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ठेकेदार को भुगतान में देरी पर फंसे मंडी के सहायक अभियंता
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शाहजहांपुर। सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से परेशान रोजा मंडी के पंजीकृत ठेकेदारों को गत वित्त वर्ष में कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान करने में देरी के मामले में मंडी के प्रभारी सहायक अभियंता अशोक कुमार फंसते नजर आ रहे हैं। वहां के एक ठेकेदार की शिकायत पर डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने मंडी के उप निदेशक निर्माण को भुगतान में देरी करने के मामले में सहायक अभियंता के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
रोजा मंडी एवं पीडब्ल्यूडी के पंजीकृत ठेकेदारों ने बीते तीन साल के दौरान संबंधित विभागों से स्वीकृत करीब एक अरब रुपये से अधिक के काम कराए, लेकिन 50 से 70 फीसदी भुगतान के बिल अभी तक स्वीकृत नहीं हुए। ऐसे ही एक मामले में अफसरशाही से परेशान होकर पिछले दिनों वाराणसी में एक ठेकेदार द्वारा गोली मारकर आत्महत्या कर लेने से आहत स्थानीय ठेकेदारों के दबाव बनाने पर पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन ने अवशेष भुगतान एवं नवीन निर्माण कार्यों के लिए शासन से अनुपूरक बजट जुटा लिया, लेकिन मंडी प्रशासन इस मामले में लापरवाह बना रहा।
रोजा मंडी में करीब 50 पंजीकृत ठेकेदार हैं। अन्य विभागों की तरह उन्हें बीते तीन वित्त वर्ष में गड्डा मुक्ति अभियान के तहत जर्जर सड़कों पर पैचवर्क समेत करीब पांच दर्जन से अधिक संपर्क मार्गों एवं पुलिया निर्माण के काम दिए गए। ठेकेदारों ने भुगतान बाद में होने की प्रत्याशा में अपनी रकम से निर्माण कार्य कराए, लेकिन अधिकांश ठेकेदारों का 40 फीसदी भुगतान अभी तक अटका है। गत सप्ताह मंडी में पंजीकृत निर्माण संस्था मेसर्स अरनव इंटरप्राइजेज के संचालक अनूप वर्मा ने डीएम को पत्र देकर बताया कि उन्होंने वित्त वर्ष 2018-19 में 31.36 लाख रुपये के काम कराए। इसमें 60 प्रतिशत भुगतान हो चुका है, लेकिन अवशेष 40 प्रतिशत व्यय धनराशि का भुगतान नहीं मिला है।
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डीएम से शिकायत होने पर मंडी उप निदेशक (निर्माण) रवींद्र सिंह ने आश्वस्त किया कि जिला स्तर पर गठित तकनीकी टीम से कराए गए कार्यों की गुणवत्ता जांच करा ली गई है और उसमें कोई कमी नहीं मिलने पर ठेकेदारों को भुगतान जल्द मिल जाएगा। इसी के साथ उन्होंने सहायक अभियंता को भुगतान कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। ठेकेदार अनूप वर्मा ने डीएम को वस्तु स्थिति से अवगत कराया। इस पर डीएम ने उप निदेशक (निर्माण) को लंबित भुगतान जल्द कराने और भुगतान में देरी तथा लापरवाही के लिए सहायक अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई कर आख्या देे के निर्देश दिए हैं।
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रोजा मंडी एवं पीडब्ल्यूडी के पंजीकृत ठेकेदारों ने बीते तीन साल के दौरान संबंधित विभागों से स्वीकृत करीब एक अरब रुपये से अधिक के काम कराए, लेकिन 50 से 70 फीसदी भुगतान के बिल अभी तक स्वीकृत नहीं हुए। ऐसे ही एक मामले में अफसरशाही से परेशान होकर पिछले दिनों वाराणसी में एक ठेकेदार द्वारा गोली मारकर आत्महत्या कर लेने से आहत स्थानीय ठेकेदारों के दबाव बनाने पर पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन ने अवशेष भुगतान एवं नवीन निर्माण कार्यों के लिए शासन से अनुपूरक बजट जुटा लिया, लेकिन मंडी प्रशासन इस मामले में लापरवाह बना रहा।
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रोजा मंडी में करीब 50 पंजीकृत ठेकेदार हैं। अन्य विभागों की तरह उन्हें बीते तीन वित्त वर्ष में गड्डा मुक्ति अभियान के तहत जर्जर सड़कों पर पैचवर्क समेत करीब पांच दर्जन से अधिक संपर्क मार्गों एवं पुलिया निर्माण के काम दिए गए। ठेकेदारों ने भुगतान बाद में होने की प्रत्याशा में अपनी रकम से निर्माण कार्य कराए, लेकिन अधिकांश ठेकेदारों का 40 फीसदी भुगतान अभी तक अटका है। गत सप्ताह मंडी में पंजीकृत निर्माण संस्था मेसर्स अरनव इंटरप्राइजेज के संचालक अनूप वर्मा ने डीएम को पत्र देकर बताया कि उन्होंने वित्त वर्ष 2018-19 में 31.36 लाख रुपये के काम कराए। इसमें 60 प्रतिशत भुगतान हो चुका है, लेकिन अवशेष 40 प्रतिशत व्यय धनराशि का भुगतान नहीं मिला है।
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डीएम से शिकायत होने पर मंडी उप निदेशक (निर्माण) रवींद्र सिंह ने आश्वस्त किया कि जिला स्तर पर गठित तकनीकी टीम से कराए गए कार्यों की गुणवत्ता जांच करा ली गई है और उसमें कोई कमी नहीं मिलने पर ठेकेदारों को भुगतान जल्द मिल जाएगा। इसी के साथ उन्होंने सहायक अभियंता को भुगतान कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। ठेकेदार अनूप वर्मा ने डीएम को वस्तु स्थिति से अवगत कराया। इस पर डीएम ने उप निदेशक (निर्माण) को लंबित भुगतान जल्द कराने और भुगतान में देरी तथा लापरवाही के लिए सहायक अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई कर आख्या देे के निर्देश दिए हैं।