फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Another coat of Khutar neighborhood Peepli Live

खुटार के कोट मोहल्ले में एक और पीपली लाइव

Wed, 17 Jun 2015 11:16 PM IST
नीरज श्रीवास्तव/बरेली।
नीरज श्रीवास्तव/बरेली। Updated Wed, 17 Jun 2015 11:16 PM IST
विज्ञापन
Another coat of Khutar neighborhood Peepli Live
शाहजहांपुर से तकरीबन 60 किलोमीटर दूर खुटार कस्बे का कोट मोहल्ला एक और पीपली लाइव बन गया है। नेशनल चैनल अपनी ओबी वैन के साथ जमे हैं। उधर, जगेन्द्र की पत्नी बेसुध पड़ी है। पास में ही चाय और पकौड़ों की दुकान भी पर भी खूब भीड़ है। विपक्षी पार्टियों के नेता भी धरना स्थल पर आ जा रहे हैं, जहां जगेन्द्र का परिवार शोकाकुल बैठा है। नाते-रिश्तेदार जो अब तक नदारद थे, नुमाया हो गए हैं। पुलिस वाले अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। कुल मिलाकर जिसकी जान गई, उसके दरवाजे पर मजमा लगा हुआ है। अब कहा जा रहा है कि जगेंद्र की तेरहवीं भी यहीं पर होगी।
विज्ञापन

यहीं के एक निवासी कहते हैं, जगेंद्र अपना काम शाहजहांपुर में करते थे। कभी-कभी यहां आते और एक-आध दिन परिवार के साथ रहते, फिर चले जाते। वो अपना ज्यादातर काम वहीं से करते थे। हमने तो कभी ओबी वैन क्या, टीवी एंकर को भी नहीं देखा था, लेकिन एक दु:खद हादसे ने इन्हें हमारे घर पर तैनात कर दिया है। इन्हें यहां से ज्यादा सरकार और मंत्री के घर कैमरा फिराना चाहिए। जगेंद्र के घरवाले अब इनके लिए कहानी है। ये उनके पिता, पत्नी और बच्चों में स्टोरी देख रहे हैं और उन्हें अपने कैमरों की नजरों से ओझल नहीं होने दे रहे। इन्हें समझना चाहिए कि यहां एक कहानी खत्म हो चुकी है। असली कहानी तो इन्हें जगेंद्र के फेसबुक वॉल पर उसकी पोस्ट में ही मिलेगी।
विज्ञापन

वो अभी अपनी बात कह ही रहे थे कि उन्हें एक और समाचार चैनल का कैमरामैन किनारे हटने के लिए कहता है। उसे उस मंच को शूट करना है जहां जगेंद्र का पूरा परिवार न्याय की आस में धरने पर बैठा है। मंच पर आसीन राष्ट्रीय दल की एक नेता इस मौके को सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ भुनाने में जुटी हैं। कहती हैं, जिस सरकार को इन लोगों ने जिताकर कुर्सी पर बैठाया वही इन्हें उतार भी फेंकेगी। कहती हैं, अब चुनाव ज्यादा दूर नहीं है। दो साल ही तो बचे हैं। तभी हो जाएगा न्याय। वहां मौजूद एक बुजुर्ग कहते हैं, देखते हैं कौन करता है न्याय। हम किसी झांसे में आने वाले नहीं है। हमें तो अदालत से ही न्याय की उम्मीद है। यहां के युवा फिलहाल ऊपर से शांत दिखते हैं पर जब कुछ टटोलने की कोशिश करो तो भीतर उबाल साफ महसूस किया जा सकता है। जगेंद्र के छोटे बेटे राहुल का एक दोस्त कहता है, इंसाफ तो होना चाहिए। हम झुकने वाले नहीं हैं। हम लड़ेंगे, फिर चाहे सामने कितना ही कद्दावर नेता या पूरी सरकार ही क्यों न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed