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हत्या के मामले में दो सगे भाइयों समेत चार को उम्रकैद
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शाहजहांपुर। षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश गोपाल उपाध्याय ने वर्ष 2008 में निगोही क्षेत्र के गांव जेबा मुकुंदपुर में हुई हत्या के मामले में सुनवाई करते हुए दोष सिद्ध होने पर दो सगे भाइयों समेत चार को उम्रकैद की सजा और 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
गांव जेबा मुकुंदपुर निवासी छुटकून्नू उर्फ नत्थूलाल अपने भाई राजेंद्र के साथ 15 सितंबर 2008 को अपने बैलों को नमक दे रहे थे, इसी दौरान उन दोनों ने पड़ोसी श्रीनिवास और कालीचरन (सगे भाइयों) को आपस में झगड़ते देखा तो वह बचाने चले गए और दोनों को शांत करते हुए झगड़ा करने मना किया। इस बात से नाराज होकर दोनों लोग राजीव व रामप्रकाश के साथ आए। उन लोगों के पास तमंचा, रायफल थी उन लोगों ने हमला बोल दिया और दोनों ने छुटकुन्नू पर गोली चला दी, गोली लगते ही वह घायल होकर जमीन पर गिर गए। कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। बेटे नरवेश ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया। कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात व सरकारी वकील शशी मोहन सिंह के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने दो सगे भाइयों समेत चार आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही रामनिवास और राजीव को आर्म्स एक्ट के तहत एक वर्ष का कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अदालत के न्याय पर खुश है परिवार
छुटकुन्नू की मौत के बाद परिवार पूरी तरह से टूट चुका था। उन्हें जब कोर्ट का फैसला सुनाया गया तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। बेटे नरवेश और पवन घटना को याद कर आज भी सिहर जाते हैं।
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गांव जेबा मुकुंदपुर निवासी छुटकून्नू उर्फ नत्थूलाल अपने भाई राजेंद्र के साथ 15 सितंबर 2008 को अपने बैलों को नमक दे रहे थे, इसी दौरान उन दोनों ने पड़ोसी श्रीनिवास और कालीचरन (सगे भाइयों) को आपस में झगड़ते देखा तो वह बचाने चले गए और दोनों को शांत करते हुए झगड़ा करने मना किया। इस बात से नाराज होकर दोनों लोग राजीव व रामप्रकाश के साथ आए। उन लोगों के पास तमंचा, रायफल थी उन लोगों ने हमला बोल दिया और दोनों ने छुटकुन्नू पर गोली चला दी, गोली लगते ही वह घायल होकर जमीन पर गिर गए। कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। बेटे नरवेश ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया। कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात व सरकारी वकील शशी मोहन सिंह के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने दो सगे भाइयों समेत चार आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही रामनिवास और राजीव को आर्म्स एक्ट के तहत एक वर्ष का कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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अदालत के न्याय पर खुश है परिवार
छुटकुन्नू की मौत के बाद परिवार पूरी तरह से टूट चुका था। उन्हें जब कोर्ट का फैसला सुनाया गया तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। बेटे नरवेश और पवन घटना को याद कर आज भी सिहर जाते हैं।
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