले राजपाल के जुड़वां बेटा अनमोल और बेटी लक्ष्मी को गोद ले लिया था।। क्षेत्र के गांव गुटैटी उत्तर निवासी 45 वर्षीय रामरतन कश्यप की उनके घर में भाई की तरह रहने वाले भगत कुम्हार ने अपने दो साथियों संग रुपयों के लेनदेन के विवाद में शनिवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक के भांजे शिव कुमार ने भगत को नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।
धियरपुरा निवासी शिव कुमार ने तहरीर में लिखा है कि ढाई गांव निवासी भगत कुम्हार को उसके मामा रामरतन के बीच शनिवार दोपहर रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया था। भगत ने कुछ रुपये रामरतन से उधार ले रखे थे। शाम करीब सात बजे मामा ढाई गांव से बाजार कर साइकिल से घर लौट रहे थे। शिव कुमार और गांव के कुछ लोग उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। रामरतन जब बल्देवपुर गांव की मोड़ के पास पहुंचे तभी कुछ लोगों ने उनके साथ लूटपाट शुरू कर दी। रामरतन के चिल्लाने पर शिवकुमार ने टार्च की रोशनी में देखा कि भगत और उसके दो साथी तमंचों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। जब तक वह गांव वालों के साथ मामा को बचाने पहुंचा तब तक भगत साथियों के साथ फरार हो गया। रामरतन को चार गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
रामरतन के पास करीब 35 बीघा जमीन थी। वह ब्याज का भी काम करते थे। रामरतन ने खेती की देखभाल के लिए पड़ोस के गांव ढाई में रहने वाले भगत कुम्हार को अपने पास रख लिया था। भगत करीब चार साल से उनके घर में ही रहता था।
हत्या के बाद भगत रामरतन के घर गया
मृतक रामरतन की पत्नी गुड्डी ने बताया कि गोली मारने के बाद भगत साइकिल लेकर घर पर आया था। उसके हाथ में तमंचा था। जब गुड्डी ने पूछा कि तुम्हारे भाई कहां है तो भगत ने बताया कि उन्हें किसी ने गोली मार दी है वहीं जा रहा हूं लेकिन जब गुड्डी मौके पर पहुंची तो भगत घटनास्थल पर नहीं था। परिवार वालों के मुताबिक रामरतन मकान बनवाने के लिए ढाई गांव में रुपयों का इंतजाम करने गए थे। हालांकि हत्या के बाद उनकी जेब से कुछ भी नहीं मिला।
जुड़वां बच्चे लिए थे गोद
रामरतन की बहन खजानो ने बताया कि उसके पिता रामचंद्र की करीब 25 साल पहले मौत हो गई थी। दो साल पहले मां सरस्वती भी चल बसीं। करीब 22 साल पहले रामरतन ने गुड्डी से शादी की थी। 20 साल तक जब रामरतन के कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने दो वर्ष पहले रिश्ते के साले राजपाल के जुड़वां बेटा अनमोल और बेटी लक्ष्मी को गोद ले लिया था।