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स्कूली बच्चों को लाने ले-जाने के लिए ई-रिक्शा पर पूर्णतया प्रतिबंध
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शाहजहांपुर में ई- रिक्शा में बैठकर स्कूल जाते बच्चें । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश मोटर यान (26वां संशोधन) नियमावली 2019 के अंतर्गत विशेष स्कूली वाहनों के संबंध में डीएम उमेश प्रताप सिंह ने डीआईओएस व बीएसए को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत स्कूली बच्चों को लाने-ले-जाने के लिए ई-रिक्शा पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया है।
डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा कि स्कूल के नाम पंजीकृत बस की आयु 15 वर्ष, स्कूल में ठेका परमिट के साथ अनुबंधित एवं 13 सीट से कम वाहन की आयु 10 वर्ष निर्धारित की गई है। यदि वाहन की आयु पूर्ण हो गई है तो ऐसी स्थिति में या तो वाहन का पंजीयन चिह्न निरस्त करा लें अथवा वाहन अन्य रूप में परिवर्तित कर लें। वाहन के चालक एवं परिचालक को निर्धारित वर्दी में रहना चाहिए। वाहन का रंग पीला एवं वाहन के आगे-पीछे विद्यालय बस एवं विद्यालय का नाम व मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए।
वाहन में जीपीएस सीसीटीवी, पारदर्शी फर्स्ट एड बॉक्स, एसएलडी (40 किमी से कम) लगा होना चाहिए। इसी तरह से वाहन में अग्निशमन यंत्र, अलार्म घंटी व सायरन लगा होना जरूरी है। खिड़की में कम से कम चार क्षैतिज स्टील रॉड इस तरह लगी हो कि दो रॉड के बीच की दूरी पांच सेमी से अधिक न हो। इसी प्रकार छोटे वाहनों में जाली या रॉड लगाने के निर्देश हैं। वाहन में प्रेशर अथवा मल्टी हार्न नहीं होगा।
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डीआईओएस व बीएसए अपने स्तर से सभी स्कूल प्रबंधकों को सूचित करेंगे कि इन निर्देशों के साथ यह भी सुनिश्चित करें कि स्कूली बच्चों के परिवहन में लगे वाहनों में परमिट होना चाहिए। ई-रिक्शा पर स्कूली बच्चों का परिवहन नहीं किया जाएगा। इस आशय का एक शपथ पत्र एक सप्ताह के अंदर परिवहन विभाग में उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराना होगा। उनके विद्यालय में किसी भी बच्चे का परिवहन बिना परमिट, बिना फिटनेस, निजी वैन एवं ई-रिक्शा में नहीं किया जाएगा। अनुमन्य वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों का परिवहन नहीं किया जाएगा।
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डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा कि स्कूल के नाम पंजीकृत बस की आयु 15 वर्ष, स्कूल में ठेका परमिट के साथ अनुबंधित एवं 13 सीट से कम वाहन की आयु 10 वर्ष निर्धारित की गई है। यदि वाहन की आयु पूर्ण हो गई है तो ऐसी स्थिति में या तो वाहन का पंजीयन चिह्न निरस्त करा लें अथवा वाहन अन्य रूप में परिवर्तित कर लें। वाहन के चालक एवं परिचालक को निर्धारित वर्दी में रहना चाहिए। वाहन का रंग पीला एवं वाहन के आगे-पीछे विद्यालय बस एवं विद्यालय का नाम व मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए।
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वाहन में जीपीएस सीसीटीवी, पारदर्शी फर्स्ट एड बॉक्स, एसएलडी (40 किमी से कम) लगा होना चाहिए। इसी तरह से वाहन में अग्निशमन यंत्र, अलार्म घंटी व सायरन लगा होना जरूरी है। खिड़की में कम से कम चार क्षैतिज स्टील रॉड इस तरह लगी हो कि दो रॉड के बीच की दूरी पांच सेमी से अधिक न हो। इसी प्रकार छोटे वाहनों में जाली या रॉड लगाने के निर्देश हैं। वाहन में प्रेशर अथवा मल्टी हार्न नहीं होगा।
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डीआईओएस व बीएसए अपने स्तर से सभी स्कूल प्रबंधकों को सूचित करेंगे कि इन निर्देशों के साथ यह भी सुनिश्चित करें कि स्कूली बच्चों के परिवहन में लगे वाहनों में परमिट होना चाहिए। ई-रिक्शा पर स्कूली बच्चों का परिवहन नहीं किया जाएगा। इस आशय का एक शपथ पत्र एक सप्ताह के अंदर परिवहन विभाग में उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराना होगा। उनके विद्यालय में किसी भी बच्चे का परिवहन बिना परमिट, बिना फिटनेस, निजी वैन एवं ई-रिक्शा में नहीं किया जाएगा। अनुमन्य वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों का परिवहन नहीं किया जाएगा।