फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   crime

खुटार में मैक्रोनी खाने से पिता-पुत्र की मौत

Mon, 12 Jul 2021 12:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jul 2021 12:36 AM IST
विज्ञापन
crime
पुवायां (शाहजहांपुर)। खुटार ब्लॉक के ग्राम छापाबोझी में मैक्रोनी खाने के बाद पूरे परिवार की हालत बिगड़ गई। इससे इलाज के दौरान पिता-पुत्र की मौत हो गई। परिवार के बाकी सदस्यों की हालत अभी खराब है।
विज्ञापन

सात जुलाई को खुटार इलाके के ग्राम छापाबोझी निवासी निवासी शंकरलाल (45) का 17 वर्षीय बेटा रजनीश कुमार (17) पड़ोस के गांव नरौठा की एक दुकान से खुली माइक्रोनी खरीदकर लाया था। शंकरलाल की पत्नी ऊषा देवी ने बताया कि उसी दिन दोपहर बाद मैक्रोनी बनाकर पूरे परिवार ने खाई। माइक्रोनी खाने के बाद शंकरलाल, उनकी पत्नी ऊषा देवी, बेटा रजनीश, दस वर्षीय विशाल, सात वर्षीय बेटी किरन के पेट में दर्द होने के साथ उल्टी, दस्त शुरू हो गए। शंकरलाल की हालत ज्यादा खराब होने पर शंकरलाल को नरोठा गांव एक झोलाछाप के यहां ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान आठ जुलाई को शंकरलाल की मौत हो गई। उनके परिवार के बाकी सदस्यों का इलाज भी झोलाछाप ने किया। तीन दिन बाद दस जुलाई को रजनीश की हालत ज्यादा बिगड़ी तो झोलाछाप ने उसे बाहर ले जाने की सलाह दी। इस पर रजनीश को दस जुलाई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां रविवार 11 जुलाई को इलाज के दौरान रजनीश ने दम तोड़ दिया। ऊषा देवी, विशाल और किरन की हालत अभी खराब है, जिससे तीनों का इलाज चल रहा है। ऊषा देवी ने बताया कि रजनीश मैक्रोनी किस दुकान से लाया था उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
विज्ञापन

झोलाछाप पर भरोसा नहीं करते तो बच सकती थी पिता-पुत्र की जान
ऊषा देवी के अनुसार उनके गांव से एक किमी दूर गांव नरौठा हाईवे पर बसा काफी बड़ा गांव है। वहां कई लोग बिना डिग्री के इलाज करते हैं। माइक्रोनी खाने के बाद परिवार के लोग बीमार हुए तो नरौठी पहुंचने पर एक झोलाछाप ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं। सभी को ठीक करने का वायदा किया। आठ जुलाई को शंकरलाल की मौत के बाद भी झोलाछाप इलाज करता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

आर्थिक संकट में फंसा परिवार
शंकरलाल और उनके बड़े पुत्र रजनीश की मौत से परिवार पर बड़ा आर्थिक संकट आ पड़ा है। शंकरलाल के पास सवा एकड़ जमीन है। पिता-पुत्र खेती के अलावा मजदूरी भी कर लेते थे। उनके न रहने से घर में कमाने वाला कोई नहीं रहा। बड़ा सवाल यह है कि अब परिवार का गुजारा कैसे होगा।

जो लक्षण शंकरलाल के परिवार के लोगों के बताए जा रहे हैं, उससे लगता है कि परिवार फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुआ है। माइक्रोनी ज्यादा दिन की रखी होने से भी ऐसा हो सकता है। मैक्रोनी आदि अच्छी कंपनी की और पैकेटबंद ही लेनी चाहिए। पैकेट पर एक्सपायरी तिथि आदि देखने के बाद ही वस्तुओं को प्रयोग करें। खाद्य तेल आदि भी खुले न खरीदें। बासी भोजन कतई न करें और साफ सफाई से रहना चाहिए। - डॉ. मोहम्मद आसिफ, सीएचसी प्रभारी पुवायां
परिवार के लोग पुलिस को प्रार्थनापत्र दें। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों से बात कर जांच कराई जाएगी। दोषियों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
सतीश चंद्रा, एसडीएम पुवायां
ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नही है। अगर ऐसा है तो जांच कराई जाएगी और लाई गई मैक्रोनी बची है तो सैंपल जांच के लिए भेजा जाएगा।
- जयपाल सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी शाहजहांपुर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed