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भूकंप से फिर डोली धरती, मची अफरातफरी
शाहजहांपुर
Updated Tue, 12 May 2015 11:56 PM IST
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नेपाल की भूकंप त्रासदी को बमुश्किल दो सप्ताह ही बीत पाए होंगे कि मंगलवार को दोपहर 12.31 बजे फिर भूकंप के झटके महसूस किए जाने से लोगों में अफरातफरी मच गई। कलक्ट्रेट के कई दफ्तरों में काम कर रहे कर्मचारी कंप्यूटर और मेज-कुर्सियां हिलती देख बाहर निकल आए। घरों में मौजूद लोग भी खुले स्थानों पर आकर भूकंप की चर्चाओं में मशगूल हो गए। स्कूलों में जल्दी छुट्टी करके ब“æô´ को घर भेज दिया गया। हालांकि, जिले में भूकंप से जान-माल की कोई क्षति होने की सूचना नहीं है।
बीती अप्रैल के अंतिम सप्ताह में नेपाल में आए भयानक भूकंप के झटके यहां भी महसूस किए जाने से लोग धरती में हलचल को लेकर पहले से काफी सतर्क हैं। भूकंप के दो दिन बाद तक हल्के झटके महसूस किए जाने से लोगों का डर कम नहीं हो पाया। यही वजह रही कि मंगलवार को दोपहर धरती डोलने का अहसास होते ही जन सामान्य में अफरातफरी मच गई। पलक झपकते ही घरों-दफ्तरों से भागकर लोग बाहर निकलकर खुले स्थानों पर आ गए।
कलक्ट्रेट में निर्वाचन कार्यालय से लेकर पोर्टिको और ट्रेजरी से लेकर विकास भवन तक पहले से मौजूद वादकारियों की भीड़ में तमाम कर्मचारी भी शामिल हो जाने से वहां लोगों का मेला लग गया। जजी परिसर में भी यही माहौल पैदा हो गया। मुकदमों की सुनवाई प्रक्रिया छोड़ न्यायिक अधिकारी भी बाहर निकल आए। करीब दस सेकेंड तक भूकंप के झटके महसूस किए जाते रहे। स्थिति सामान्य होने के बाद ही जनजीवन रोजमर्रा के नियमित कामकाज में जुट सका।
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भूकंप आने पर बच्चों को खुले में खड़ा किया
रोटी गोदाम स्कूल परिसर में संचालित हो रहे दो प्री-इंट्रीगेशन कैंप में जैसे ही भूकंप के झटके लगने शुरू हुए तो वॉर्डेन ने विशेष बच्चों को खुले में लाकर खड़ा कर दिया। इससे बच्चों को सुरक्षित किया जा सका। दोनों कैंप में मौजूद करीब 100 श्रवण बाधित और दृष्टिबाधित बच्चे आधा घंटा तक धूप में खुले स्थान पर खड़े रहे। वॉर्डेन वीरपाल सिंह ने कहा कि जैसे ही उन्हें भूकंप का झटका महसूस हुआ तो सबसे पहले बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
बीएसए दफ्तर से बाहर भागे कर्मचारी
भूकंप का पहला झटका लगते ही बीएसए दफ्तर में काम कर रहे कर्मचारी दफ्तर छोड़कर बाहर भाग खड़े हुए। सभी कर्मचारी गेट के पास खड़े हो गए। कर्मचारियों का कहना था कि एकदम से फर्नीचर हिलने लगा। इससे तुरंत बिल्डिंग से निकलने में ही भलाई समझी। आफिस छोड़ने वालों में एमडीएम प्रभारी निश्चय सिंह, शेखर, कफील अहमद, धीरज आदि शामिल रहे।
कांट में पुराने पीपल की टूट गई डालें
भूकंप के असर से कांट के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में खड़े पीपल और मदनापुर रोड पर रामलीला ग्राउंड के सामने स्थित गैस एजेंसी के पास खड़े पीपल की पुरानी डालें टूटकर झुक गईं। राहगीरों की सुरक्षा को देखते बाद में दोनों स्थानों पर टूटी डालें काट दी गईं।
जलालाबाद में मैदान की ओर भागे लोग
जलालाबाद। मंगलवार दोपहर करीब 12.40 पर भूकंप के आए कई तेज झटकों के दौरान नगरवासियों में हड़कंप मच गया। डरे सहमे लोग घरों से बाहर निकलकर मैदान तथा सड़कों की ओर भागे जबकि स्कूलों में पढ़ रहे ब'चों को आनन-फानन बिल्डिंग से बाहर निकालकर उन्हे घरों पर भिजवाने की व्यवस्था की गई। अभी हाल ही में नेपाल के काठमांडू में भूकंप के झटकों से हुई तबाही की तस्वीरे अभी लोगों की जेहन में ताजा है। इसके चलते कई सेकंड में करीब चार बार महसूस किए गए इन झटकों से लोग काफी घबरा गए। कुछ देर बाद लोग मोबाइल के जरिए विभिन्न स्थानों पर रहने वाले अपने ईष्ट मित्रों व रिश्तेदारों की कुशलक्षेम पूछते रहे।
अल्हागंज। मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 37 मिनट पर भूकंप के झटके आए और लोग परेशान हो गए। मंडी समिति के पूर्व इंस्पेक्टर मनोहर सिंह बताते हैं कि करीब साढ़े बारह बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए पंखे और टेबल भी हिलने लगी। बाद में उनके मकान की दो दीवारों में तीन जगह दरारें पड़ गईं।
देश के उतरी रा…यों के लिए खतरे की घंटी
विज्ञान संस्था रिसर्च के निदेशक एवं साइंस एक्टिविस्ट डॉ. इरफान ह्यूमन नेपाल-चीन सीमा पर एक पखवाड़े में दोबारा भूकंप के झटके महसूस किए जाने को देश के उतरी रा…यों के लिए खतरे की घंटी मानते हैं। वैज्ञानिकों के राष्ट्रीय सेमिनार में प्रतिभाग करने छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर गए डॉ. ह्यूमन ने भूकंप की भविष्यवाणी संभव नहीं, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में एशियन प्लेट के लगातार विचलन से उतराखंड, यूपी, बिहार आदि रा…यों के शहरों पर भूकंप का खतरा बढ़ गया है।
अपनों का आया सबसे पहले ख्याल
शाहजहांपुर। मंगलवार की दोपहर अचानक फिर धरती डोर उठी। नतीजा यह हुआ कि लोगबाग भयभीत होकर इधर-उधर भाग खड़े हुए। चूंकि जिस समय भूकंप के झटके महसूस किए गए, उस समय स्कूल-कॉलेज खुले हुए थे, जैसे ही शिक्षकों को झटकों का आभास हुआ कि उन्होंने तत्काल बच्चों को स्कूल भवन से बाहर निकाला और स्टाफ के साथ बच्चों को भूकंप के बारे में जानकारी दी। बाद में स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। सरकारी तथा गैर सरकारी कामकाज में जुटे कर्मचारी भी झटके महसूस करते ही बाहर भागने लगे।
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बीती अप्रैल के अंतिम सप्ताह में नेपाल में आए भयानक भूकंप के झटके यहां भी महसूस किए जाने से लोग धरती में हलचल को लेकर पहले से काफी सतर्क हैं। भूकंप के दो दिन बाद तक हल्के झटके महसूस किए जाने से लोगों का डर कम नहीं हो पाया। यही वजह रही कि मंगलवार को दोपहर धरती डोलने का अहसास होते ही जन सामान्य में अफरातफरी मच गई। पलक झपकते ही घरों-दफ्तरों से भागकर लोग बाहर निकलकर खुले स्थानों पर आ गए।
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कलक्ट्रेट में निर्वाचन कार्यालय से लेकर पोर्टिको और ट्रेजरी से लेकर विकास भवन तक पहले से मौजूद वादकारियों की भीड़ में तमाम कर्मचारी भी शामिल हो जाने से वहां लोगों का मेला लग गया। जजी परिसर में भी यही माहौल पैदा हो गया। मुकदमों की सुनवाई प्रक्रिया छोड़ न्यायिक अधिकारी भी बाहर निकल आए। करीब दस सेकेंड तक भूकंप के झटके महसूस किए जाते रहे। स्थिति सामान्य होने के बाद ही जनजीवन रोजमर्रा के नियमित कामकाज में जुट सका।
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भूकंप आने पर बच्चों को खुले में खड़ा किया
रोटी गोदाम स्कूल परिसर में संचालित हो रहे दो प्री-इंट्रीगेशन कैंप में जैसे ही भूकंप के झटके लगने शुरू हुए तो वॉर्डेन ने विशेष बच्चों को खुले में लाकर खड़ा कर दिया। इससे बच्चों को सुरक्षित किया जा सका। दोनों कैंप में मौजूद करीब 100 श्रवण बाधित और दृष्टिबाधित बच्चे आधा घंटा तक धूप में खुले स्थान पर खड़े रहे। वॉर्डेन वीरपाल सिंह ने कहा कि जैसे ही उन्हें भूकंप का झटका महसूस हुआ तो सबसे पहले बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
बीएसए दफ्तर से बाहर भागे कर्मचारी
भूकंप का पहला झटका लगते ही बीएसए दफ्तर में काम कर रहे कर्मचारी दफ्तर छोड़कर बाहर भाग खड़े हुए। सभी कर्मचारी गेट के पास खड़े हो गए। कर्मचारियों का कहना था कि एकदम से फर्नीचर हिलने लगा। इससे तुरंत बिल्डिंग से निकलने में ही भलाई समझी। आफिस छोड़ने वालों में एमडीएम प्रभारी निश्चय सिंह, शेखर, कफील अहमद, धीरज आदि शामिल रहे।
कांट में पुराने पीपल की टूट गई डालें
भूकंप के असर से कांट के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में खड़े पीपल और मदनापुर रोड पर रामलीला ग्राउंड के सामने स्थित गैस एजेंसी के पास खड़े पीपल की पुरानी डालें टूटकर झुक गईं। राहगीरों की सुरक्षा को देखते बाद में दोनों स्थानों पर टूटी डालें काट दी गईं।
जलालाबाद में मैदान की ओर भागे लोग
जलालाबाद। मंगलवार दोपहर करीब 12.40 पर भूकंप के आए कई तेज झटकों के दौरान नगरवासियों में हड़कंप मच गया। डरे सहमे लोग घरों से बाहर निकलकर मैदान तथा सड़कों की ओर भागे जबकि स्कूलों में पढ़ रहे ब'चों को आनन-फानन बिल्डिंग से बाहर निकालकर उन्हे घरों पर भिजवाने की व्यवस्था की गई। अभी हाल ही में नेपाल के काठमांडू में भूकंप के झटकों से हुई तबाही की तस्वीरे अभी लोगों की जेहन में ताजा है। इसके चलते कई सेकंड में करीब चार बार महसूस किए गए इन झटकों से लोग काफी घबरा गए। कुछ देर बाद लोग मोबाइल के जरिए विभिन्न स्थानों पर रहने वाले अपने ईष्ट मित्रों व रिश्तेदारों की कुशलक्षेम पूछते रहे।
अल्हागंज। मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 37 मिनट पर भूकंप के झटके आए और लोग परेशान हो गए। मंडी समिति के पूर्व इंस्पेक्टर मनोहर सिंह बताते हैं कि करीब साढ़े बारह बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए पंखे और टेबल भी हिलने लगी। बाद में उनके मकान की दो दीवारों में तीन जगह दरारें पड़ गईं।
देश के उतरी रा…यों के लिए खतरे की घंटी
विज्ञान संस्था रिसर्च के निदेशक एवं साइंस एक्टिविस्ट डॉ. इरफान ह्यूमन नेपाल-चीन सीमा पर एक पखवाड़े में दोबारा भूकंप के झटके महसूस किए जाने को देश के उतरी रा…यों के लिए खतरे की घंटी मानते हैं। वैज्ञानिकों के राष्ट्रीय सेमिनार में प्रतिभाग करने छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर गए डॉ. ह्यूमन ने भूकंप की भविष्यवाणी संभव नहीं, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में एशियन प्लेट के लगातार विचलन से उतराखंड, यूपी, बिहार आदि रा…यों के शहरों पर भूकंप का खतरा बढ़ गया है।
अपनों का आया सबसे पहले ख्याल
शाहजहांपुर। मंगलवार की दोपहर अचानक फिर धरती डोर उठी। नतीजा यह हुआ कि लोगबाग भयभीत होकर इधर-उधर भाग खड़े हुए। चूंकि जिस समय भूकंप के झटके महसूस किए गए, उस समय स्कूल-कॉलेज खुले हुए थे, जैसे ही शिक्षकों को झटकों का आभास हुआ कि उन्होंने तत्काल बच्चों को स्कूल भवन से बाहर निकाला और स्टाफ के साथ बच्चों को भूकंप के बारे में जानकारी दी। बाद में स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। सरकारी तथा गैर सरकारी कामकाज में जुटे कर्मचारी भी झटके महसूस करते ही बाहर भागने लगे।