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बाल हित के कामों में विभाग बनाएं आपसी सामंजस्य
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 07 Jun 2015 08:25 PM IST
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राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य रवींद्र कुमार चौहान नहीं मानते कि बाल हित की नीतियों पर अमल करने के लिए सरकारी विभाग आपसी सामंजस्य बनाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभागों में आपसी तालमेल बेहतर हो तभी बाल हित की तमाम योजनाएं सार्थक साबित होंगी।
जिले के दो दिवसीय दौरे पर मेरठ से आए आयोग के सदस्य चौहान ने पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में रविवार शाम अमर उजाला से बातचीत में स्वीकार किया कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने शिक्षा, श्रम, महिला कल्याण आदि विभागों के माध्यम से बच्चों के हित की जो योजनाएं लागू कर रखी हैं, विभागों में तालमेल की कमी के कारण उनका अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा। इसी कमी को दूर करने के लिए वह प्रदेश के दौरे पर निकले हैं।
उन्होंने कहा कि दो दिवसीय प्रवास के दौरान जिले में बेसिक शिक्षा, बालिका शिक्षा, महिला कल्याण से जुड़ी संस्थाओं का दौरा करके बाल हित में अब तक हुए कामों की समीक्षा करेंगे। पढ़ने योग्य जो बालिकाएं घरों में बैठी हैं, कस्तूरबा स्कूलों के माध्यम से उनका शैक्षिक पुनर्वासन कराना आयोग का लक्ष्य है। बाद में आयोग के सदस्य ने बाल संप्रेक्षण गृह जाकर वहां की व्यवस्थाएं देखीं और संवासी बच्चों से उपलब्ध सुविधाओं के बारे में पूछताछ की।
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बालक को बुलंदशहर भिजवाने का किया वायदा
नवादा इंदेपुर में बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण करने के दौरान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य रवींद्र चौहान ने वहां के संवासी बालक कपिल से बात करके उसे उसके घर बुलंदशहर जल्द भिजवाने का वायदा किया।
इससे पहले, बाल संप्रेक्षण गृह की प्रभारी ने आयोग सदस्य को बताया कि कपिल को इसी वर्ष 24 फरवरी को यहां लाया गया था। कपिल ने पूछे जाने पर बताया कि वह ट्रेन में बैइकर यहां आ गया। उसके पिता का नाम मुकेश लोधी है और बुलंदशहर में देवीपुरा इलाके के भोले बाबा मंदिर के पास उसका घर है। संप्रेक्षण गृह के रिकार्ड में भी यही पता दर्ज पाया गया। आयोग के सदस्य ने संप्रेक्षण गृह प्रभारी को कपिल की घर वापसी के लिए पत्रावली तैयार करने के निर्देश दिए।
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जिले के दो दिवसीय दौरे पर मेरठ से आए आयोग के सदस्य चौहान ने पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में रविवार शाम अमर उजाला से बातचीत में स्वीकार किया कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने शिक्षा, श्रम, महिला कल्याण आदि विभागों के माध्यम से बच्चों के हित की जो योजनाएं लागू कर रखी हैं, विभागों में तालमेल की कमी के कारण उनका अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा। इसी कमी को दूर करने के लिए वह प्रदेश के दौरे पर निकले हैं।
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उन्होंने कहा कि दो दिवसीय प्रवास के दौरान जिले में बेसिक शिक्षा, बालिका शिक्षा, महिला कल्याण से जुड़ी संस्थाओं का दौरा करके बाल हित में अब तक हुए कामों की समीक्षा करेंगे। पढ़ने योग्य जो बालिकाएं घरों में बैठी हैं, कस्तूरबा स्कूलों के माध्यम से उनका शैक्षिक पुनर्वासन कराना आयोग का लक्ष्य है। बाद में आयोग के सदस्य ने बाल संप्रेक्षण गृह जाकर वहां की व्यवस्थाएं देखीं और संवासी बच्चों से उपलब्ध सुविधाओं के बारे में पूछताछ की।
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बालक को बुलंदशहर भिजवाने का किया वायदा
नवादा इंदेपुर में बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण करने के दौरान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य रवींद्र चौहान ने वहां के संवासी बालक कपिल से बात करके उसे उसके घर बुलंदशहर जल्द भिजवाने का वायदा किया।
इससे पहले, बाल संप्रेक्षण गृह की प्रभारी ने आयोग सदस्य को बताया कि कपिल को इसी वर्ष 24 फरवरी को यहां लाया गया था। कपिल ने पूछे जाने पर बताया कि वह ट्रेन में बैइकर यहां आ गया। उसके पिता का नाम मुकेश लोधी है और बुलंदशहर में देवीपुरा इलाके के भोले बाबा मंदिर के पास उसका घर है। संप्रेक्षण गृह के रिकार्ड में भी यही पता दर्ज पाया गया। आयोग के सदस्य ने संप्रेक्षण गृह प्रभारी को कपिल की घर वापसी के लिए पत्रावली तैयार करने के निर्देश दिए।