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एक महीने बाद माता-पिता के पास पहुंचा मासूम परवेंद्र
Updated Sat, 07 Oct 2017 06:27 PM IST
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शाहजहांपुर। एक महीने के बाद तीन साल के मासूम परवेंद्र को उसके माता-पिता के हवाले कर दिया गया। उसे पाकर परिवार के चेहरे खिल उठे। न्यायपीठ बाल कल्याण समिति ने सुनवाई के बाद बालक को उसके माता-पिता के सुपुर्द करने का आदेश दिया था। बालक को अगवा कर बेचे जाने के इस मामले में तीन नामजदों में से पुलिस एक को जेल भेज चुकी है। बालक को सुपुर्दगी में लेने के बाद माता-पिता घर रवाना हो गए।
कलान थाने के गांव पटना देवकली निवासी सुरेशपाल यादव का तीन वर्षीय बेटा परवेंद्र 31 अगस्त को घर के बाहर खेलते वक्त लापता हो गया था। 24 सितंबर को मिर्जापुर थाना पुलिस ने ग्राम काकर के खुशीराम जाटव से एक बालक बरामद किया था। जांच में पता लगा कि बालक को अगवा करने के बाद बेचा गया था। इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ मानव तस्करी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने खुशीराम को भेज भेज दिया था। पुलिस ने बालक को न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। समिति ने बालक को लखीमपुर खीरी स्थित शिशु गृह भेज दिया था। जानकारी होने पर सुरेशपाल यादव ने मिर्जापुर थाने पहुंच कर बालक की शिनाख्त अपने बेटे परवेंद्र के रूप में की थी। एसओ मिर्जापुर वीरेंद्र कुमार चौहान ने सुरेशपाल को बाल कल्याण समिति के समक्ष दावा पेश करने का सुझाव दिया। सुरेशपाल और उसकी पत्नी ओमवती ने साक्ष्यों के साथ दावा पेश किया। सुनवाई के बाद समिति ने बालक को माता-पिता के सुपुर्द करने का आदेश दिया। कार्रवाई के दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह, सदस्य सुयश सिन्हा, डॉ. एसपी कौशल, दिलीप कुमार सक्सेना, डॉ. उर्मिला, जीशान अहमद आदि रहे।
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कलान थाने के गांव पटना देवकली निवासी सुरेशपाल यादव का तीन वर्षीय बेटा परवेंद्र 31 अगस्त को घर के बाहर खेलते वक्त लापता हो गया था। 24 सितंबर को मिर्जापुर थाना पुलिस ने ग्राम काकर के खुशीराम जाटव से एक बालक बरामद किया था। जांच में पता लगा कि बालक को अगवा करने के बाद बेचा गया था। इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ मानव तस्करी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने खुशीराम को भेज भेज दिया था। पुलिस ने बालक को न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। समिति ने बालक को लखीमपुर खीरी स्थित शिशु गृह भेज दिया था। जानकारी होने पर सुरेशपाल यादव ने मिर्जापुर थाने पहुंच कर बालक की शिनाख्त अपने बेटे परवेंद्र के रूप में की थी। एसओ मिर्जापुर वीरेंद्र कुमार चौहान ने सुरेशपाल को बाल कल्याण समिति के समक्ष दावा पेश करने का सुझाव दिया। सुरेशपाल और उसकी पत्नी ओमवती ने साक्ष्यों के साथ दावा पेश किया। सुनवाई के बाद समिति ने बालक को माता-पिता के सुपुर्द करने का आदेश दिया। कार्रवाई के दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह, सदस्य सुयश सिन्हा, डॉ. एसपी कौशल, दिलीप कुमार सक्सेना, डॉ. उर्मिला, जीशान अहमद आदि रहे।
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