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20 साल से जीत को तरसती कांग्रेस को बड़े उलटफेर का आसरा

Fri, 14 Jan 2022 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jan 2022 12:48 AM IST
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Congress longing for victory for 20 years is expected to make a big difference
आशीष त्रिपाठी
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शाहजहांपुर। जिले में सबसे पहले कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर छह में से पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। प्रियंका वाड्रा के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ नारे के तहत तीन सीटें महिला प्रत्याशियों के खाते में गईं हैं। इससे महिलाओं को राजनीति में प्राथमिकता का संदेश देने की कोशिश की गई है। पिछले 20 साल से जिले में एक सीट के लिए तरस रही कांग्रेस 2022 के विधानसभा चुनाव में बड़े उलटफेर के सहारे लड़ती दिखाई पड़ रही है।
जिले में 2002 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तिलहर सीट जीती थी। इसके बाद लगातार तीन चुनाव में जिले की एक भी सीट जीतने में कांग्रेस नाकामयाब रही। 2009 में पुवायां सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी के प्रत्याशी चेतराम दूसरे नंबर पर रहे थे। वरना पिछले तीनों चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सभी सीटों पर दूसरे स्थान पर भी नहीं रह सके थे। 2002 से पहले कांग्रेस विधानसभा में मुख्य पार्टी हुआ करती थी। इसकी एक बड़ी वजह कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे जितेंद्र प्रसाद भी थे। जब तक वह जीवित रहे, जिले में कांग्रेस का दबदबा रहा। उनके निधन के बाद कांग्रेस को एक सीट जीतने के लिए भी बड़ा संघर्ष करना पड़ा।
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1985 के बाद कांग्रेस नगर क्षेत्र में सीट नहीं निकाल सकी। 1996 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर ददरौल से रामऔतार मिश्रा, तिलहर से वीरेंद्र पाल सिंह मुन्ना, पुवायां से चेतराम विधायक बने थे। निगोही सीट पर अंतिम बार 1989 में अहिबरन लाल कांग्रेस से विधायक बने थे। जलालाबाद में भी कांग्रेस को जीते 33 साल हो चुके हैं। 1989 में उदयवीर सिंह यहां से कांग्रेसी विधायक बने थे। 2017 का चुनाव कांग्रेस ने सपा से मिलकर लड़ा था।
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गठबंधन के कारण जिले में केवल एक सीट कांग्रेस को मिली थी। कद्दावर नेता जितिन प्रसाद तिलहर सीट से लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पिछले साल जितिन प्रसाद के भाजपा में आने से भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। माना जा रहा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में बड़े उलटफेर के जरिये कांग्रेस जिले में अपना खोया गौरव वापस पाने का प्रयास करेगी।
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