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फसली क्षति ने और लील लीं तीन जिंदगी

Wed, 08 Apr 2015 11:43 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Wed, 08 Apr 2015 11:43 PM IST
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Crop damage and Lille took the lives of three
बेमौसम की बरसात से फसलें बरबाद होने का सदमा किसानों की जिंदगी छीन रहा है। बृहस्पतिवार को पुवायां क्षेत्र के गांव सबली कटेली के 38 वर्षीय जयराम और मुड़िया कुर्मियात के रहने वाले 50 वर्षीय श्यामा चरण की सांसें थम गईं। हालांकि, दोनों कुछ अरसे से बीमार थे, लेकिन कर्ज और पैसे की तंगी के चलते इलाज नहीं करा पाने के बाद फसलों की बरबादी के गम ने उनकी जान ले ली। उधर, जलालाबाद के चौक मनोरथपुर में 60 साल के रामाराम खेत में फसल की दुर्दशा से आहत होकर चल बसे।
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पुवायां। बारिश और आंधी से फसल में हुए नुकसान ने दो किसानों, गांव सबली कटेली के जयराम और गांव मुड़िया कुर्मियात के श्यामाचरन, की जान ले ली है। दोनों किसान भारी कर्जे में दबे हुए थे। परिवार के मुखिया की मौत से किसान की पत्नी और पांच बच्चे अनाथ हो गए तो दूसरे किसान के पिता की बुढ़ापे की लाठी टूट गई। एक तरफ केंद्रीय दल खेतों में पहुंचकर फसलों में हुई क्षति का जायजा लेता रहा तो दूसरी ओर परिवार के लोगों के करुण क्रंदन के बीच किसानों की चिता को आग दी गई। एसडीएम लालबहादुर ने किसानों की मौत के बारे में जानकारी से इंकार किया है।
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जलालाबाद। मंगलवार रात कुदरती कहर से बरबाद हुई गेहूं की फसल देख सदमे में आए क्षेत्र के गांव चौक मनोरथपुर सहसोबारी 60 वर्षीय रामाराम की मौत हो गई। बुधवार को गांव पहुंचे लेखपाल ने मामले की जांच पड़ताल की। इसमें मौत बीमारी के चलते होना बताया गया है।
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मृतक के बड़े बेटे ब्रजेश के अनुसार मंगलवार को खेत में गेहूं की कटाई हो रही थी। शाम के वक्त उसके पिता वहां पहुंचे और कुछ देर रुकने के बाद घर लौट आए। बिना किसी से बात किए हुए वह चारपाई पर लेट गए। देर तक न बोलने पर उन्हें बेहोशी की हालत में देखा तो घर में चीख पुकार मच गई। रात करीब दस बजे घर के लोग उन्हें इलाज के लिए जलालाबाद को ला रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं। ब्रजेश के अनुसार उसके पिता को कोई बीमारी नहीं थी। मृतक के घर में पत्नी के अलावा पांच बेटे तथा एक अविवाहित बेटी है, जबकि दो बेटियों की शादी हो चुकी है। मुखिया की मौत से पूरे परिवार में मातम का माहौल है।

कर्ज लेकर अपने खेत और बटाई पर बोई थी फसल
जलालाबाद। मृतक रामाराम के पास अपनी करीब 20 बीघा जमीन थी, लेकिन परिवार बड़ा होने के कारण इतनी जमीन में गुजर बसर में मुश्किल आने पर उन्होंने दस बीघा जमीन बटाई पर ले ली और सभी खेतोें गेहूं की फसल बोई गई थी। शुरुआती दौर में लागत की समस्या आने पर उसके पिता ने गांव तथा रिश्तेदारों से 20 हजार की रकम ब्याज पर ली थी। उम्मीद थी कि 30 बीघा जमीन में जब फसल तैयार होगी तो कर्ज उतर जाएगा तथा इसी साल वह अपनी छोटी बेटी के हाथ भी पीले कर देगा।
बारिश के चलते बर्बाद हुई फसल को देखकर वे लोग पहले से ही आहत थे। मंगलवार को उक्त खेतों में कटाई का काम शुरू, उसे देखने जब पिता खेत पर पहुंचे तो गेहूं की दुर्दशा देख वह इतने व्यथित हुए कि बिना कुछ कहे घर आकर चुपचाप लेट गए। घरवालों के अनुसार कुदरत के कहर में आई उक्त फसल में लागत निकल पाने की उम्मीद भी टूट गई। साथ ही उन सभी अरमानों पर भी पानी फिर गया जो खेतों में लहलहाती फसल के दौरान देखे थे। ऊपर से उधार ली गई रकम को वापस न कर पाने की चिंता का सदमा उसकी मौत का कारण बन गया। घर के मुखिया की अचानक हुई मौत से घर के लोग गहरे सदमे में है। पत्नी सोनकली के सिर पर इतने बड़े परिवार का बोझ उठा पाने की पहाड़ सी जिम्मेदारी आ गई है। बुधवार दोपहर घरवालों ने मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया।



सदमे से नहीं बीमारी से हुई रामाराम की मौत
रामाराम बीमार चल रहा था। लेखपाल द्वारा कराई गई जांच में पता लगा है कि उसकी फसल का कोई खास नुकसान नहीं हुआ था। उसकी मौत सदमे में नहीं, बल्कि बीमारी के चलते स्वाभाविक है।
- जंगबहादुर सिंह यादव, एसडीएम जलालाबाद
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